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लेइओगैलाथिया समुद्रगिरि (Leiogalathea samudragiri) और स्क्वाट लॉबस्टर क्या है ?, विशेषताएँ , वितरण, महत्व

हाल ही में भारतीय शोधकर्ताओं ने लक्षद्वीप द्वीपसमूह के तटीय समुद्री क्षेत्र में स्क्वाट लॉबस्टर (Squat Lobster) की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसे वैज्ञानिक नाम Leiogalathea samudragiri दिया गया है। यह खोज भारतीय समुद्री जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लक्षद्वीप प्रवाल-भित्तियों (coral reef ecosystem) का एक संवेदनशील और कम-अध्ययनित क्षेत्र है।


खोज की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह स्क्वाट लॉबस्टर समूह का सदस्य है ( वास्तविक लॉबस्टर नहीं)
  • खोज स्थान — लक्षद्वीप के समुद्री तट / प्रवाल भित्ति क्षेत्र
  • गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में रहने वाला क्रस्टेशियन
  • छोटे आकार का, चपटे शरीर वाला, आगे की ओर बड़े पंजे
  • भारतीय समुद्री प्रजातियों की सूची में नया जुड़ाव

यह खोज संकेत देती है कि भारत के द्वीपीय समुद्री क्षेत्र अभी भी अज्ञात जैव-विविधता के हॉटस्पॉट हैं।

स्क्वाट लॉबस्टर क्या होते हैं ?

स्क्वाट लॉबस्टर समुद्री क्रस्टेशियन (Crustaceans) हैं, जो दिखने में छोटे लॉबस्टर जैसे लगते हैं, लेकिन जैविक रूप से सच्चे लॉबस्टर नहीं होते।

वर्गीकरण संबंध

  • अधिक निकट संबंध: हर्मिट केकड़े और पोर्सिलेन केकड़े
  • कम संबंध: वास्तविक लॉबस्टर

शारीरिक व व्यवहारिक विशेषताएँ

  • पूंछ वक्ष (thorax) के नीचे मुड़ी रहती है → शरीर छोटा व मोटा दिखता है
  • आगे की ओर लंबे पंजे (chelae)
  • रंग अक्सर लाल, नारंगी या चित्तीदार — छिपने में सहायक
  • खतरा होने पर पूंछ से पानी को धक्का देकर तेजी से पीछे की ओर भागते हैं
  • अधिकांशतः प्रवाल भित्तियों, चट्टानों और गहरे समुद्र तल में पाए जाते हैं

वितरण (Distribution)

  • लगभग सभी महासागरों में पाए जाते हैं
  • उथले पानी से लेकर गहरे समुद्र (Deep Sea) तक
  • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक विविधता — इसलिए लक्षद्वीप जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण

महत्व (Importance)

  1. समुद्री खाद्य-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा
  2. प्रवाल-भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के सूचक
  3. नई प्रजातियों की खोज → जलवायु परिवर्तन व समुद्री संरक्षण अध्ययन में उपयोगी
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