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महिलाओं की शक्ति: भारत की हरित अर्थव्यवस्था का भविष्य

संदर्भ 

  • भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के बड़े लक्ष्य की ओर अग्रसर है। किंतु एक प्रमुख भारतीय थिंक टैंक ‘ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (CEEW)’ की हालिया रिपोर्ट ‘विकसित भारत के लिए हरित अर्थव्यवस्था का निर्माण’ दर्शाती है कि अगर महिलाओं को हरित मूल्य श्रृंखलाओं में सक्रिय रूप से शामिल नहीं किया गया, तो यह लक्ष्य अधूरा रह सकता है। 
  • ऊर्जा संक्रमण, चक्रीय अर्थव्यवस्था एवं जैव-आधारित समाधानों में महिलाओं की भागीदारी न केवल न्यायसंगत और समावेशी विकास सुनिश्चित करती है बल्कि आर्थिक उत्पादकता को भी बढ़ाती है।

हरित अर्थव्यवस्था में महिलाओं की वर्तमान स्थिति 

  • भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी केवल 41.7% है जबकि पुरुषों का 78.8% है। यह अंतर हरित अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों के लिए चिंता का विषय है। 
  • अध्ययन से पता चलता है कि औपचारिक विनिर्माण में 1% लैंगिक विविधता वृद्धि श्रम उत्पादकता में लगभग 2.9% का लाभ देती है जो साफ़ तौर पर दिखाता है कि महिलाओं को मुख्यधारा में लाना आर्थिक रूप से भी लाभकारी है।
  • विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 32% है किंतु वे मुख्यतः प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। 
  • भारत में रूफटॉप सोलर कंपनियों में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 11% है जबकि निर्माण, संचालन एवं रखरखाव जैसी भूमिकाओं में उनका प्रतिनिधित्व नगण्य है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था में भी असमानता स्पष्ट है। लगभग 15 लाख महिलाएँ कचरा संग्रहण और पृथक्करण में कार्यरत हैं जो पुरुषों की तुलना में लगभग 33% कम कमाती हैं। 
  • इसके अलावा अधिकांश महिलाएँ दलित और आदिवासी समुदायों से संबंधित हैं जो अनौपचारिक, जोखिमपूर्ण व कलंकपूर्ण काम करने को मजबूर हैं।
  • जैव-आधारित उद्योगों में भी महिलाओं का बड़ा योगदान है किंतु वे प्राय: अवैतनिक या अल्पवेतन वाले कार्यों तक सीमित रहती हैं। औपचारिक मूल्यवर्धन और नेतृत्व की भूमिकाएँ पुरुषों के प्रभुत्व में हैं। 

हरित अर्थव्यवस्था में महिलाओं के अवसर 

महिलाओं के लिए हरित क्षेत्र में व्यवसाय एवं रोजगार के नए अवसर उभर रहे हैं-

  • सौर ऊर्जा आधारित सूक्ष्म उद्यम : ‘दीदी के पापड़’ जैसी स्वयं सहायता समूह इकाइयों में सौर ऊर्जा आधारित स्वचालन ने उत्पादन प्रक्रियाओं को अधिक दक्ष एवं कम श्रमसाध्य बनाया है। इससे न केवल ऊर्जा लागत घटती है बल्कि महिलाएँ स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय, उद्यम की स्थिरता और बाज़ार तक पहुँच को भी सुदृढ़ कर रही हैं। 
  • ड्रोन आधारित हरित खेती : ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी पहलें महिलाओं की भूमिका को पारंपरिक कृषि श्रमिक से आगे बढ़ाकर उन्नत, सटीक कृषि सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित कर रही हैं। ड्रोन तकनीक के उपयोग से इनपुट दक्षता में सुधार होता है, रासायनिक उपयोग घटता है और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा मिलता है।
  • प्रकृति-आधारित आजीविका : महिलाओं के नेतृत्व में बाजरे के पुनरुद्धार जैसी पहलें जैव विविधता संरक्षण को सौर ऊर्जा संचालित प्रसंस्करण से जोड़ती हैं। इससे जलवायु लचीलापन मजबूत होता है और साथ ही खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं पर महिलाओं का नियंत्रण बढ़ता है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक समावेशी बनाता है।
  • हरित कारखाने : ओला के फ्यूचर कारखाने जैसे पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन संयंत्र यह दर्शाते हैं कि महिलाएँ उन्नत व उच्च-तकनीकी स्वच्छ विनिर्माण में भी नेतृत्व कर सकती हैं। ऐसे मॉडल न केवल पारंपरिक लैंगिक मानदंडों को चुनौती देते हैं, बल्कि भारत के हरित औद्योगिक भविष्य में महिलाओं की निर्णायक भूमिका को भी रेखांकित करते हैं।

चुनौतियाँ एवं बाधाएँ

हरित अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में कई बाधाएँ हैं-

  • तकनीकी और क्षेत्रीय अपवर्जन : एस.टी.ई.एम. (STEM) में नामांकन उच्च होने के बावजूद पुरुष-प्रधान कार्य संस्कृति और सुरक्षा चिंताओं के कारण क्षेत्र-आधारित भूमिकाओं में महिलाएँ कम हैं।
  • जलवायु संवेदनशीलता : अनौपचारिक हरित श्रमिकों की दैनिक आय प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होती है।
  • ऋण एवं संपत्ति तक सीमित पहुँच : भूमि स्वामित्व की कमी महिलाओं के नेतृत्व वाले हरित उद्यमों को वित्तीय संसाधनों तक पहुँचने से रोकती है।
  • बाजार एवं आपूर्ति श्रृंखला बाधाएँ : प्रमाणन, रसद एवं डिजिटल बाजार तक सीमित पहुंच महिला स्वयं सहायता समूहों को औपचारिक हरित आपूर्ति श्रृंखला में आने से रोकती है।  

समाधान और वैश्विक दृष्टिकोण

  • पैरामीट्रिक जलवायु बीमा : जलवायु जोखिमों को पूर्वानुमानित भुगतान में बदलकर आय की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • हरित कौशल प्रशिक्षण व प्लेसमेंट लिंक : नवीकरणीय ऊर्जा उद्योग में महिला प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए।
  • संपत्ति स्वामित्व और वित्तीय पहुंच : उदाहरण के लिए पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर पंजीकरण से महिलाओं को संपत्ति नियंत्रण और ऊर्जा निर्णय लेने की शक्ति मिलती है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था में औपचारिकीकरण : महिला कचरा बीनने वालों के लिए नगरपालिका अनुबंध सम्मानजनक हरित रोजगार और आय सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।  

निष्कर्ष

भारत का हरित परिवर्तन महिलाओं के नेतृत्व में ही सफल होगा। ऊर्जा संक्रमण, चक्रीय अर्थव्यवस्था और प्रकृति-आधारित समाधानों में महिलाओं की उत्पादकता एवं नेतृत्व से जलवायु प्रयासों को समावेशी विकास व सामाजिक परिवर्तन में बदला जा सकता है। लैंगिक समानता केवल कल्याणकारी पहल नहीं है बल्कि भारत की हरित अर्थव्यवस्था की मूलभूत आर्थिक रणनीति है।  

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