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फूलों की घाटी

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ‘फूलों की घाटी (Valley of Flowers)’ को अगले चार महीनों के लिए पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। यह घाटी प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है और अक्तूबर में हिमपात के कारण बंद हो जाती है।

फूलों की घाटी के बारे में 

  • अवस्थिति : यह घाटी नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के भीतर 87 वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। 
    • यह जास्कर एवं महान हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
  • नामकरण : वर्ष 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्माइथ, एरिक शिप्टन एवं आर.एल. होल्ड्सवर्थ ने इसे यह नाम दिया। 
    • स्माइथ ने वर्ष 1938 में ‘वैली ऑफ़ फ्लावर्स’ के नाम से एक पुस्तक भी प्रकाशित की।
  • पौराणिक मान्यता : हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र देवी नंदा को समर्पित है जो गढ़वाल व कुमाऊँ की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।
  • राष्ट्रीय उद्यान : वर्ष 1982 में 
  • बायोस्फीयर रिज़र्व : वर्ष 1988 में 
  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल : वर्ष 2005 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई। 

महत्व 

  • जैव-विविधता का केंद्र : इस घाटी में विभिन्न प्रजातियों के पुष्प, जैसे- ऑर्किड, पॉपी, प्रिमुला, गेंदा, डेजी और ब्रह्मकमल पाए जाते हैं। यह औषधीय पौधों व जड़ी-बूटियों का भी एक समृद्ध भंडार है। 
    • इसके अलावा यहाँ दुर्लभ वन्यजीव, जैसे- हिम तेंदुआ, काला भालू, लाल लोमड़ी, ग्रे लंगूर व उड़न गिलहरी पाए जाते हैं। यह जैव-विविधता इसे एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र बनाती है।
  • अल्पाइन और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र : 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी जांस्कर और महान हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक संक्रमण क्षेत्र है। यहाँ विभिन्न आवास, जैसे- अल्पाइन घास के मैदान, जंगल, झरने एवं नदियाँ इसे पारिस्थितिक अध्ययन के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं।
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