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सोमालीलैंड को मान्यता संबंधी मुद्दा

(प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, विश्व का भूगोल)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1 व 2: विश्व इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों व राजनीति का प्रभाव)

संदर्भ 

हाल ही में, इज़राइल ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित करने वाले सोमालीलैंड गणराज्य को औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता प्रदान की है। 

निर्णय से संबंधित प्रमुख बिंदु 

  • इज़राइल ऐसा करने वाला संयुक्त राष्ट्र (UN) का पहला सदस्य देश है। विदित है कि सोमालिया से अलग होने के बाद सोमालीलैंड वर्ष 1991 से स्वयं पर शासन कर रहा है और राजनयिक मान्यता की मांग करता रहा है।
  • सोमालीलैंड का इथियोपिया, अमेरिका एवं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के साथ राजनयिक संपर्क रहा है। यू.ए.ई. का सोमालीलैंड में एक सैन्य अड्डा होने का भी दावा है। यू.ए.ई. की बड़ी पोर्ट कंपनी डीपी वर्ल्ड का सोमालीलैंड के शहर बेरबेरा में एक बंदरगाह भी है।

निर्णय की आलोचना

इस फैसले ने अरब लीग, खाड़ी सहयोग परिषद, अफ्रीकी यूनियन और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) देशों के बाद अब चीन को भी इजरायल के खिलाफ खड़ा कर दिया है.

  • तुर्की व सोमालिया सहित कई अन्य देशों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। तुर्की के लिए सोमालिया अफ्रीका नीति का एक रणनीतिक स्तंभ व इस महाद्वीप के प्रमुख भागीदारों में से एक है। सोमालिया में तुर्की का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अड्डा है। सोमालिया को तुर्की से बड़े स्तर पर सैन्य, आर्थिक एवं मानवीय सहायता मिलती रही है।
  • तुर्की के लिए यह फैसला रणनीतिक व आर्थिक स्तर पर चुनौती बन सकता है। तुर्की सोमाली तट के साथ के क्षेत्रों में ऊर्जा के लिए ड्रिलिंग शुरू करने वाला है। तुर्की ने पिछले एक साल में कई समझौते करते हुए यहां गतिविधियां बढ़ाई हैं।
  • पिछले वर्ष स्थलरुद्ध इथियोपिया व सोमालीलैंड के बीच हुए एक समझौते के तहत इथियोपिया को एक बंदरगाह व सैन्य अड्डे के लिए तटीय क्षेत्र का एक हिस्सा देने के मुद्दे पर सोमालिया नाराज़ हो गया था।

सोमालीलैंड का परिचय

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध से सोमालीलैंड ब्रिटेन का एक संरक्षित क्षेत्र रहा है। 26 जून, 1960 को इसे सोमालीलैंड राज्य के रूप में स्वतंत्रता प्राप्त हुई।
  • इसके बाद 1 जुलाई, 1960 को यह इतालवी सोमालीलैंड के साथ विलय कर सोमालिया गणराज्य का हिस्सा बना।
  • हालाँकि, सोमाली सरकार के अधीन रहते हुए उत्तरी क्षेत्रों को राजनीतिक उपेक्षा, आर्थिक असमानता एवं प्रशासनिक अनदेखी का सामना करना पड़ा। 1970 एवं 1980 के दशक में सियाद बर्रे के शासनकाल के दौरान दमनकारी नीतियाँ अधिक तीव्र हो गईं, जिससे उत्तर में गृहयुद्ध, हिंसा व व्यापक विस्थापन हुआ।

  • वर्ष 1991 में सोमाली राज्य के पतन के बाद सोमालीलैंड ने स्वयं को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया और अपनी अलग राजनीतिक व प्रशासनिक संस्थाओं की स्थापना की। 

भौगोलिक स्थिति 

सोमालीलैंड अफ्रीका के ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ क्षेत्र में स्थित है। इसकी सीमाएँ जिबूती, इथियोपिया, सोमालिया एवं पुंटलैंड क्षेत्र से लगती हैं। इसके समीप अदन की खाड़ी के निकट एक महत्वपूर्ण व रणनीतिक समुद्री तट भी है। 

शासन और प्रशासन

  • राजधानी: हरगेइसा (हर्गीसिया)
  • राजनीतिक व्यवस्था: सोमालीलैंड अपने संविधान, निर्वाचित सरकार, स्वतंत्र न्यायपालिका, सुरक्षा बलों, पासपोर्ट, अलग मुद्रा और राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ एक वास्तविक (de facto) स्वतंत्र राज्य के रूप में कार्य करता है।
  • इसकी शासन प्रणाली आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाओं और पारंपरिक कबीलाई व्यवस्थाओं का समन्वय करती है जिससे सामाजिक स्थिरता और विवाद समाधान में सहायता मिलती है।
  • यहाँ द्विसदनीय विधायिका है जिसमें वरिष्ठ नागरिकों का सदन (गुर्ती) भी शामिल है। नियमित चुनावों के माध्यम से इसकी संस्थागत वैधता को मजबूती मिलती है।

अर्थव्यवस्था

सोमालीलैंड की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पशुपालन पर आधारित है जहाँ खाड़ी देशों को पशुओं का निर्यात विदेशी मुद्रा आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।  

सोमालीलैंड को मान्यता देने के कारण

रणनीतिक कारण

  • इज़राइल को लाल सागर क्षेत्र में कई रणनीतिक कारणों से सहयोगियों की आवश्यकता है। इनमें से एक कारण भविष्य में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ उसका संभावित अभियान भी शामिल है। हालांकि, यह टिप्पणी यमन के ईरान-समर्थित विद्रोहियों के संदर्भ में की गई थी.
  • सोमालीलैंड ऐसे सहयोग के लिए आदर्श देश है क्योंकि यह इज़राइल को संघर्षरत क्षेत्र के निकट एक ऑपरेशनल एरिया तक पहुंच दे सकता है।
  • इज़राइल की सोमालीलैंड को संप्रभु राष्ट्र के तौर पर ऐतिहासिक मान्यता एक अहम रणनीतिक क्षेत्र का दरवाज़ा खोलती है। इससे बेरबेरा बंदरगाह तक सीधे पहुँच, हूतियों के ख़तरे के बीच लाल सागर की सुरक्षा में सुधार और ईरानी प्रभाव का मुक़ाबला करने में मदद मिलेगी। 

आर्थिक कारण 

  • अंतर्राष्ट्रीय मान्यता न मिलने से सोमालीलैंड को विदेशी कर्ज़, सहायता एवं निवेश तक पहुंच में मुश्किलें आई हैं और यह क्षेत्र अब भी निर्धनता का सामना कर रहा है।
  • अफ़्रीका का हॉर्न क्षेत्र लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के निकट होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के कारोबार में प्रयोग होने वाले लगभग 30% कंटेनर गुज़रते हैं।
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