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श्वेत बौना प्रणाली

संदर्भ 

हाल ही में, नासा (NASA) के Imaging X-ray Polarization Explorer (IXPE) मिशन ने इतिहास में पहली बार किसी श्वेत बौना प्रणाली (White Dwarf System) की आंतरिक बनावट का विश्लेषण किया है। इस शोध के दौरान EX Hydrae नामक द्वितारा तंत्र में गैस की गतिशीलता और एक्स-रे उत्सर्जन से जुड़ी कई नई व चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आई हैं।

श्वेत बौना प्रणाली (White Dwarf System)

  • श्वेत बौना प्रणाली में एक श्वेत बौना तारा शामिल होता है जो सूर्य जैसे तारे के जीवन-चक्र का अंतिम चरण होता है।
  • यह तारा अत्यधिक सघन होता है और इसका आकार लगभग पृथ्वी के समान होता है।
  • अधिकांश मामलों में यह किसी अन्य तारे के साथ द्वितारा (बाइनरी) प्रणाली के रूप में पाया जाता है। 

खोज एवं अध्ययन

  • श्वेत बौनों को तारों की एक विशिष्ट श्रेणी के रूप में 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में तारकीय स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा पहचाना गया था।
  • हालिया वैज्ञानिक उपलब्धि नासा के IXPE मिशन से जुड़ी है जिसने हाइड्रा तारामंडल में स्थित और पृथ्वी से लगभग 200 प्रकाश-वर्ष दूर EX Hydrae प्रणाली का अध्ययन किया।
  • यह अध्ययन पारंपरिक चमक मापन तक सीमित न रहकर एक्स-रे ध्रुवण के गहन विश्लेषण पर आधारित था। 

श्वेत बौने का निर्माण 

  • जब सूर्य जैसे किसी तारे का नाभिकीय ईंधन समाप्त हो जाता है तो वह अपनी बाहरी परतों को अंतरिक्ष में छोड़ देता है जिससे ग्रहीय नीहारिका का निर्माण होता है।
  • इसके पश्चात तारे का गर्म व अत्यधिक सघन केंद्र शेष रह जाता है जिसे श्वेत बौना कहा जाता है।
  • द्वितारा प्रणालियों में श्वेत बौने तारे का तीव्र गुरुत्वाकर्षण बल उसके साथी तारे से गैस आकर्षित करता है।
  • EX Hydrae जैसी प्रणालियों को इंटरमीडिएट पोलर कहा जाता है। इसमें श्वेत बौने का मध्यम स्तर का चुंबकीय क्षेत्र अभिवृद्धि चक्र को आंशिक रूप से प्रभावित करता है और गैस को चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के माध्यम से उसकी सतह तक पहुँचाता है।

प्रमुख विशेषताएँ 

  • अत्यधिक सघनता: द्रव्यमान सूर्य के तुल्य, किंतु आकार पृथ्वी जितना छोटा।
  • अपसारी पदार्थ: इसमें नाभिकीय संलयन नहीं होता है। तारे की स्थिरता इलेक्ट्रॉन अपसारी दाब (Pauli Exclusion Principle) पर निर्भर करती है।
  • ऊर्जा-समृद्ध विकिरण: सतह पर गिरने वाली गैस अत्यंत उच्च तापमान तक पहुँचकर एक्स-रे उत्सर्जित करती है।
  • चुंबकीय प्रभाव: इंटरमीडिएट पोलर प्रणालियों में गैस के स्तंभ श्वेत बौने की सतह से हजारों किलोमीटर ऊँचाई तक विस्तारित हो सकते हैं।
  • चंद्रशेखर सीमा: श्वेत बौने का अधिकतम द्रव्यमान लगभग सूर्य के 1.4 गुना तक सीमित होता है। इससे अधिक होने पर तारे के पतन या विस्फोट होने की संभावना रहती है। 

अध्ययन का महत्त्व

  • IXPE द्वारा एकत्र किए गए एक्स-रे ध्रुवण आँकड़ों की सहायता से वैज्ञानिकों ने गर्म गैस स्तंभों की ऊँचाई का अनुमान लगाया और श्वेत बौने की सतह से परावर्तित एक्स-रे की पहचान की, जो पहले संभव नहीं थी।
  • यह शोध अभिवृद्धि तंत्र, चुंबकीय प्रभावों तथा अत्यधिक परिस्थितियों में पदार्थ के व्यवहार से जुड़े सिद्धांतों की प्रत्यक्ष जाँच के लिए एक नया आधार प्रदान करता है। 
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