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विद्यालयों एवं आँगनवाड़ी केंद्रों में जलापूर्ति

संदर्भ

अक्तूबर 2020 में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 100% कवरेज के लिये100-दिवसीय अभियान शुरू किया गया था लेकिन अभी तक मात्र आधे सरकारी विद्यालयों और आँगनवाड़ी केंद्रों में नलों द्वारा जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकी है।

प्रमुख बिंदु   

  • उत्तर प्रदेश में 8% से कम और पश्चिम बंगाल में मात्र 11% विद्यालयों में ही नल द्वारा जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकी है, जबकि असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बंगाल में केवल 2-6% आँगनवाड़ी केंद्रों में यह सुविधा उपलब्ध है।
  • 2 अक्तूबर को गांधी जयंती पर, पीने, खाना पकाने और हाथ धोने के लियेहर स्कूल, आँगनवाड़ी, आश्रमशालाओं या आदिवासी आवासीय विद्यालयों में नल द्वारा पीने योग्य पानी की आपूर्ति का अभियान शुरू किया गया था।
  • मंत्रालय के अनुसार 100 दिनों की अवधि 10 जनवरी, 2021 को समाप्त हो चुकी है बावजूद इसके 15 फरवरी तक, केवल 5% आँगनवाड़ी केंद्रों और 53.3% विद्यालयों में नल द्वारा जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकी है।
  • सात राज्यों - आंध्र प्रदेश, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और पंजाब ने 100% कवरेज हासिल की।
  • इसके साथ ही कई अन्य राज्यों में भी लगभग 82 लाख ग्रे वाटर प्रबन्धन ढाँचों और लगभग 1.42 लाख वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण विद्यालयों व आँगनवाड़ी केंद्रों में किया है।
  • ऐसे समय में जब विद्यालय और आँगनवाड़ी केंद्र वर्ष भर के बंद रहने के पश्चात पुनः खुल रहे हैं, COVID-19 सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत छात्रों और शिक्षकों द्वारा बार-बार हाथ धुलना अति-आवश्यकहै।
  • इसके अलावा बच्चे जल जनित बीमारियों के लिये अति संवेदनशील होते हैं, इसलिये भी एहतियाती उपाय के रूप में हाथों को बार-बार धोने की आवश्यकता होती है।

ग्रे वाटर

घरों या कार्यालयों (शौचालय को छोड़कर) से निकलने वाले अपशिष्ट जल को ग्रे वाटर कहते हैं। ग्रे वाटर के स्रोतों में सिंक, वर्षा, स्नान, वाशिंग मशीन या डिशवॉशर आदि से निकला अपशिष्ट जल शामिल है।  चूँकि ग्रे वाटर मेंबड़े कार्बनिक अणु मौजूद नहीं होते अतः इनका शोधन संभव है।घरेलू स्तर पर इसे रिसाइकल/पुनर्चक्रित कर उपयोग में लाया जा सके  तो पानी की किल्लत दूर हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में ग्रे वाटर का 100% उपयोग किया जाता है।

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