New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 14th Oct. 2026, 06:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 22nd Sept. 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 12th Oct. 2026, 5:30PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 19th Aug 2026, 11:00 AM

वांगचू जलविद्युत परियोजना

हाल ही में, अदानी समूह ने भूटान में 570 मेगावाट क्षमता वाली वांगचू जलविद्युत परियोजना का शुभारंभ किया है। यह परियोजना भारत–भूटान ऊर्जा सहयोग को अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 

वांगचू जलविद्युत परियोजना के प्रमुख तथ्य

  • अवस्थिति : यह परियोजना भूटान के चुखा जिले में वांगचू नदी (जिसे भारत में रायडाक नदी कहा जाता है) पर विकसित की जा रही है।
  • नदी प्रणाली : वांगचू नदी ब्रह्मपुत्र नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • परियोजना का प्रकार : यह एक रन-ऑफ-रिवर (Run-of-the-River) जलविद्युत परियोजना है जो जल भंडारण पर न्यूनतम निर्भरता के साथ बिजली उत्पादन करती है। 
  • विकासकर्ता संस्था : परियोजना का विकास वांगचू हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर लिमिटेड (WHPL) द्वारा किया जा रहा है जो एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) कंपनी है।
  • संयुक्त उद्यम की संरचना : ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DGPC), भूटान– 51% हिस्सेदारी (नियंत्रक भागीदारी) तथा अदानी पावर लिमिटेड (APL), भारत– 49% हिस्सेदारी 
    • यह संयुक्त उद्यम सितंबर 2025 में शेयरधारकों के समझौते के बाद गठित किया गया।
  • निवेश एवं कार्यान्वयन मॉडल : कुल निवेश लगभग ₹6,000 करोड़ और परियोजना को BOOТ (Build, Own, Operate and Transfer) मॉडल पर लागू किया जाएगा।
  • तकनीकी विशेषताएँ : यह परियोजना एक पीकिंग रन-ऑफ-रिवर प्लांट के रूप में कार्य करेगी, जिससे भूटान को पनबिजली उत्पादन में मौसमी उतार-चढ़ाव को संतुलित करने में सहायता मिलेगी। इसमें कुल चार टर्बाइन होंगे।
  • अनुमानित वार्षिक बिजली उत्पादन: लगभग 2,478.93 गीगावॉट-घंटा (GWh)

ऊर्जा उपयोग 

  • शीतकाल : यह परियोजना भूटान की घरेलू बिजली मांग को पूरा करने में मदद करेगी, जब जलविद्युत उत्पादन सामान्यतः कम हो जाता है।
  • ग्रीष्मकाल : अतिरिक्त उत्पादित बिजली भारत को निर्यात की जाएगी। 

महत्व 

  • भारत–भूटान रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को मजबूती
  • नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा
  • भूटान की अर्थव्यवस्था में जलविद्युत क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करना
  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय ऊर्जा एकीकरण में योगदान
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR