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वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025

(प्रारंभिक परीक्षा : भारतीय राजव्यवस्था, समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व; सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय; अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय)

संदर्भ 

वक्फ बोर्ड के काम को सुव्यवस्थित करने और वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संसद द्वारा पारित दो विधेयक वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) अधिनियम, 2024 राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद 8 अप्रैल, 2025 से लागू हो गए हैं।

वक्फ़ के बारे में

  • ‘वक्फ़’ अरबी भाषा के ‘वकुफा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ ‘बाँधना’, 'रोकना' या 'समर्पण करना' होता है।
  • इस्लामी मान्यता में धर्म के आधार पर दान की गई चल या अचल संपत्ति ‘वक्फ़’ कहलाती है। दान देने वाले व्यक्ति को ‘वकिफा/वकीफ’ कहा जाता है।
  • हालाँकि, संपत्ति दान करने की शर्त यह है कि उस चल/अचल संपत्ति से होने वाली आय को इस्लाम धर्म की खिदमत (सेवा) में ही व्यय किया जा सकता है।
  • इस संपत्ति से गरीब व जरूरतमंदों की मदद करना, मस्जिद या अन्य धार्मिक संस्थान को बनाए रखना, शिक्षा की व्यवस्था करना और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए धन देने संबंधी कार्य किए जा सकते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • भारत में वक्फ़ की अवधारणा दिल्ली सल्तनत के काल में प्रारंभ हुई।
  • प्रथम उदाहरण : वर्ष 1173 में सुल्तान मुहम्मद ग़ौरी द्वारा मुल्तान की जामा मस्जिद को गाँव समर्पित करना।
  • वक्फ़ को विनियमित करने का पहला प्रयास वर्ष 1923 में मुस्लिम वक्फ़ अधिनियम के माध्यम से किया गया।
  • स्वतंत्र भारत में, संसद ने पहली बार वर्ष 1954 में वक्फ़ अधिनियम पारित किया। 
  • इस अधिनियम को वर्ष 1995 में एक नए वक्फ़ अधिनियम से प्रतिस्थापित किया गया, जिसने वक्फ़ बोर्ड्स को अधिक शक्तियाँ प्रदान कर दी।
  • इस नए कानून से अतिक्रमण में वृद्धि के साथ-साथ वक्फ़ संपत्तियों के अवैध पट्टे एवं बिक्री की शिकायतों में वृद्धि हुई।
  • इन शिकायतों को दूर करने के लिए वर्ष 2013 में इस अधिनियम में संशोधन किया गया। इसमें वक्फ़ बोर्ड्स को मुस्लिम दान के नाम पर संपत्तियों का दावा करने के लिए इन बोर्ड्स को असीमित अधिकार प्रदान कर दिए गए और न्यायालय का हस्तक्षेप समाप्त कर दिया गया।
  • वक्फ़ बोर्ड के पास निर्णयन संबंधी असीमित अधिकार होने से मामला अधिक गंभीर हो गया। 

भारत में वक्फ़ संपत्ति

  • कुल संपत्ति : स्वतंत्रता के पश्चात वक्फ़ की पूरे देश में लगभग 52,000 संपत्तियां थीं, जो वर्ष 2009 में बढ़कर 3 लाख (4 लाख एकड़ क्षेत्रफल) तक हो गई।
  • संपत्ति में वृद्धि : वर्तमान में वक्फ़ की 8 लाख एकड़ भूमि में फैली 8,72,292 से ज्यादा पंजीकृत अचल संपत्तियाँ है जबकि कुल चल संपत्तियों की संख्या 16,713 हैं। 
    • अचल संपत्तियों के के क्षेत्रफल में पिछले 13 वर्षों में दो गुनी वृद्धि हुई है।
  • WAMSI पोर्टल : इन संपत्तियों का विवरण वक्फ़ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया (WAMSI) पोर्टल पर दर्ज किया गया है।
  • तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामित्त्व : सशस्त्र बलों (सेना) और भारतीय रेलवे के बाद देश में तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामित्त्व वक्फ़ बोर्ड के पास है अर्थात सर्वाधिक भूमि के मामले में वक्फ़ बोर्ड देश में तीसरे स्थान पर है।
  • कीमत : वक्फ़ बोर्ड की संपत्तियों की अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपए है।  
  • वक्फ संपत्ति का प्रबंधन : वक्फ संपत्ति का प्रबंधन मुतवल्ली (देखभालकर्ता) करता है, जो पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करता है।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के बारे में

  • परिचय : यह विधेयक वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन प्रस्तावित करता है।
  • लोक सभा में प्रस्तुत : 8 अगस्त, 2024
    • लोक सभा द्वारा विधेयक के परीक्षण के लिए जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता में गठित संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था।
  • लोक सभा से पारित : 3 अप्रैल, 2025 
  • राज्य सभा से पारित : 4 अप्रैल, 2025 
  • राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृति : 5 अप्रैल, 2025 
  • लागू होने की तिथि : 8 अप्रैल, 2025
  • उद्देश्य : 
    • पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना।
    • वक्फ बोर्डों की दक्षता में वृद्धि करना।
    • वक्फ की परिभाषाओं को अद्यतन करना।
    • पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार।
    • वक्फ अभिलेखों के प्रबंधन में प्रौद्योगिकी की भूमिका बढ़ाना।

मुसलमान वक्फ (निरसन) अधिनियम, 2025

  • उद्देश्य : मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को निरस्त करना, जो कि आधुनिक भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पुराना और अपर्याप्त हो गया है।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025  की मुख्य विशेषताएँ

विशेषताएं

वक्फ अधिनियम, 1995

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025

वक्फ का गठन

वक्फ का गठन घोषणा, उपयोगकर्ता या धर्मार्थ दान (वक्फ-अल-औलाद) द्वारा किया जा सकता है।

  • केवल घोषणा या धर्मार्थ दान के माध्यम से। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ हटा दिया गया है।
  • दाता को कम से कम 5 वर्षों तक इस्लाम धर्म पर अमल करने वाला मुसलमान होना चाहिए और संपत्ति का मालिक होना चाहिए।
  • वक्फ-अल-औलाद महिला उत्तराधिकारियों को विरासत के अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते।

वक्फ के रूप में सरकारी संपत्ति

कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं

  • वक्फ के रूप में पहचानी जाने वाली कोई भी सरकारी संपत्ति वक्फ नहीं रहेगी। स्वामित्व विवादों का समाधान कलेक्टर द्वारा किया जाएगा और राज्य सरकार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

वक्फ संपत्ति का निर्धारण करने की शक्ति

अधिनियम वक्फ बोर्ड को पूछताछ करने और यह निर्धारित करने का अधिकार देता है कि कोई संपत्ति वक्फ की  है या नहीं।

प्रावधान हटा दिया गया।

वक्फ का सर्वे

सर्वेक्षण आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्तों द्वारा किया गया सर्वेक्षण।

कलेक्टरों को सर्वेक्षण करने का अधिकार देता है। लंबित सर्वेक्षण राज्य के राजस्व कानूनों के अनुसार आयोजित किए जाएंगे।

केंद्रीय वक्फ परिषद की संरचना

  • अधिनियम केंद्र और राज्य सरकारों और वक्फ बोर्डों को सलाह देने के लिए केंद्रीय वक्फ परिषद का गठन करता है।
  • सभी परिषद सदस्य मुस्लिम होने चाहिए, जिनमें कम से कम दो महिला सदस्य हों।
  • अधिनियम में प्रावधान है कि दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए।
  • सांसदों, पूर्व न्यायाधीशों और अधिनियम के अनुसार परिषद में नियुक्त प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मुस्लिम होने की आवश्यकता नहीं है।
  • निम्नलिखित सदस्य मुस्लिम होने चाहिए: मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि, इस्लामी कानून में विद्वान, वक्फ बोर्डों के अध्यक्ष
  • मुस्लिम सदस्यों में से दो महिलाएं होनी चाहिए।

वक्फ बोर्डों की संरचना

  • अधिनियम में राज्य से बोर्ड में मुस्लिम निर्वाचक मंडल से दो सदस्यों के चुनाव का प्रावधान है: (i) सांसद, (ii) विधायक और एमएलसी, और (iii) बार काउंसिल के सदस्य। 
  • अधिनियम में प्रावधान है कि कम से कम दो सदस्य महिलाएं होनी चाहिए।
  • अधिनियम राज्य सरकार को प्रत्येक पृष्ठभूमि से एक व्यक्ति को बोर्ड में नामित करने का अधिकार देता है। उन्हें मुसलमान होने की जरूरत नहीं है। 
  • इसमें कहा गया है कि बोर्ड के पास होना चाहिए:
  1. दो गैर-मुस्लिम सदस्य
  2. कम से कम एक सदस्य शिया, सुन्नियों और मुसलमानों के पिछड़े वर्गों से।
  3. बोहरा एवं अगाखानी समुदायों से एक-एक सदस्य (यदि उनके राज्य में वक्फ है)
  4. अधिनियम में कहा गया है कि वक्फ की दो मुस्लिम सदस्य महिलाएं होनी चाहिए।

ट्रिब्यूनल की संरचना

  • अधिनियम में राज्यों को वक्फ पर विवादों को हल करने के लिए न्यायाधिकरणों का गठन करने की आवश्यकता है।
  • इन न्यायाधिकरणों का अध्यक्ष क्लास-1, जिला, सेशन, सिविल जज के बराबर रैंक का न्यायाधीश होना
  • अन्य सदस्यों में शामिल हैं:
  1. एक अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के बराबर एक राज्य अधिकारी,
  2. मुस्लिम कानून और न्यायशास्त्र का जानकार व्यक्ति।
  • अधिनियम ट्रिब्यूनल से बाद वाले सदस्यों को हटाता है। इसके बजाय यह सदस्यों के रूप में निम्नलिखित प्रदान करता है:
  • इसके अध्यक्ष के रूप में एक वर्तमान या पूर्व जिला न्यायालय के न्यायाधीश
  • राज्य सरकार के संयुक्त सचिव रैंक का एक वर्तमान या पूर्व अधिकारी।

ट्रिब्यूनल के आदेशों पर अपील

  • ट्रिब्यूनल का निर्णय अंतिम है और न्यायालयों में इसके निर्णयों के खिलाफ अपील निषिद्ध है।

  • उच्च न्यायालय स्वयं के संज्ञान पर, बोर्ड द्वारा एक आवेदन पर, या एक पीड़ित पक्ष द्वारा, मामलों पर विचार कर सकता है।

  • अधिनियम ट्रिब्यूनल के फैसलों को अंतिम रूप देने वाले प्रावधानों को हटाता है।
  • ट्रिब्यूनल के आदेशों को 90 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है।

केंद्र सरकार की शक्तियां

राज्य सरकार किसी भी समय वक्फों के खातों का ऑडिट करवा सकती है।

  • अधिनियम केंद्र सरकार को वक्फ बोर्डों के पंजीकरण, खातों के प्रकाशन और वक्फ बोर्डों की कार्यवाही के प्रकाशन के संबंध में नियम बनाने का अधिकार देता  है।
  • अधिनियम केंद्र सरकार को कैग (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) या किसी नामित अधिकारी से इनका ऑडिट कराने का अधिकार देता है।

संप्रदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड

सुन्नी और शिया संप्रदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड, यदि शिया वक्फ के पास राज्य में सभी वक्फ संपत्तियों या वक्फ आय का 15% से अधिक है।

शिया और सुन्नी संप्रदायों के साथ बोहरा व अगाखानी संप्रदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्डों की अनुमति है।

वक्फ से संबंधित प्रमुख मुद्दे

  • वक्फ संपत्तियों की अपरिवर्तनीयता : ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’ के सिद्धांत ने विभिन्न विवादों और दावों को जन्म दिया है। जिनमें से कुछ, द्वारका में दो द्वीपों पर दावे की तरह, अदालतों द्वारा हैरान करने वाले माने गए हैं।
  • मुकदमेबाजी और कुप्रबंधन : वक्फ अधिनियम, 1995 और इसके वर्ष 2013 के संशोधन की अक्षमता के लिये आलोचना की गई है, जिससे अतिक्रमण, कुप्रबंधन, स्वामित्व विवाद और पंजीकरण एवं सर्वेक्षण में देरी जैसे मुद्दे सामने आते हैं। 
  • वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व, अधिकार और कब्जे की समस्या पंजीकरण, अधिकरण के कार्य करने के ढंग और संबंधित बडे़ पैमाने पर मुकदमों आदि की शिकायतों के संबंध में मंत्रालय को कई मुद्दों से भी अवगत कराया गया है।
  • कोई न्यायिक निरीक्षण नहीं : न्यायाधिकरण के फैसलों पर कोई न्यायिक निरीक्षण नहीं होता है, जो वक्फ प्रबंधन को और जटिल बनाता है। उच्च न्यायिक निकाय में अपील करने की संभावना के बिना, ट्रिब्यूनल द्वारा किए गए निर्णय वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर कर सकते हैं।
  • असंतोषजनक सर्वेक्षण कार्य : सर्वेक्षण आयुक्त द्वारा वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का कार्य असंतोषजनक पाया गया। यहां तक कि गुजरात और उत्तराखंड राज्य में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण अभी शुरू किया जाना है। उत्तर प्रदेश में, सर्वेक्षण का आदेश 2014 में दिया गया था और इसे अभी तक शुरू नहीं किया गया है। सर्वेक्षण पूरा न होने का प्रमुख मुद्दा सर्वेक्षण कार्य में सर्वेक्षण आयुक्तों की विशेषज्ञता का अभाव है। इसके अलावा, वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने में राजस्व विभाग के साथ सर्वेक्षण रिपोर्टों के समन्वय के मुद्दे हैं।
  • प्रावधानों का गलत उपयोग : यह देखा गया कि राज्य वक्फ बोर्डों ने भी अधिनियम के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग किया है जिससे समुदायों के बीच असामंजस्य और असंतोष पैदा हुआ है। वक्फ संपत्ति को अर्जित करने और वक्फ संपत्ति घोषित करने के लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 का व्यापक रूप से दुरुपयोग किया गया था। इससे न केवल भारी संख्या में मुकदमे उत्पन्न हुए हैं बल्कि समुदायों के बीच भी असामंजस्य पैदा हुआ है।
  • संवैधानिक वैधता : वक्फ अधिनियम देश के केवल एक धर्म की धार्मिक संपत्तियों के लिए एक विशेष अधिनियम है, जब किसी अन्य धर्म के लिए ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं है।

वक्फ बोर्ड/परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्य संबंधी मुद्दा

  • गैर-मुस्लिम लोग वक्फ प्रबंधन में दानकर्ता, वादी, पट्टेदार और किरायेदार जैसे हितधारक हैं।
    • बोर्ड/परिषद में उनका प्रतिनिधित्व इन हितधारकों को उचित प्रतिनिधित्व देने में मदद करेगा।
  • धारा 96 केंद्र सरकार को वक्फ संस्थाओं की धर्मनिरपेक्ष गतिविधियों को विनियमित करने का अधिकार देती है, जिसमें शासन, सामाजिक, आर्थिक और कल्याण संबंधी मामले शामिल हैं। न्यायालय के फैसले इस सिद्धांत की पुष्टि करते हैं।
  • केंद्रीय वक्फ परिषद राज्य वक्फ बोर्डों की देखरेख करती है।
  • इससे यह स्पष्ट होता है कि वक्फ प्रबंधन प्रशासनिक है, केवल धार्मिक नहीं है, तथा इसका विनियमन आर्थिक और वित्तीय पहलुओं तक फैला हुआ है।
  • चूंकि निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं, इसलिए निर्णय लेने में गैर-मुस्लिम सदस्य का प्रभाव सीमित होता है।
  • हालांकि, मूल्यवान प्रशासनिक और तकनीकी विशेषज्ञता लाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है, जो वक्फ प्रबंधन की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाती है।
  • वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों का समावेश न्यूनतम है, धारा 9 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड में 11 में से केवल दो गैर-मुस्लिम सदस्य पदेन सदस्य को छोड़कर हैं।
  • संशोधन विधेयक 2025 की धारा 14 के तहत केंद्रीय वक्फ परिषद में 22 सदस्यों में से केवल दो सदस्य पदेन सदस्य को छोड़कर गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।

निष्कर्ष

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025, भारत में वक्फ संपत्ति प्रबंधन के शासन, पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण सुधार पेश करता है। मुकदमेबाजी और न्यायिक निरीक्षण की कमी जैसे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को संबोधित करके, विधेयक एक अधिक सुव्यवस्थित और जवाबदेह ढांचा बनाने का प्रयास करता है।

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