अमेरिकी राष्ट्रपति की टैरिफ शक्तियाँ और सर्वोच्च अदालत का फैसला
संदर्भ
हाल ही में, अमेरिका की सर्वोच्च अदालत द्वारा टैरिफ के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय ने अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यापार संबंधी शक्तियों की कानूनी सीमाओं को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। अदालत ने कहा है कि ‘अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (International Emergency Economic Powers Act: IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को आयात पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
इस निर्णय के साथ अदालत ने डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2025 में लगाए गए व्यापक पारस्परिक तथा मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े टैरिफ को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया।
ट्रम्प द्वारा इस्तेमाल कानूनी प्रावधान
अपने निर्णयों को लागू करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने IEEPA (1977) का सहारा लिया था। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को उस स्थिति में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने की अनुमति देता है जब देश को बाहरी स्रोतों से उत्पन्न किसी ‘असामान्य एवं गंभीर खतरे’ का सामना करना पड़े। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति कुछ आर्थिक लेनदेन को नियंत्रित कर सकते हैं।
IEEPA की उत्पत्ति शत्रु संग व्यापार अधिनियम (Trading with the Enemy Act) से हुई थी, जिसे 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शत्रु देशों के साथ व्यापार को नियंत्रित करने के लिए पारित किया गया था। इस कानून का उपयोग प्रायः विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करने, वित्तीय लेनदेन रोकने तथा दुश्मन देशों या आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, वर्ष 2025 से पहले तक इस कानून का उपयोग टैरिफ लगाने के लिए कभी नहीं किया गया था।
दूसरे कार्यकाल में सत्ता में लौटने के बाद ट्रम्प ने लैटिन अमेरिकी देशों से मादक पदार्थों की तस्करी और व्यापार असंतुलन को लेकर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया। इसके बाद उनके प्रशासन ने कनाडा और मैक्सिको से आने वाले अधिकांश सामानों पर 25% टैरिफ तथा चीन से आने वाले उत्पादों पर 10% शुल्क लगाया।
साथ ही, एक पारस्परिक टैरिफ नीति लागू की गई जिसके तहत लगभग सभी व्यापारिक साझेदार देशों से आयात पर कम-से-कम 10% शुल्क लगाया गया। इस नीति के अंतर्गत भारत सहित कुछ देशों पर इससे भी अधिक दरें लागू की गई थीं।
सर्वोच्च अदालत द्वारा टैरिफ को रद्द करने का कारण
अमेरिकी संविधान के अनुसार कर, शुल्क, आयात शुल्क और उत्पाद शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस (United States Congress) के पास होता है। विदेशी व्यापार को विनियमित करने का अधिकार भी मुख्यतः कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता है। न्यायालय के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ की व्यापकता असाधारण थी और इसके लिए स्पष्ट रूप से कांग्रेस की अनुमति आवश्यक थी।
न्यायालय के फैसले में कहा गया कि राष्ट्रपतिने‘असीमित मात्रा, अवधि एवं दायरे वाले टैरिफ एकतरफा लागू करने की असाधारण शक्ति का दावा किया है। इस प्रकार की शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब इसके लिए कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति हो’।
ट्रम्प द्वारा टैरिफ लगाने के विकल्प
सर्वोच्च आदालत के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्रपति पूरी तरह से टैरिफ लगाने की शक्ति खो चुके हैं। अदालत ने केवल IEEPA के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। इस फैसले के बाद ट्रम्प प्रशासन ने एक नया अस्थायी आयात शुल्क लागू किया, जो 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए प्रभावी हुआ। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि टैरिफ स्तर पहले जैसा ही रहेगा। हालाँकि, अब इसे लागू करने की प्रक्रिया कुछ अधिक जटिल होगी।
ट्रम्प ने अन्य कानूनी प्रावधानों का सहारा लेने का संकेत दिया, जिनमें शामिल हैं—
व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 122: यह राष्ट्रपति को भुगतान संतुलन संकट की स्थिति में किसी देश पर अधिकतम 15% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देती है जो अधिकतम 150 दिनों तक लागू रह सकता है।
धारा 301: यदि कोई व्यापारिक साझेदार अनुचित व्यापारिक प्रथाओं में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
व्यापार विस्तार अधिनियम, 1962 की धारा 232– राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारणों के आधार पर विशिष्ट क्षेत्रों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
कांग्रेस की भूमिका
टैरिफ से जुड़ी शक्तियों के केंद्र में कांग्रेस की भूमिका दो कारणों से महत्वपूर्ण है-
पहला, अमेरिकी संविधान कर और शुल्क लगाने का अधिकार कांग्रेस को देता है। अदालत ने अपने फैसले में इस संवैधानिक व्यवस्था को विशेष महत्व दिया।
दूसरा, व्यापार संबंधी कार्यकारी शक्तियों की सीमा भी कांग्रेस ही कानून के माध्यम से तय करती है। कांग्रेस चाहे तो मौजूदा अधिकारों को सीमित कर सकती है, शुल्क लगाने के लिए अपनी स्वीकृति अनिवार्य कर सकती है या राष्ट्रपति की शक्तियों का विस्तार भी कर सकती है। हालाँकि, व्यवहारिक रूप से इन शक्तियों को फिर से परिभाषित करने के लिए द्विदलीय सहमति आवश्यक होगी।
व्यवसायों को टैरिफ के रिफंड कीई स्थिति
कई महीनों तक अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं को इन बढ़े हुए टैरिफ का आर्थिक बोझ उठाना पड़ा। अदालत ने भले ही इन्हें अवैध घोषित कर दिया हो किंतु उसने धनवापसी की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की है।
निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की रिपोर्ट के अनुसार अब अवैध घोषित किए जा चुके टैरिफ के माध्यम से लगभग 180 अरब डॉलर की वसूली की गई थी।
इस बीच FedEx सहित 1,000 से अधिक कंपनियों ने संयुक्त राज्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (United States Court of International Trade) में अमेरिकी सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। इन कंपनियों ने उन आयात शुल्कों की वापसी की मांग की है जो उनके अनुसार ऐसे उत्पादों पर लगाए गए थे जिन्हें शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलना चाहिए था।
भविष्य के निर्णयों पर प्रभाव
इस फैसले ने अमेरिकी राष्ट्रपति की व्यापारिक आपातकालीन शक्तियों की वैधानिक सीमाओं को अधिक स्पष्ट कर दिया है। भविष्य में भी राष्ट्रपति विदेशी व्यापार को विनियमित करने के लिए विभिन्न कानूनों का उपयोग कर सकेंगे किंतु अदालतों द्वारा इन शक्तियों की व्याख्या अब अधिक सावधानी से की जाएगी।
चूंकि न्यायिक निर्णय प्राय: पूर्व मामलों के आधार पर दिए जाते हैं, इसलिए आने वाले समय में यदि कोई राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का उपयोग उनके निर्धारित दायरे से बाहर करने का प्रयास करता है, तो अदालतें उसकी कड़ी जांच कर सकती हैं।
इस प्रकार यह फैसला अमेरिकी व्यापार नीति और कार्यपालिका की शक्तियों के संतुलन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।