जैव-विविधता भारत की पर्यावरणीय और विकासात्मक प्राथमिकताओं के केंद्र में है, जो खाद्य सुरक्षा, आजीविका, जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) और पारिस्थितिक संतुलन का आधार है। वन, आर्द्रभूमि, पर्वत और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जैसी विविध प्रणालियों से समृद्ध भारत, वैश्विक जैव-विविधता लक्ष्यों (जैसे- कुन्मिंग-मोंट्रियल वैश्विक जैव-विविधता ढांचा - KMGBF) के अनुरूप अपनी प्राकृतिक पूंजी को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का यह दृष्टिकोण संपूर्ण सरकार (Whole-of-Government) और संपूर्ण समाज (Whole-of-Society) के सिद्धांत पर आधारित है।
भारत ने संरक्षण, स्थायी उपयोग और न्यायसंगत लाभ साझाकरण के लिए एक सुदृढ़ त्रि-स्तरीय वैधानिक और संस्थागत ढांचा स्थापित किया है:
यह अधिनियम देश में जैविक संसाधनों के संरक्षण का प्राथमिक विधिक स्रोत है। वर्ष 2023 के संशोधन ने अनुपालन को सरल बनाकर अनुसंधान, नवाचार और पारंपरिक ज्ञान-आधारित पद्धतियों को मजबूत किया है, जिससे शासन की कुशलता में सुधार हुआ है।
जैव-विविधता वित्त पहल
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जैव-विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका को निम्नलिखित माध्यमों से संस्थागत रूप दिया गया है:
यह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और खेती/पालतू नस्लों का एक व्यापक डेटाबेस है। देश भर में लगभग 2,72,648 पीबीआर तैयार किए जा चुके हैं।
यह जैविक संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग से प्राप्त लाभ को स्थानीय प्रदाताओं/समुदायों के साथ न्यायसंगत रूप से साझा करना सुनिश्चित करता है। वर्ष 2017 से 2026 के बीच, भारत ने 12,830 लाभ हेतु अनुमोदन जारी किए हैं, जिसके तहत मई 2026 तक लगभग 11,000 बीएमसी को ₹145 करोड़ की राशि वितरित की जा चुकी है।
राष्ट्रीय जैव-विविधता रणनीति और कार्ययोजना को वैश्विक कुन्मिंग-मोंट्रियल ढांचे (KMGBF) के साथ संरेखित किया गया है, जो दीर्घकालिक संरक्षण एजेंडा तय करती है।
भारतीय वन्यजीव सर्वेक्षण (जेडएसआई) और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) द्वारा, आईयूसीएन-भारत के सहयोग से यह रोडमैप देश में एक विज्ञान-आधारित संकटग्रस्त-प्रजाति मूल्यांकन प्रणाली स्थापित कर रहा है, ताकि वर्ष 2030 तक संकटग्रस्त प्रजातियों की सटीक स्थिति का पता लगाकर उनके संरक्षण को प्राथमिकता दी जा सके।
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मानक / संकेतक |
वर्तमान स्थिति / उपलब्धि |
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वन और वृक्ष आवरण |
कुल 8.27 लाख वर्ग किमी (देश के भौगोलिक क्षेत्र का 25.17%) |
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संरक्षित क्षेत्र (Protected Areas) |
देश भर में 1,134 से अधिक संरक्षित क्षेत्र (कुल 1,87,592 वर्ग किमी) |
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प्रजाति पुनर्प्राप्ति (बाघ संरक्षण) |
बाघों की संख्या वर्ष 2014 के 2,226 से बढ़कर वर्तमान अनुमानों में 3,682 हुई। |
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स्थानीय शासन नेटवर्क |
देश भर के ग्रामीण व शहरी निकायों में 2,76,653 से अधिक बीएमसी कार्यरत। |
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डिजिटल परिवर्तन |
पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI 2.0) के तहत 2.6 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों का 150 संकेतकों पर मूल्यांकन। (PAI 2.0 में रिकॉर्ड 97.3% पंचायतों की भागीदारी)। |
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