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भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य

संदर्भ 

  • नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने “फ्यूचर ऑफ इंडियाज़ सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री” (Future of India’s Semiconductor Industry) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जो देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी चिप विनिर्माण इकोसिस्टम के निर्माण की रणनीतिक प्राथमिकताओं और चुनौतियों का विश्लेषण करती है।   

सेमीकंडक्टर: आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार 

  • सेमीकंडक्टर (चिप) ऐसे पदार्थ हैं जिनकी विद्युत चालकता कुचालकों और सुचालकों के मध्य होती है। यह लगभग हर आधुनिक तकनीक का मुख्य घटक है:
    • कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स : स्मार्टफोन, लैपटॉप, घरेलू उपकरण।
    • ऑटोमोटिव एवं रक्षा : कारों के इंजन नियंत्रण, मिसाइल, रडार, उपग्रह और संचार प्रणालियाँ।
    • उद्योग एवं स्वास्थ्य : औद्योगिक रोबोट, आईओटी (IoT) उपकरण, एमआरआई/एक्स-रे मशीनें और वियरेबल्स। 

सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला (Value Chain) के मुख्य चरण

  • चिप डिजाइन (Design) : चिप की वास्तुकला (Architecture) और सर्किट का निर्माण करना।
  • फैब्रिकेशन (Fabrication/Fabs) : अत्यधिक विशिष्ट और अरबों डॉलर की लागत वाले क्लीन रूम कारखानों में सिलिकॉन वेफर्स पर वास्तविक चिप का निर्माण। यह सबसे अधिक पूंजी-गहन चरण है। 
  • पैकेजिंग (ATMP) : चिप की असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) करना, ताकि उन्हें उपयोग के लिए भेजा जा सके। 

भारत सरकार के प्रयास एवं वर्तमान स्थिति 

  • देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 76,000 करोड़ के बजटीय आवंटन के साथ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) संचालित है, जिसके तहत वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं:
    • फैब्रिकेशन इकाइयों और डिस्प्ले फैब्स की स्थापना के लिए 50% से अधिक की पूंजीगत सब्सिडी।
    • चिप डिजाइन स्टार्टअप्स के लिए डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI)। 

वर्तमान स्थिति: 

  • भारत में अभी कोई भी व्यावसायिक फैब चालू नहीं है। पहली इकाई 2028 तक धोलेरा (गुजरात) में चालू होने की संभावना है। वर्तमान में 10 परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं।

नीति आयोग की प्रमुख रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • घरेलू आत्मनिर्भरता का अभाव : स्थानीय इकोसिस्टम वर्तमान मांग को पूरा करने में असमर्थ है; यहाँ तक कि घरेलू असेंबली के लिए भी चिप्स का बड़े पैमाने पर आयात होता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा एवं भू-राजनीतिक जोखिम : रक्षा और एयरोस्पेस में विदेशी चिप्स पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा करती है। ताइवान (वैश्विक विनिर्माण का केंद्र) में कोई भी संकट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को ठप कर सकता है। 
  • दीर्घकालिक गर्भाधान अवधि (Long Gestation Period) : एक फैब को शुरू होने में 4-5 वर्ष लगते हैं, जिसके बाद भी उत्पादन स्थिरता (Yield Optimization) में कई तिमाहियों का समय लगता है। इसके लिए कम से कम एक दशक की निरंतर प्रतिबद्धता आवश्यक है।

रणनीतिक सिफारिशें (Strategic Recommendations) 

  • संप्रभु क्षमताओं का विकास : विदेशी बौद्धिक संपदा (IP) पर निर्भरता घटाने के लिए मटीरियल साइंसेज में स्वदेशी अनुसंधान और एजेंटिक एआई (Agentic AI) का उपयोग।
  • पूंजीगत सहयोग : इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के अगले चरण के लिए आगामी दशक में 45-60 बिलियन डॉलर के सरकारी निवेश की आवश्यकता।  
  • रणनीतिक फोकस (Mature Nodes) : अत्यधिक जोखिम वाले 3-7 नैनोमीटर (Frontier Chips) के बजाय रणनीतिक रूप से प्रासंगिक मैच्योर और एडवांस नोड्स तथा रक्षा अनुप्रयोगों के लिए कंपाउंड सेमीकंडक्टर पर ध्यान केंद्रित करना। 
  • पैकेजिंग को प्राथमिकता : फैब्रिकेशन की तुलना में कम जटिल और कम खर्चीली होने के कारण, चिप पैकेजिंग को आयात प्रतिस्थापन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रवेश का मुख्य जरिया बनाना।

विश्वसनीय भागीदार बनाम चीन 

भागीदार श्रेणी

देश

सहयोग के मुख्य क्षेत्र

विश्वसनीय भागीदार (Trusted Partners)

अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ (EU), दक्षिण कोरिया

महत्वपूर्ण टूल्स की आपूर्ति, संयुक्त अनुसंधान (R&D) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer)।

रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी (Adversary)

चीन

राजनयिक सुधारों के बावजूद, चीनी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करना भारत और पश्चिमी देशों का साझा भू-राजनीतिक लक्ष्य है।

मुख्य चुनौतियाँ 

  • वित्तीय एवं तकनीकी अंतर : अरबों डॉलर के निवेश की आवश्यकता और निजी क्षेत्र में लंबे पेबैक पीरियड का जोखिम। साथ ही ताइवान (TSMC) और सैमसंग जैसी वैश्विक कंपनियों की तुलना में स्वदेशी तकनीक का न होना। 
  • मानव संसाधन एवं आपूर्ति श्रृंखला : सेमीकंडक्टर विनिर्माण के अनुकूल विशिष्ट इंजीनियरों की भारी कमी और कच्चे माल, रसायनों तथा गैसों के आयात पर अत्यधिक निर्भरता। 
  • बुनियादी ढांचा : अत्यधिक शुद्ध पानी (Ultra-pure water), निर्बाध बिजली और कड़े पर्यावरणीय नियंत्रण वाले क्लीन रूम के निर्माण में लगने वाला लंबा समय।
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