संदर्भ
भारत ने अपने आर्थिक ढांचे को डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से पुनः परिभाषित किया है। सरकार की ‘डिजिटल इंडिया’ पहल अब केवल नागरिक सेवाओं तक सीमित नहीं है बल्कि यह व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business: EoDB) का मुख्य इंजन बन गई है। विनियमों के सरलीकरण, पारदर्शिता एवं संस्थागत दक्षता ने भारत को वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है।
व्यवसाय पंजीकरण और नियामक सुधार
भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा किसी व्यवसाय के ‘प्रवेश’ से लेकर उसके ‘विस्तार’ तक की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है।
- MCA21 संस्करण 3 : कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की यह AI-चालित पहल ई-स्क्रूटिनी, ई-एडजुडिकेशन और ई-कंसल्टेशन जैसी उन्नत सुविधाएँ प्रदान करती है। यह प्लेटफॉर्म API के माध्यम से सहज डेटा साझाकरण सुनिश्चित करता है।
- SPICe+ फॉर्म : यह एक एकीकृत वेब फॉर्म है जो 3 केंद्रीय मंत्रालयों और कई राज्य सरकारों की 11 सेवाएँ (जैसे- PAN, TAN, DIN, ESIC एवं EPFO पंजीकरण) एक साथ प्रदान करता है।
- उद्यम पंजीकरण पोर्टल : MSME क्षेत्र के लिए यह एक पूर्णतः डिजिटल, पेपरलेस एवं स्व-घोषणा आधारित प्रणाली है। 12 फरवरी, 2026 तक इसने 7.71 करोड़ पंजीकरण और लगभग 33.97 करोड़ नौकरियों के अवसर सृजित किए हैं।
एकीकृत मंजूरी और पर्यावरणीय शासन
प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के लिए ‘सिंगल विंडो’ (एकल खिड़की) प्रणाली को अपनाया गया है-
- राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) : यह 32 केंद्रीय विभागों और 32 राज्य सरकारों की अनुमोदन प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है। अब तक इसके माध्यम से 8.29 लाख से अधिक अनुमोदन प्रदान किए जा चुके हैं।
- परिवेश (PARIVESH) 3.0 : पर्यावरणीय मंजूरी के लिए यह पोर्टल AI और बेसलाइन डेटा का उपयोग करता है जिससे परियोजनाओं के अनुमोदन में लगने वाले समय में भारी कमी आई है।
- ई-ग्राम स्वराज : यह ग्राम पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकृत योजना और निधियों के उपयोग की पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
कराधान, सीमा शुल्क एवं व्यापार सुगमता
डिजिटल राजकोषीय ढांचे ने कर अनुपालन और लॉजिस्टिक्स की लागत को कम किया है -
- GSTN और ई-वे बिल : GST पोर्टल ने अब तक ₹102.91 लाख करोड़ से अधिक के भुगतान को प्रोसेस किया है। ई-वे बिल प्रणाली ने राज्य-स्तरीय बाधाओं को हटाकर माल की ढुलाई को निर्बाध बनाया है।
- ICEGATE 2.0 : सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के लिए केंद्रीकृत हब ई-फाइलिंग और IGST रिफंड को त्वरित बनाता है।
- TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) : MSMEs के लिए नकदी प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु बजट 2026-27 में इसे केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
लॉजिस्टिक्स और बाजार पहुंच: एकीकृत बुनियादी ढांचा
- PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान : अक्तूबर 2021 में शुरू की गई यह पहल 1,700 से अधिक डेटा लेयर्स के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समन्वित योजना बनाती है। फरवरी 2026 तक इसके तहत ₹16.10 लाख करोड़ की परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है।
- LDB 2.0 (लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक) : यह सड़क, रेल एवं समुद्र के पार कंटेनरों की वास्तविक समय ट्रैकिंग (Real-time tracking) प्रदान करता है।
- GeM एवं ONDC : ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) ने सरकारी खरीद को लोकतांत्रिक बनाया है जबकि ई-कॉमर्स क्षेत्र में छोटे विक्रेताओं के लिए ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)’ समान अवसर प्रदान कर रहा है।
डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (DPI)
भारत का DPI मॉडल (Aadhaar, UPI, DigiLocker) विश्व स्तर पर एक बेंचमार्क बन गया है -
- UPI की वैश्विक धमक : जनवरी 2026 में 21.70 अरब लेन-देन के साथ UPI विश्व की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली है। यह वर्तमान में 8 से अधिक देशों (जैसे- UAE, फ्रांस, सिंगापुर) में सक्रिय है।
- एंटिटी लॉकर और API सेतु : ये प्लेटफॉर्म संगठनों को सुरक्षित दस्तावेज़ भंडारण और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच डेटा साझाकरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
निष्कर्ष
भारत के इन डिजिटल सुधारों ने ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ (Minimum Government, Maximum Governance) के विजन को साकार किया है। डेटा-चालित निर्णय प्रक्रिया और एकीकृत प्लेटफॉर्मों ने न केवल ‘व्यवसाय सुगमता’ को बढ़ावा दिया है बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भारत की विश्वसनीयता को भी सुदृढ़ किया है।