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जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल)

संदर्भ 

  • हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को देश का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है। 

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) के बारे में

  • भौगोलिक स्थिति : यह उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्रमुख पक्षी अभयारण्य है, जिसे लोकप्रिय रूप से सुरहा ताल के नाम से जाना जाता है।
  • क्षेत्रफल : इसका कुल क्षेत्रफल 3432.93 हेक्टेयर है। 
  • उत्पत्ति एवं प्रकृति : यह मूल रूप से गंगा नदी के विसर्प (Meander) से निर्मित मीठे पानी की एक प्राकृतिक व बारहमासी गोखुर झील (Oxbow Lake) है, जो गंगा नदी बेसिन के मध्य क्षेत्र में आती है। इसे तीन मुख्य जलधाराओं (चैनलों) से निरंतर मीठा पानी मिलता रहता है।
  • पारिस्थितिकी (Ecology) : इसके आस-पास का क्षेत्र विस्तृत दलदलों, बाढ़ के मैदानों, मौसमी जलमग्न क्षेत्रों और धान के खेतों से समृद्ध है।
  • महत्व (Central Asian Flyway) : यह अभयारण्य सेंट्रल एशियन फ्लाईवे से होकर आने वाले विदेशी प्रवासी पक्षियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण शीतकालीन प्रवास स्थल है। अपनी समृद्ध पक्षी जैव-विविधता (Avifaunal Biodiversity) के कारण यह स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का प्रमुख केंद्र है।
  • जैव-विविधता (Biodiversity) : यहाँ वनस्पतियों और जीवों का एक समृद्ध संसार है, जिसमें पौधों की 221, मछलियों की 66, सरीसृपों (Reptiles) की 7 और उभयचरों (Amphibians) की 3 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • विशेष जीव : यहाँ पाई जाने वाली मछलियों में वल्लागो अट्टू (Wallago attu) और बगारियस बगारियस (Bagarius bagarius) प्रमुख हैं।  

रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के बारे में 

  • आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण के लिए यह पहला वैश्विक अंतर-सरकारी समझौता था, जिसे 1971 में ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षरित किया गया और यह 1975 में प्रभावी हुआ। 
  • यह दुनिया का इकलौता ऐसा समझौता है जो किसी विशेष पारिस्थितिकी तंत्र (यानी केवल आर्द्रभूमि) पर केंद्रित है।

तीन मुख्य स्तंभ (Core Pillars):

  • अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करना।
  • सदस्य देशों के भीतर आने वाली सभी आर्द्रभूमियों के विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use) को बढ़ावा देना।
  • सीमा पार फैली (साझा) आर्द्रभूमि प्रणालियों और प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना। 

वैश्विक भागीदारी: 

  • वर्तमान में इसके 172 हस्ताक्षरकर्ता देश हैं, जो अपने यहाँ आर्द्रभूमि आरक्षित क्षेत्र (Wetland Reserves) बनाने और उनके संरक्षण के लिए नीतिगत रूप से प्रतिबद्ध हैं।

भारत और रामसर सम्मेलन 

  • भारत 1982 को रामसर सम्मेलन का पक्षधर बना और अब तक, 26 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में 99 वेटलैंड्स को रामसर स्थलों के रूप में नामित किया गया है। 
  • भारत 1999-2002 तक स्थायी समिति का सदस्य था।
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