• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

ई-अपशिष्ट नियम एवं पुनर्चक्रण लक्ष्य

  • 27th June, 2022

(प्रारंभिक परीक्षा : प्रश्नपत्र-1 : पर्यावरणीय पारिस्थितिकी)
(मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।)

संदर्भ

हाल ही में, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट (ई-अपशिष्ट) प्रबंधन से संबंधित एक मसौदा अधिसूचना को जारी किया गया है। 

ई-अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता 

  • ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर 2017 के अनुसार, भारत वार्षिक रूप से लगभग 2 मिलियन टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न करता है, जो अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी के पश्चात् पांचवें स्थान पर है।
  • भारत के अधिकांश ई-अपशिष्ट का पुनर्चक्रण खतरनाक परिस्थितियों में अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा किया जाता है, जिसे अधिक से अधिक औपचारिक क्षेत्र द्वारा किये जाने का प्रयास होना चाहिये।    
  • गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्ष 2018-19 में ई-अपशिष्ट का पुनर्चक्रण दोगुने से अधिक हो गया है। 2017-18 में जहाँ 10% पुनर्चक्रण किया गया, वहीं वर्ष 2018-19 में यह 20% से अधिक हो गया है, जिसे आगामी समय में तीव्र गति से बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

मसौदे के मुख्य प्रावधान 

  • हाल ही में जारी अधिसूचना के अनुसार उपभोक्ता सामान कंपनियों और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ई-अपशिष्ट का कम से कम 60% वर्ष 2023 तक एकत्रण और पुनर्चक्रण कर लिया जाए, ताकि एकत्रण और पुनर्चक्रण के लक्ष्य को वर्ष 2024 और वर्ष 2025 में क्रमशः 70% और 80% तक बढ़ाया जा सके।
  • अधिसूचना में लैपटॉप, लैंडलाइन और मोबाइल फोन, कैमरा, रिकॉर्डर, म्यूजिक सिस्टम, माइक्रोवेव, रेफ्रिजरेटर और चिकित्सा उपकरण सहित इलेक्ट्रॉनिक सामानों की एक विस्तृत श्रृंखला निर्दिष्ट की गई है। 
  • मसौदे में लक्ष्य को निर्धारित करने के साथ ही विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility : EPR) प्रमाणपत्र जारी करने का प्रावधान भी किया गया है। यह प्रमाणपत्र एक कंपनी द्वारा एक विशेष वर्ष में एकत्रण और पुनर्चक्रण किये गए ई-अपशिष्ट की मात्रा को प्रमाणित करता है। 
  • कंपनियों को एक ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा और अपने वार्षिक उत्पादन और ई-अपशिष्ट संग्रह लक्ष्य को निर्दिष्ट करना होगा। 
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्य इकाई के रूप में कार्य करेगी जो ई.पी.आर. प्रमाणपत्रों के व्यापार का समन्वय और निगरानी करेगी।
  • इस मसौदे के अनुसार, जो कंपनियाँ अपने वार्षिक लक्ष्यों को पूरा नहीं करती हैं, उन्हें जुर्माना या 'पर्यावरण मुआवजा' देना होगा, लेकिन मसौदे में जुर्माने की मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया है।
  • विदित है कि भारत ने पहली बार वर्ष 2016 में ई-अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित नियमों की घोषणा की थी, जिसे वर्ष 2018 में संशोधित किया गया।
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