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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड प्रतिफल (US bond yield)

प्रारंभिक परीक्षा- बॉन्ड, बॉन्ड यील्ड
मुख्य परीक्षा- सामान्य अध्ययन, पेपर-3

संदर्भ- 

  • दुनिया भर में संपत्ति की कीमतों के लिए बेंचमार्क  मानी जाने वाली अमेरिकी सरकारी बॉन्ड का 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 23 अक्टूबर,2023 को बढ़कर 5.02 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो जुलाई, 2007 के बाद से इसका उच्चतम स्तर है। हालांकि बाद में यील्ड घटकर 4.85 प्रतिशत पर आ गया।

US-bond-yield

मुख्य बिंदु-

  • 23 अक्टूबर,2023 को दिन में एक प्रतिशत वृद्धि ने बॉन्ड की कीमतों में कई सप्ताहों के साथ चली आ रही गिरावट पर रोक लगा दी
  • ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशकों ने अनुमान लगाया था कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व  द्वारा ब्याज दरों को अपने वर्तमान उच्च स्तर पर लंबे समय तक बनाए रखने की संभावना है।
  • भारत में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड पहले से ही 7.38 प्रतिशत के उच्च स्तर पर है, जो पिछले एक महीने में 24 आधार अंकों की वृद्धि है।

प्रतिफल (यील्ड) में वृद्धि के कारण-

  • यूएस 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड वर्तमान में 2020 के 1.01 प्रतिशत से लगभग 400 आधार अंक बढ़ गई है। 
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मुद्रास्फीति जोखिम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संकेतों जैसे कारकों ने बॉन्ड यील्ड को मजबूत करने में योगदान दिया है।
  • अधिक सरकारी उधारी भी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोत्तरी का एक कारण है। 
  • जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने अमेरिका में 10 साल के यील्ड में लगातार बढ़ोत्तरी को बढ़ावा दिया है।"
  • इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने इस संभावना को बढ़ावा दिया है कि फेडरल रिजर्व द्वारा लंबी अवधि के लिए दरें ऊंची रखने की संभावना है। 
  • निवेशक अमेरिकी सरकार की भारी उधारी योजनाओं को लेकर भी चिंतित हैं। 
  • पिछले 18 महीनों में फेड बैंक द्वारा की गई ब्याज दरों में ऐतिहासिक वृद्धि (500 आधार अंक) के बावजूद, हाल के हफ्तों में उम्मीद से अधिक मजबूती अमेरिकी खुदरा बिक्री, श्रम बाजार और मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने यील्ड वृद्धि सहयोग किया है।
  • आईएफए ग्लोबल के अनुसार, ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण मुद्रास्फीति फिर से बढ़ने की संभावना ने सुरक्षित आश्रय खोजने को बढ़ावा दिया है। 
  • वर्तमान में चल रहे इज़राइल-हमास संघर्ष ने विशेषकर ऊर्जा की कीमतों पर वैश्विक अनिश्चितताओं को बढ़ा दिया है।
  •  यदि मुद्रास्फीति बढ़ेगी, तो निवेशक अपने बॉन्ड निवेश पर अधिक यील्ड की मांग करेंगे।
  • यूएस फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के अनुसार,रिकॉर्ड से पता चलता है कि मुद्रास्फीति को 2% लक्ष्य तक पहुंचने के लिए ऊर्जा की कीमतों पर प्रवृत्ति से नीचे की वृद्धि की अवधि और श्रम बाजार की स्थितियों में नरमी की आवश्यकता है। 
  • लगातार ऊपर की प्रवृत्ति वाली वृद्धि या श्रम बाजार में तंगी कम न होने का कोई भी कारण मुद्रास्फीति को जोखिम में डाल सकता है तथा मौद्रिक नीति को और सख्त करने की आवश्यकता हो सकती है,जिससे बॉन्ड पर यील्ड बढ़ेगा।

प्रभाव-

  • ऐतिहासिक रूप से यह देखा गया है कि भारत सहित अन्य देशों में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि तब हुई, जब अमेरिकी यील्ड में कोई बढ़ोतरी देखी गई। हालाँकि, इसके विपरीत वृद्धि की मात्रा घरेलू कारकों के आधार पर भिन्न होती है। 
  • भारत की 10-वर्षीय यील्ड 5.76 प्रतिशत (10 जुलाई, 2020) से 162 आधार अंक बढ़ गई, जबकि अमेरिकी यील्ड 400 बीपीएस बढ़कर 5.02 प्रतिशत हो गई।
  • इस वृद्धि से संकेत मिलता है कि वित्तीय प्रणाली में धन की लागत बढ़ रही है और ब्याज दरें भी बढ़ रही हैं। 
  • बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि सरकार को यील्ड (या निवेशकों को रिटर्न) के रूप में अधिक भुगतान करना होगा, जिससे उधार लेने की लागत में वृद्धि होगी। 
  • इसका वित्तीय प्रणाली पर समग्र प्रभाव पड़ेगा, जिससे बैंकिंग प्रणाली में सामान्य ब्याज दरों पर दबाव बढ़ेगा।
  • विश्लेषकों का कहना है कि यील्ड दरों में बढ़ोत्तरी या ब्याज दरों पर यथास्थिति की संभावनाएं उच्च मुद्रास्फीति की ओर करती हैं। 
  • यूएस फेड ने मई,2022 से ब्याज दरों में 500 आधार अंकों की बढ़ोतरी 0.25-0.50 प्रतिशत से 5.25-5.50 प्रतिशत तक कर दी है। 
  • संक्षेप में, बढ़ते यील्ड ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर गंभीर दबाव डाला है। यील्ड बढ़ने से बैंक सावधि जमाओं से संप्रभु गारंटीशुदा बॉन्डों की ओर पूंजी का पलायन भी शुरू हो सकता है,क्योंकि यील्ड में अंतर बढ़ जाता है।

बॉन्ड निवेशकों पर प्रभाव -

  • बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का मतलब है कि निवेशक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं और इसलिए वे अपने पास मौजूद बॉन्ड पेपर बेच रहे हैं। 
  • चूंकि ब्याज दरों में वृद्धि के परिणामस्वरूप मौजूदा बॉन्डों की कीमत में गिरावट आएगी (और इस प्रकार परिपक्वता से पहले बिक्री पर पूंजी हानि होगी), अतः निवेशक उन बॉन्डों को बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं ताकि पूंजी हानि को सीमित किया जा सके। यील्ड में इस बढ़ोतरी से ऋण निवेशकों पर असर पड़ना तय है।
  • जब यील्ड बढ़ता है और बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं, तो बांड की कीमत में गिरावट के कारण उनके पोर्टफोलियो में सरकारी प्रतिभूतियों का एक बड़ा हिस्सा रखने वाले डेट फंडों की शुद्ध संपत्ति मूल्यों में भी गिरावट आती है। 
  • इसके अलावा, इसका असर कॉरपोरेट बॉन्ड पर भी पड़ेगा जिनकी कीमत सरकारी बॉन्ड से अधिक है।

बॉन्ड यील्ड क्या है-

  • बॉन्ड एक प्रकार का ऋण है, जो किसी निवेशक द्वारा किसी उधारकर्ता (किसी कंपनी या संस्था) को नियमित ब्याज भुगतान के बदले में एक निश्चित अवधि के लिए दिया जाता है। 
  • बॉन्ड पर यील्ड वह रिटर्न है, जो एक निवेशक परिपक्वता अवधि के दौरान हर साल प्राप्त करने की उम्मीद करता है।
  • बॉन्ड खरीदने वाले निवेशक के लिए बांड यील्ड समग्र रिटर्न का सारांश है, जो बॉन्ड की कीमत के सापेक्ष शेष ब्याज भुगतान और उन्हें प्राप्त मूलधन का हिसाब देता है। 
  • द्वितीयक बाजार में निवेशक जिस कीमत पर बॉन्ड खरीदते और बेचते हैं, वह यील्ड के विपरीत दिशा में चलती है।
  • बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से इक्विटी पर भी व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- बॉन्ड यील्ड के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. बॉन्ड पर यील्ड वह रिटर्न है, जो एक निवेशक परिपक्वता अवधि के दौरान हर साल प्राप्त करने की उम्मीद करता है।
  2. द्वितीयक बाजार में निवेशक जिस कीमत पर बॉन्ड खरीदते और बेचते हैं, वह यील्ड के विपरीत दिशा में चलती है।

नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए।

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर- (c)

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- ऐतिहासिक रूप से यह देखा गया है कि भारत सहित अन्य देशों में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि तब हुई, जब अमेरिकी यील्ड में कोई बढ़ोतरी देखी गई। टिप्पणी करें।

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