(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन व इसे रोकना) |
संदर्भ
केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) मामलों के खिलाफ ठोस कदम उठाना शुरू किया है। ये घोटाले आम नागरिकों, विशेषकर बुज़ुर्गों एवं संवेदनशील वर्ग के लोगों से उनकी कमाई छीन रहे थे। इसको रोकने के लिए गृह मंत्रालय की विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee: IDC) का गठन किया गया है जिसने अब तक कई बैठकें आयोजित की हैं। इनमें हाल की बैठक में ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म, जैसे- Google, WhatsApp, Telegram व Microsoft के प्रतिनिधि शामिल हुए।
अंतर-विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee: IDC)
- यह उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति 26 दिसंबर 2025 को गठित की गई थी, जिसमें कई एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं ताकि ‘डिजिटल अरेस्ट की समस्या के सभी पहलुओं की व्यापक जाँच’ की जा सके।
- IDC की अध्यक्षता विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं। इसमें संयुक्त सचिव स्तर या उससे ऊपर के अधिकारी शामिल हैं जिनमें निम्नलिखित विभाग व एजेंसियां शामिल हैं-
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
- दूरसंचार विभाग (DoT)
- विदेश मंत्रालय
- वित्तीय सेवाओं का विभाग
- कानून एवं न्याय मंत्रालय
- उपभोक्ता कार्य मंत्रालय
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
- केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI)
- राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA)
- दिल्ली पुलिस
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C)

IDC के उद्देश्य
- प्रवर्तन एजेंसियों को ‘रियल-टाइम मुद्दों’ पर मार्गदर्शन देना
- प्रासंगिक कानून, नियम, सर्कुलर एवं कार्यान्वयन में अंतर की पहचान करना
- सुधारात्मक उपाय सुझाना
- सर्वोच्च न्यायालय को आवश्यकतानुसार आगे के निर्देशों के लिए इनपुट प्रदान करना
CBI की भूमिका
- 1 दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने CBI को ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालेबाजों और उनके सहयोगियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। CBI को बैंकर्स की भूमिका की जांच करने और साइबर अपराधों से जुड़े म्यूल अकाउंट्स की छानबीन करने का ‘पूर्ण अधिकार’ दिया गया।
- वर्ष 2022 से 2024 तक डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अपराधी पुलिस अधिकारी और जज बनकर लोगों को ‘ऑनलाइन गिरफ्तार’ होने की धमकी देकर उनसे पैसे ठगते थे। सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल डिजिटल अरेस्ट मामलों में ही 3,000 करोड़ रुपए की ठगी हो चुकी है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट घोटाला
- डिजिटल अरेस्ट घोटाला (Digital Arrest Scam) एक तरह की ऑनलाइन धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी लोगों की मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं।
- इसमें अपराधी पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं और उन पर झूठे आरोप लगाते हैं, जैस कि उन्होंने कोई अवैध गतिविधि की है।
- इसके बाद वे पीड़ित से पैसे की मांग करते हैं और भुगतान के लिए दबाव डालते हैं।
- यह घोटाला खासतौर पर बुज़ुर्ग और संवेदनशील वर्ग के लोगों को निशाना बनाता है क्योंकि ये आसानी से डराने-धमकाने की तकनीक से प्रभावित हो जाते हैं।
डिजिटल अरेस्ट घोटाला की प्रणाली
- डिजिटल अरेस्ट घोटाले में अपराधी प्राय: सी.बी.आई. एजेंट, आयकर अधिकारी या सीमा शुल्क अधिकारी जैसे कानून प्रवर्तन अधिकारी होने का नाटक करते हैं और फोन के माध्यम से पीड़ित से संपर्क करते हैं।
- इसके बाद वे पीड़ित को व्हाट्सएप, स्काइप या अन्य वीडियो कॉल प्लेटफ़ॉर्म पर बात करने के लिए मजबूर करते हैं। घोटालेबाज विभिन्न आरोपों, जैसे- वित्तीय कदाचार, कर चोरी या अन्य कानूनी उल्लंघनों का हवाला देते हुए ‘डिजिटल गिरफ्तारी वारंट’ की धमकी देते हैं।
- कुछ मामलों में स्कैमर पुलिस स्टेशन जैसा माहौल बनाकर कॉल को वैध दिखाने की कोशिश करते हैं। फिर ‘नाम हटाने’, ‘जांच में सहायता करने’ या ‘वापसी योग्य सुरक्षा जमा/एस्क्रो खाते’ जैसी बहानों से लोगों को निर्दिष्ट बैंक खाते या यू.पी.आई. आई.डी. में बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
डिजिटल अरेस्ट घोटाले से बचाव के उपाय
डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से बचने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका सतर्कता है। इसे रोकने के लिए कुछ अहम सुझाव इस प्रकार हैं-
- फर्जी अधिकारियों के कॉल से सतर्क रहना : ऐसा कोई भी फोन कॉल या मैसेज जिसमें दावा किया जाए कि आप किसी कानूनी परेशानी में हैं, तुरंत गंभीरता से न लें। वास्तविक कानून प्रवर्तन एजेंसियां कभी भी आपसे भुगतान या बैंकिंग विवरण नहीं मांगतीं।
- दबाव और डर का जाल न फंसना : साइबर अपराधी ‘तत्काल कार्रवाई करें’ जैसी रणनीति अपनाते हैं। ऐसी मानसिक दबाव वाली चालों में न फंसे और तुरंत निर्णय न लें।
- संदेह होने पर सीधे पुष्टि करना : किसी भी कॉल या संदेश पर संदेह होने पर संबंधित सरकारी एजेंसी से सीधे संपर्क करके उनकी पहचान जांच करें।
- व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना : फोन या वीडियो कॉल पर अज्ञात नंबरों के साथ व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी साझा न करें।
- सरकारी एजेंसियों के प्लेटफ़ॉर्म पर ध्यान देना : सरकारी एजेंसियां व्हाट्सएप या स्काइप जैसे प्लेटफ़ॉर्म का प्रयोग आधिकारिक रूप से नहीं करती हैं।
- घटना की रिपोर्ट करना : यदि आपको लगता है कि आप धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर अपराध विभाग को सूचित करें।
डिजिटल अरेस्ट घोटाले का शिकार होने के बाद की स्थिति
- बैंक को तुरंत सूचित करना : अपने बैंक को तुरंत कॉल करें और अपने खाते को फ्रीज़ करने या रोकने के लिए कहें, ताकि आगे के नुकसान को रोका जा सके।
- साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करना : राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर मामला दर्ज करें। यह सरकारी प्लेटफ़ॉर्म है जो साइबर अपराध की जांच में मदद करता है।
- साक्ष्य सुरक्षित रखना : आपके पास मौजूद सभी सबूत, जैसे- कॉल रिकॉर्ड, लेनदेन विवरण, मैसेज, ईमेल आदि सुरक्षित रखें। ये आगे की जांच और पुलिस कार्रवाई में काम आएंगे।
- कानूनी मदद लेना : जरूरत पड़ने पर वकील या कानूनी विशेषज्ञ की मदद लें, ताकि आपके अधिकार सुरक्षित रहें और उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।