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डार्ट मिशन क्या है ? मानवता की पहली ग्रह सुरक्षा तकनीक जिसने क्षुद्रग्रह की दिशा बदल दी

हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन में यह सामने आया है कि नासा का डार्ट मिशन (DART Mission) केवल एक छोटे क्षुद्रग्रह की गति को बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सूर्य के चारों ओर घूमने वाली पूरे क्षुद्रग्रह जोड़े की कक्षा को भी थोड़ा प्रभावित किया। यह उपलब्धि मानव इतिहास में ग्रह सुरक्षा (Planetary Defense) की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

डार्ट मिशन क्या है ?

  • डार्ट (Double Asteroid Redirection Test) नासा द्वारा विकसित एक अंतरिक्ष मिशन था, जिसका उद्देश्य यह परीक्षण करना था कि क्या किसी संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रह की दिशा को गतिज प्रभाव (Kinetic Impact) के माध्यम से बदला जा सकता है।
  • सरल शब्दों में, इस मिशन के तहत एक अंतरिक्ष यान को जानबूझकर एक क्षुद्रग्रह से टकराया गया ताकि यह देखा जा सके कि क्या टक्कर के कारण उसकी गति या कक्षा में बदलाव किया जा सकता है।
  • यह मिशन इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि यह दुनिया का पहला ग्रह सुरक्षा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन (Planetary Defense Technology Demonstration) था। 
  • इसका उद्देश्य भविष्य में पृथ्वी की ओर आने वाले खतरनाक क्षुद्रग्रहों को टक्कर मारकर उनकी दिशा बदलने की क्षमता का परीक्षण करना था।

मिशन की शुरुआत

  • डार्ट मिशन को 24 नवंबर 2021 को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से लॉन्च किया गया था। 
  • इस मिशन को एक स्वायत्त अंतरिक्ष यान के रूप में डिजाइन किया गया था, जो बिना किसी मानव नियंत्रण के अपने लक्ष्य तक पहुंच सके।
  • डार्ट अंतरिक्ष यान में एक विशेष कैमरा और नेविगेशन प्रणाली लगाई गई थी, जिसकी मदद से वह अपने लक्ष्य क्षुद्रग्रह की पहचान करके उससे टकराने के लिए स्वयं मार्ग निर्धारित कर सकता था।

लक्ष्य: द्विआधारी क्षुद्रग्रह प्रणाली

डार्ट मिशन का लक्ष्य एक द्विआधारी क्षुद्रग्रह प्रणाली (Binary Asteroid System) था, जिसमें दो पिंड शामिल थे:

  • डिडिमोस (Didymos) – लगभग 780 मीटर चौड़ा मुख्य क्षुद्रग्रह
  • डिमोर्फोस (Dimorphos) – लगभग 160 मीटर चौड़ा छोटा चंद्रमा, जो डिडिमोस के चारों ओर परिक्रमा करता है

वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली को इसलिए चुना क्योंकि यहां छोटे क्षुद्रग्रह की कक्षा में बदलाव को आसानी से मापा जा सकता था।

सिद्धांत यह था कि यदि छोटे क्षुद्रग्रह डिमोर्फोस की गति या कक्षा को बदला जाए, तो गुरुत्वाकर्षण संबंध के कारण पूरे सिस्टम पर उसका प्रभाव पड़ेगा।

ऐतिहासिक टक्कर (2022)

26 सितंबर 2022 को डार्ट अंतरिक्ष यान ने लगभग 22,500 किमी प्रति घंटे की गति से डिमोर्फोस से टकराकर इतिहास रच दिया।

इस टक्कर के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि:

  • डिमोर्फोस की परिक्रमा अवधि लगभग 32 मिनट कम हो गई
  • क्षुद्रग्रह की कक्षा में स्पष्ट बदलाव दर्ज किया गया
  • टक्कर के कारण बड़ी मात्रा में मलबा अंतरिक्ष में फैला

यह पहली बार था जब मानवता ने अंतरिक्ष में किसी क्षुद्रग्रह की गति को सफलतापूर्वक बदलकर दिखाया।

नया अध्ययन क्या बताता है ?

  • हाल के शोध से यह संकेत मिला है कि डार्ट मिशन का प्रभाव केवल छोटे क्षुद्रग्रह तक सीमित नहीं रहा।
  • टक्कर के कारण उत्पन्न ऊर्जा और मलबे के प्रभाव से पूरे डिडिमोस-डिमोर्फोस सिस्टम की सूर्य के चारों ओर की कक्षा में भी हल्का बदलाव हुआ
  • इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल रही है कि भविष्य में यदि पृथ्वी की ओर आने वाले किसी क्षुद्रग्रह को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदलनी पड़े, तो उसके व्यापक प्रभाव क्या हो सकते हैं।

ग्रह सुरक्षा के लिए महत्व

  • डार्ट मिशन का महत्व केवल वैज्ञानिक प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
  • यदि भविष्य में कोई बड़ा क्षुद्रग्रह पृथ्वी के लिए खतरा बनता है, तो इस प्रकार की काइनेटिक इम्पैक्टर तकनीक का उपयोग करके उसकी दिशा बदली जा सकती है।
  • इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का हेरा मिशन (Hera Mission) 2026 के आसपास इस क्षुद्रग्रह प्रणाली का अध्ययन करने जाएगा, ताकि डार्ट मिशन के प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया जा सके।
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