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मौद्रिक नीति समिति की रिपोर्ट: फरवरी 2024

प्रारंभिक परीक्षा- समसामयिकी, मौद्रिक नीति समिति, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, बैंक दर, स्थायी जमा सुविधा दर, सीमांत स्थायी सुविधा दर
मुख्य परीक्षा- सामान्य अध्ययन, पेपर-3  

संदर्भ-

RBI की “मौद्रिक नीति समिति “(MPC) ने 8 फरवरी, 2024 को द्विमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

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मुख्य निर्णय-

  • मौद्रिक नीति समिति के प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं,
  • रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
    • रिवर्स रेपो दर 3.75% है
    • बैंक दर 6.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
    • स्थायी जमा सुविधा दर 6.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
    • सीमांत स्थायी सुविधा दर 6.25% दर पर अपरिवर्तित
    • वित्तीय वर्ष 2024-25 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.0 प्रतिशत और पहली तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  • ये निर्णय मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के +/- 2 प्रतिशत के बैंड के भीतर प्राप्त करने के उद्देश्य के अनुरूप हैं।
  • यह लगातार छठीं बार है, जब प्रमुख दरों में परिवर्तन नहीं किया गया है  
  • 1 फरवरी, 2024 को अंतरिम बजट की घोषणा के बाद आने वाला यह लगातार छठां मद्रिक नीति रिपोर्ट भी है।

प्रभाव- 

  • खाद्य पदार्थों की कीमतों में अनिश्चितता का मुख्य मुद्रास्फीति पर प्रभाव जारी 
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में महंगाई दर 4.5% रहने का अनुमान
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विकास की दर बरकरार रहेगी
  • रुपये में स्थिरता आएगी, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत है
  • ग्रामीण मांग में तेजी जारी रहेगी और शहरी खपत भी मजबूत बना रहेगा
  • विनिर्माण क्षेत्र निरंतर लाभप्रद होगा 
  • निजी पूंजीगत व्यय चक्र में सुधार होगा
  • व्यापारिक व्यवहारों में सुधार की संभावना है
  • बैंकों और कॉरपोरेट्स की अच्छी बैलेंस शीट के कारण निवेश की संभावनाएं हैं 
  • वैश्विक व्यापार के दृष्टिकोण में सुधार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ते एकीकरण से शुद्ध बाहरी मांग को समर्थन मिलेगा। 
  • भू-राजनीतिक उथल पुथल, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों में अस्थिरता से विपरीत परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

मौद्रिक नीति समिति ((Monetary Policy Committee)

  • RBI अधिनियम, 1934 (2016 में संशोधित) की धारा 45ZB के तहत केंद्र सरकार द्वारा इसका गठन किया गया है।
  • इसका उद्देश्य मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीति दर निर्धारित करना है।
  • इस समिति में 6 सदस्य होते हैं-
    • RBI का गवर्नर (पदेन अध्यक्ष)
    • डिप्टी गवर्नर (मौद्रिक नीति का प्रभारी, पदेन सदस्य)
    • RBI के केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित एक अधिकारी (पदेन सदस्य)
    • केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त 3 सदस्य (कार्यकाल 4 वर्ष की अवधि के लिए या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो)
  • इसकी बैठक वर्ष में कम से कम 4 बार आयोजित होती है, जिसके लिए कोरम 4 सदस्यों का है।

रेपो दर (Repo Rate)-

  • रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को प्रतिभूति के पुनर्खरीद की शर्त पर पैसा उधार देता है।
  • वाणिज्यिक बैंक अपनी शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए RBI से पैसे उधार लेते हैं।
  • इसे पुर्नखरीद दर भी कहा जाता है।
  • इसका उपयोग मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate)-

  • वह ब्याज दर, जिसके आधार पर वाणिज्यिक बैंक अपनी तरलता आधिक्य को RBI में अल्पकालिक अवधि के लिए जमा करते हैं अथवा उसे ऋण प्रदान करते हैं, रिवर्स रेपो दर कहलाता है।
  • इसका उपयोग तरलता को कम करने के लिए किया जाता है।

बैंक दर (Baink Rate)-

  • जिस ब्याज दर पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालिक अवधि के लिए ऋण प्रदान करता है, बैंक कहलाता है।
  • इसके माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों की साख सृजन क्षमता को प्रभावित किया जाता है।

स्थायी जमा सुविधा दर (Standing Deposit Facility Rate- SDFR)

  • इसके तहत वाणिज्यिक बैंक बिना किसी गारंटी (प्रतिभूति) के जितना चाहें उतना पैसा रिवर्स रेपो दर से कम दर पर RBI को दे सकते सकते हैं।
  • यह RBI को सरकारी प्रतिभूतियां दिए बिना वाणिज्यिक बैंकों से अतिरिक्त तरलता (जमा) को अवशोषित करने में मदद करता है।
  • इसका विचार सर्वप्रथम वर्ष, 2014 में उर्जित पटेल मौद्रिक नीति समिति की रिपोर्ट में दिया गया। 
  • RBI ने वर्ष, 2022 में इसे शुरु करने की घोषणा की ।

सीमांत स्थायी सुविधा दर (Marginal Standing Facility Rate-MSFR)-

  • जिस ब्याज दर पर RBI अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को रातोंरात ऋण प्रदान करता है, MSFR कहलाता है।
  • इसका उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में बैंकों की तरलता संबंधी समस्या को दूर करना है।
  • इसके तहत केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक ही RBI से ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
  • MSFR के तहत प्राप्त ऋण पर ब्याज दर रेपो दर दर से 1% अधिक होता है।
  • इसकी शुरुआत RBI द्वारा मई, 2011 में की गई थी।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न-  रेपो दर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

  1. वाणिज्यिक बैंक अपनी शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए RBI से पैसे उधार लेते हैं।
  2. RBI वाणिज्यिक बैंकों को प्रतिभूति के पुनर्खरीद की शर्त पर पैसा उधार देता है।

नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए।

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर- (c)

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- वर्ष, 2024 की पहली मौद्रिक नीति समिति की रिपोर्ट का भारतीय अर्थवयवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव की व्याख्या कीजिए।



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