New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

अमेरिका का हैच एक्ट

(प्रारम्भिक परीक्षा : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : भारतीय संवैधानिक योजना की अन्य देशों के साथ तुलना)

पृष्ठभूमि

हाल ही में अगले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिये रिपब्लिकन पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें डोनाल्ड ट्रम्प की दावेदारी पुनः सुनिश्चित हो गई। हालाँकि, ट्रम्प द्वारा आधिकारिक आवास व्हाइट हाउस में कैबिनेट के सहयोगियों की उपस्थिति में नामांकन को स्वीकार करने के कारण विवाद पैदा हो गया। इसको राजनीतिक गतिविधियों में सरकारी हस्तक्षेप को रोकने के लिये नैतिक मानदंडों की अवहेलना माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसको हैच एक्ट का उल्लंघन मान रहे हैं, जो दलगत गतिविधियों में सरकारी हस्तक्षेप को सीमित करता है।

हैच एक्ट

  • संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थापना के समय से ही थॉमस जेफरसन जैसे नेताओं ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा आधिकारिक कार्यों के दौरान राजनीतिक गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की थी।
  • इस मुद्दे के समाधान हेतु अंततः वर्ष 1939 में महामंदी के दौरान एक संघीय कानून अधिनियमित किया गया। इस कानून का नाम न्यू मैक्सिको राज्य के सीनेटर कार्ल हैच के नाम पर रखा गया।
  • इस कानून को ‘विशेष परामर्श कार्यालय’ (ओ.एस.सी.) द्वारा लागू किया जाता है, जो एक स्वतंत्र संघीय एजेंसी है। यह एजेंसी संघीय कर्मचारियों पर लागू होने वाले अन्य विभिन्न कानूनों की भी निगरानी करती है और कथित उल्लंघन की स्थिति में यहाँ शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

हैच एक्ट का उद्देश्य

  • इस अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संघीय कार्यों को एक निष्पक्ष तरीके से प्रशासित किया जाए। साथ ही कार्यस्थल पर संघीय कर्मचारियों को राजनीतिक दबाव से बचाना और उनकी प्रोन्नति को राजनीतिक हस्तक्षेप की बजाय योग्यता के आधार पर सुनिश्चित करना भी इस कानून का लक्ष्य है।
  • इसके अतिरिक्त यह अधिनियम आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के द्वारा राजनीतिक बयान, पोस्ट, नारों या प्रचार जैसी गतिविधियों पर भी रोक लगाता है।

दण्ड का प्रावधान

  • हैच अधिनियम को कार्यस्थल के लिये एक दिशा-निर्देश के रूप में माना जाता है। हालाँकि, इसके प्रावधानों का उल्लंघन अपराध की श्रेणी में नहीं आता है परंतु उल्लंघन की दशा में गम्भीर दंड दिया जा सकता है। इन दण्डों में सरकारी कर्मचारियों को सेवा से मुक्त करना, जुर्माना लगाना या पदावनति करने का आदेश दिया जा सकता है। साथ ही राजनीतिक नियुक्तियों में आमतौर पर कम गम्भीर सज़ाओं का प्रावधान है।
  • अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने हैच अधिनियम को संवैधानिक रूप से वैध माना है और यह सरकारी कर्मचारियों के बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाता है।

उल्लंघन का आरोप

  • यह अधिनियम अमेरिका के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पर लागू नहीं होता है परंतु संघीय सरकार की कार्यकारी शाखा के अन्य सभी नागरिक कर्मचारियों पर लागू होता है।
  • आलोचकों ने ट्रम्प पर हैच अधिनियम के उद्देश्यों की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कथित उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

निर्णय

  • पिछले वर्ष ट्रम्प ने अपने शीर्ष सहयोगियों में से एक को दंडित करने से खुले तौर पर इनकार कर दिया था, जबकि ओ.एस.सी. ने उनको हैच अधिनियम के बार-बार उल्लंघन का दोषी पाया था।
  • कैरियर कर्मचारियों से जुड़े मामलों का निर्णय मेरिट सिस्टम प्रोटेक्शन बोर्ड नामक एक संघीय एजेंसी द्वारा किया जाता है, जबकि राजनीतिक नियुक्तियों को समाप्त करने का निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिया जाता है।

भारत में ऐसे नियमन की आवश्यकता

  • भारत में भी आधिकारिक और राजनीतिक गतिविधियों को पृथक करने के लिये एक कानून की आवश्यकता है। राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिये सरकारी मशीनरी के प्रयोग पर रोक लगाई जानी चाहिये।
  • व्यक्तिगत राजनीतिक कार्यों और सरकारी कार्यों को अलग करते हुए व्यक्तिगत प्रबंधन के लिये सरकारी खर्च का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिये। भारत में ऐसे अधिनियम की कानूनी बाध्यता होने के साथ-साथ एक स्वतंत्र न्यायालय या आयोग द्वारा दण्ड और उसका क्रियान्वयन किया जाना चाहिये।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR