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जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य बना भारत का 100वाँ रामसर स्थल

चर्चा में क्यों ?

विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2026) के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बलिया जिले स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को भारत का 100वाँ रामसर स्थल घोषित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

भारत बना एशिया का नंबर-1 देश

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य को भारत के 100वें रामसर स्थल का दर्जा मिलने के साथ ही भारत एशिया में सर्वाधिक रामसर स्थलों वाला देश बन गया है तथा वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

वर्तमान में दुनिया में सबसे अधिक रामसर स्थल यूनाइटेड किंगडम (176) में हैं, जबकि मेक्सिको (144) दूसरे स्थान पर है। भारत का 100 रामसर स्थलों तक पहुंचना आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत पर्यावरणीय प्रबंधन के प्रति उसकी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (Ramsar Sites) की सूची में शामिल किया जाना भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित यह आर्द्रभूमि सुरहा ताल के नाम से प्रसिद्ध है। इस मान्यता के साथ भारत में कुल रामसर स्थलों की संख्या 100 हो गई है, जो देश की बढ़ती पर्यावरणीय जागरूकता और संरक्षण प्रयासों को दर्शाती है।

रामसर स्थल क्या है ?

रामसर स्थल (Ramsar Site) ऐसी आर्द्रभूमि (Wetland) होती है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पारिस्थितिक महत्व के कारण मान्यता प्राप्त होती है।

इसकी शुरुआत रामसर कन्वेंशन, 1971 के तहत हुई थी, जिस पर ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे।

इस कन्वेंशन का उद्देश्य विश्वभर की आर्द्रभूमियों का संरक्षण तथा उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, क्योंकि ये पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आर्द्रभूमियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं ?

आर्द्रभूमियाँ पृथ्वी के सबसे उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। ये :

  • प्रवासी पक्षियों और जलीय जीवों को आवास प्रदान करती हैं।
  • भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) में सहायता करती हैं।
  • बाढ़ के प्रभाव को कम करती हैं।
  • प्रदूषकों को फिल्टर करके जल की गुणवत्ता सुधारती हैं।
  • जैव विविधता एवं स्थानीय आजीविका को समर्थन देती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में योगदान देती हैं।

भारत के 100वें रामसर स्थल का महत्व

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य का 100वें रामसर स्थल के रूप में चयन कई कारणों से महत्वपूर्ण है :

  • इससे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत होगी।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान एवं पारिस्थितिक निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।
  • इको-टूरिज्म और सतत विकास के अवसर बढ़ेंगे।
  • प्रवासी पक्षियों और आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर संरक्षण मिलेगा।
  • यह जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु अनुकूलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वर्ष 2026 में भारत में शामिल किए गए नए रामसर स्थल

क्रमांक

रामसर स्थल

राज्य

घोषणा तिथि

भारत में क्रम

1

पटना पक्षी अभयारण्य

उत्तर प्रदेश

जनवरी 2026

97वाँ

2

छारी-ढांड आर्द्रभूमि

गुजरात

जनवरी 2026

98वाँ

3

शेखा झील पक्षी अभयारण्य

उत्तर प्रदेश

अप्रैल 2026

99वाँ

4

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल)

उत्तर प्रदेश

5 जून 2026

100वाँ

उत्तर प्रदेश की विशेष उपलब्धि

उत्तर प्रदेश आर्द्रभूमि संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में उभरकर सामने आया है। वर्ष 2026 में घोषित चार नए रामसर स्थलों में से तीन उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।

  • पटना पक्षी अभयारण्य (एटा)
  • शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़)
  • जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (बलिया)

यह उपलब्धि राज्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों और जैव विविधता संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।

निष्कर्ष

जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य को भारत के 100वें रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिलना केवल एक संख्या भर नहीं है, बल्कि यह भारत की प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच आर्द्रभूमियों का संरक्षण न केवल जैव विविधता की रक्षा करेगा, बल्कि जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत का 100 रामसर स्थलों तक पहुंचना इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कदम है।

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