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विनायक दामोदर सावरकर

संदर्भ

हाल ही में आयोजित इंदौर साहित्योत्सव के दौरान ‘वीर सावरकर: द मैन हू कुड हैव प्रिवेंटेड पार्टिशन’ पुस्तक के लेखक सूचना आयुक्त श्री उदय माहुरकर की राय के अनुसार, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ भारत में सावरकर युग की शुरुआत हो चुकी है।  

सावरकर : एक नज़र में 

  • राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार के प्रणेता वी. डी. सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में हुआ था। वे रूढ़िवादी हिंदू विचारों (जैसे- गौ-पूजा) का खंडन तथा तार्किक विचारों का समर्थन करते थे। 
  • इन्होंने राष्ट्रवादी व क्रांतिकारी विचारों के प्रसार हेतु वर्ष 1899 में गणेश सावरकर के साथ एक युवा संगठन ‘मित्र मेला’ की स्थापना की। साथ ही, ‘अभिनव भारत समाज’ तथा ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना में भी इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। 
  • इन्होंने ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास (दि हिस्ट्री ऑफ़ दि वॉर ऑफ़ इंडियन इंडिपेंडेंस)’, ‘एन आर्म्ड रिवोल्ट अगेंस्ट द मॉर्ले-मिंटो रिफॉर्म’ और ‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तकों की रचना की।
  • वे वर्ष 1937 से 1943 के तक हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे। कांग्रेस की प्रांतीय सरकारों द्वारा अक्तूबर 1939 में सामूहिक रूप से त्यागपत्र दिये जाने के पश्चात् इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के सहयोग से सिंध, बंगाल तथा पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांतों में सरकार बनाने का फैसला किया।
  • सावरकर ने कथित तौर पर जिन्ना के ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ का समर्थन किया। 
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