संदर्भ
हाल ही में कश्मीर के बारामूला ज़िले में स्थित ज़ेहनपोरा क्षेत्र में लगभग 2,000 वर्ष पुराने कुषाण काल से संबंधित बौद्ध स्तूपों और मठीय परिसर का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया गया है।
ज़ेहनपोरा स्तूप के बारे में
- ज़ेहनपोरा गाँव उत्तरी कश्मीर के बारामूला ज़िलें में अवस्थित है। यह क्षेत्र कश्मीर को गांधार क्षेत्र (वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान–पाकिस्तान) से जोड़ने वाले प्राचीन रेशम मार्ग गलियारे पर स्थित था।
- ज़ेहनपोरा एक विस्तृत कुषाणकालीन बौद्ध परिसर है जिसमें अनेक स्तूप, अर्धवृत्ताकार चैत्य गृह (प्रार्थना कक्ष), विहार (भिक्षुओं के आवास), शहरी स्वरूप की बस्तियाँ तथा विविध पुरावशेष शामिल हैं।
- यह स्थल जम्मू एवं कश्मीर के बारामूला ज़िले में लगभग 10 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- यह स्थल कुषाण काल (प्रथम से तृतीय शताब्दी ईस्वी) से संबंधित है। कनिष्क एवं हुविष्क जैसे कुषाण शासकों के समय में कश्मीर बौद्ध अध्ययन और शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में प्रचलित था।
- कश्मीर में बौद्ध धर्म का आगमन सम्राट अशोक के शासनकाल (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) में हुआ और बाद में महायान बौद्ध परंपरा के माध्यम से इसका व्यापक विस्तार हुआ, जो आगे चलकर मध्य एशिया व चीन तक पहुँचा।
- ज़ेहनपोरा को संभवतः गांधार बौद्ध नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है जो मठों, व्यापारिक मार्गों एवं शिक्षण केंद्रों से जुड़ी एक अंतर-क्षेत्रीय व्यवस्था थी।
स्तूपों एवं संरचनाओं की प्रमुख विशेषताएँ
- स्तूपाकार चबूतरे/टीले: स्थल पर पाए गए ऊँचे टीले मानव निर्मित प्रतीत होते हैं और ये स्तूपों के आधार के रूप में पहचाने जाते हैं जो समय के साथ क्षीण हो चुके हैं किंतु वर्तमान में भी स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हैं।
- एकाधिक टीले (समूहबद्ध विन्यास): स्थलाकृति यह दर्शाती है कि यहाँ कई स्तूप एक साथ स्थित थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई एकल मंदिर नहीं है बल्कि एक संगठित परिसर था।
- ऊपरी संरचनाओं के संकेत: टीलों के शीर्ष पर काष्ठ निर्मित ऊपरी ढाँचों के अवशेषों के प्रमाण मिले हैं।
- वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं मानचित्रण: स्थल के दस्तावेज़ीकरण में ड्रोन तकनीक, रिमोट सेंसिंग, हवाई फोटोग्राफी तथा ज़मीनी सर्वेक्षण का प्रयोग किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि सतह के नीचे संरचनात्मक घनत्व अपेक्षा से कहीं अधिक है।
- तुलनात्मक स्थापत्य विश्लेषण: उत्खनन से प्राप्त विवरण क्षेत्रीय अन्य स्थलों के निर्माण स्वरूप, परिक्रमापथ व स्थापत्य तकनीकों की तुलना में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
महत्व
- विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में ज़ेहनपोरा के आकार और विस्तार के समकक्ष कोई अन्य पुरास्थल ज्ञात नहीं है जिससे यह कश्मीर के भौतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान देता है।
- यह मठीय परिसर बौद्ध शिक्षा एवं संन्यासी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में कश्मीर की ऐतिहासिक भूमिका को सुदृढ़ करता है तथा भिक्षुओं, तीर्थयात्रियों व विचारों के व्यापक आवागमन से इसके गहरे संबंधों को दर्शाता है।