सीईसी निष्कासन प्रस्ताव: कानूनी प्रावधान

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाते हुए उनके निष्कासन (महाभियोग) के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू की है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोप

  • विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया है। प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
    • चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन के दौरान कुछ राज्यों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है।
    • विशेष रूप से West Bengal में सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की तैनाती को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
    • विपक्ष का कहना है कि इन कदमों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
  • इन्हीं आरोपों के आधार पर विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रहा है और सांसदों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का संवैधानिक प्रावधान

  • मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के Article 324(5) में निर्धारित है।
  • इस अनुच्छेद के अनुसार:
    • मुख्य चुनाव आयुक्त को सिर्फ उसी तरीके और उसी आधार पर हटाया जा सकता है,जिस तरह से Article 124(4) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
    • अन्य चुनाव आयुक्तों को केवल मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है।
    • इस व्यवस्था का उद्देश्य चुनाव आयोग को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखना है।

कानूनी ढांचा

  • संसद ने हाल ही में Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023 पारित किया है।
  • इस अधिनियम की धारा 11 में त्यागपत्र और बर्खास्तगी की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • सीईसी को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान होगी।
    • यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुरूप है।

निष्कासन के आधार

  • सीईसी को हटाने के आधार वही हैं जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए लागू होते हैं:
  • दुर्व्यवहार सिद्ध होना 
  • अक्षमता  

निष्कासन की संसदीय प्रक्रिया

सीईसी को हटाने की प्रक्रिया Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होती है।

प्रस्ताव की शुरुआत

  • लोकसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
  • राज्यसभा में प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।

प्रस्ताव की स्वीकृति

  • लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।

जांच समिति का गठन

  • यदि प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाती है।

समिति में शामिल :

  • एक सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश एक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश एक प्रतिष्ठित न्यायविद यह समिति आरोपों की जांच करके रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।

संसद में मतदान

  • यदि समिति आरोपों को सही पाती है, तो संसद में प्रस्ताव पर मतदान कराया जाता है।
  • प्रस्ताव पारित होने के लिए आवश्यक है:
  • प्रत्येक सदन की कुल सदस्यता का बहुमत
  • उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत
  • दोनों सदनों को एक ही सत्र में प्रस्ताव पारित करना होता है।

राष्ट्रपति का अंतिम आदेश

  • जब दोनों सदनों द्वारा प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संसद राष्ट्रपति को संबोधन भेजती है।
  • इसके बाद राष्ट्रपति सीईसी को पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं।

निष्कर्ष

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठोर और जटिल बनाई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव आयोग राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करा सके। हालांकि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और प्रस्ताव लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रिया और संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही लिया जाएगा।

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