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अंडो में कैंसरकारी तत्वों की उपस्थिति का खंडन

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव)

संदर्भ 

हाल ही में, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्पष्ट किया है कि देश में उपलब्ध अंडे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। प्राधिकरण ने अंडों को कैंसर के खतरे से जोड़ने वाले हालिया दावों को भ्रामक, वैज्ञानिक आधार से रहित और अनावश्यक जन-भय फैलाने वाला करार दिया।

प्रमुख बिंदु 

  • अंडों में नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स (AOZ) जैसे कथित कैंसरकारी तत्वों की मौजूदगी से संबंधित रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए FSSAI ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विष व अवशेष) विनियम, 2011 के अंतर्गत मुर्गी पालन और अंडा उत्पादन की किसी भी अवस्था में नाइट्रोफ्यूरान का प्रयोग कठोर रूप से निषिद्ध है। 
  • प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स के लिए निर्धारित 1.0 माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम की बाह्य अधिकतम अवशेष सीमा (EMRL) केवल नियामक निगरानी और प्रवर्तन के उद्देश्य से तय की गई है।

क्या है नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स 

  • नाइट्रोफुरन मेटाबोलाइट्स (Nitrofuran metabolites) वे रासायनिक उत्पाद हैं जो नाइट्रोफुरन नामक एंटीबायोटिक दवाओं के शरीर में विखंडित होने (Metabolize) के बाद बनते हैं।
  • इनका उपयोग पहले पशुओं और मनुष्यों में जीवाणु संक्रमण के उपचार के लिए किया जाता था किंतु अब कई देशों में इनके कैंसर-संबंधी गुणों व विषाक्तता के कारण प्रतिबंधित हैं।
  • इनके मुख्य मेटाबोलाइट्स खाद्य पदार्थों (जैसे- समुद्री भोजन, मांस, अंडे) में अवशेषों के रूप में पाए जाते हैं।
  • प्रमुख नाइट्रोफ्यूरान मेटाबोलाइट्स: AOZ (3-Amino-2-oxazolidinone), SEM (Semicarbazide), AHD (1-Aminohydantoin) व AMOZ (3-Amino-5-morpholinomethyl-2-oxazolidinone)

खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बारे में

  • खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की स्थापना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत की गई है जिसमें विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में खाद्य संबंधी मुद्दों से निपटने वाले विभिन्न अधिनियमों तथा आदेशों को समेकित किया गया है। 
  • FSSAI का गठन खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान आधारित मानक निर्धारित करने और मानव उपभोग के लिए सुरक्षित व पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उनके निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं आयात को विनियमित करने के लिए किया गया है।

उद्देश्य 

  • इस अधिनियम का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा और मानकों से संबंधित सभी मामलों के लिए एक एकल संदर्भ बिंदु स्थापित करना है जिसके लिए बहुस्तरीय व बहुविभागीय नियंत्रण प्रणाली को हटाकर एक एकल नियंत्रण प्रणाली लागू की जाएगी। 
  • इसी उद्देश्य से अधिनियम के तहत एक स्वतंत्र वैधानिक प्राधिकरण ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)’ की स्थापना की गई है जिसका मुख्यालय दिल्ली में स्थित है। 
  • भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लागू करेंगे। 

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत एफ.एस.एस.ए.आई. के दायित्व

  • खाद्य पदार्थों से संबंधित मानकों व दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने और इस प्रकार अधिसूचित विभिन्न मानकों को लागू करने की उपयुक्त प्रणाली निर्दिष्ट करने के लिए विनियमों का निर्माण करना
  • खाद्य व्यवसायों के लिए खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के प्रमाणीकरण में संलग्न प्रमाणन निकायों की मान्यता के लिए तंत्र और दिशानिर्देश निर्धारित करना
  • प्रयोगशालाओं के प्रत्यायन के लिए प्रक्रिया व दिशानिर्देश निर्धारित करना और प्रत्यायित प्रयोगशालाओं की अधिसूचना जारी करना
  • खाद्य सुरक्षा एवं पोषण से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित क्षेत्रों में नीति व नियम बनाने के मामलों में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को वैज्ञानिक सलाह तथा तकनीकी सहायता प्रदान करना
  • खाद्य पदार्थों की खपत, जैविक जोखिम की घटना एवं व्यापकता, खाद्य पदार्थों में संदूषकों, विभिन्न संदूषकों के अवशेषों, खाद्य उत्पादों में संदूषकों, उभरते जोखिमों की पहचान तथा त्वरित चेतावनी प्रणाली के प्रारंभ से संबंधित डेटा एकत्र व संकलित करना
  • देश भर में एक सूचना नेटवर्क का निर्माण करना ताकि जनता, उपभोक्ता, पंचायत आदि को खाद्य सुरक्षा और संबंधित मुद्दों के बारे में त्वरित, विश्वसनीय व निष्पक्ष जानकारी प्राप्त हो सके
  • खाद्य व्यवसायों में शामिल या शामिल होने की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करना
  • खाद्य, स्वच्छता एवं पादप-स्वच्छता मानकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी मानकों के विकास में योगदान देना
  • खाद्य सुरक्षा और खाद्य मानकों के बारे में सामान्य जागरूकता को बढ़ावा देना
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