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BPSC Study Material

बिहार के प्रमुख उद्योग

18-May-2026

किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास में उद्योगों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उद्योग अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्र का हिस्सा हैं, जिनके अंतर्गत निर्माण एवं विनिर्माण संबंधी कार्य किए जाते हैं। झारखंड के गठन (2000) के बाद बिहार में अधिकांश खनिज संसाधन झारखंड के हिस्से में चले गए, जिसके कारण बिहार में खनिज आधारित उद्योग सीमित हो गए। चूँकि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहाँ कृषि आधारित उद्योगों की व्यापक संभावनाएँ हैं।

बिहार में कृषि व्यवस्था

15-May-2026

बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य का लगभग 96 प्रतिशत भू-भाग मैदानी एवं उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी से युक्त है, जो कृषि के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। सिंचाई की उपलब्धता, श्रम शक्ति और अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बिहार में फसल उत्पादन, पशुपालन और मत्स्य पालन का व्यापक विकास हुआ है। बिहार बजट 2024-25 के अनुसार राज्य की लगभग 76 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।

बिहार के प्रमुख ऊर्जा संसाधन

15-May-2026

किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति में ऊर्जा संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऊर्जा न केवल औद्योगिक विकास बल्कि जीवन स्तर में सुधार और तकनीकी उन्नति का भी आधार है। बिहार में ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों में ताप विद्युत, जल विद्युत, कोयला, खनिज तेल एवं प्राकृतिक गैस शामिल हैं, जबकि सौर ऊर्जा, बायोगैस, पवन ऊर्जा और कचरे से ऊर्जा उत्पादन जैसे गैर-पारंपरिक स्रोतों का भी तेजी से विकास हो रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार बिहार की ऊर्जा की चरम मांग 6880 मेगावाट रही, जिसमें 6738 मेगावाट की पूर्ति की गई। वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 7576 मेगावाट तक पहुँच गई है।

बिहार में मुगल शासन

15-May-2026

बाबर (1526-1530 ई.):-भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने की थी।

सल्तनतकालीन बिहार

15-May-2026

बिहार में तुर्क आक्रमण बारहवीं शताब्दी के अंत से प्रारंभ हुआ। उस समय बिहार एक संगठित राजनीतिक इकाई नहीं था। गंगा नदी उत्तर और मध्य बिहार के बीच भौगोलिक तथा राजनीतिक सीमा रेखा थी। उत्तरी बिहार का अधिकांश भाग मिथिला के कर्नाट राज्य के अधीन था। मध्य बिहार विभिन्न छोटे-छोटे शासकों के नियंत्रण में था। 

बिहार की राज्यव्यवस्था

14-May-2026

बिहार में लोकतंत्र की परंपरा अत्यंत प्राचीन और मजबूत रही है। वज्जि गणराज्य से लेकर वर्तमान भारतीय गणतंत्र तक जनप्रतिनिधियों की शासन व्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया। बिहार की वर्तमान राज्य व्यवस्था क्रमिक रूप से विकसित हुई है तथा यह भारतीय संघीय शासन प्रणाली का अभिन्न अंग है। 

राष्ट्रीय आंदोलन का गांधीवादी चरण और बिहार

14-May-2026

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का गांधीवादी चरण (1915–1947) स्वतंत्रता संग्राम का सबसे व्यापक और जन-आधारित चरण था। इस दौरान महात्मा गांधी के नेतृत्व में आंदोलन ने अहिंसा, सत्याग्रह और जनभागीदारी को आधार बनाया। बिहार इस चरण में एक अत्यंत सक्रिय केंद्र बनकर उभरा।

राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार की भूमिका

14-May-2026

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बिहार ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिहार केवल राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरण, किसान आंदोलनों और क्रांतिकारी गतिविधियों का भी प्रमुख क्षेत्र था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए कई महत्वपूर्ण आंदोलन बिहार से जुड़े रहे, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।

बिहार में जनजातीय विद्रोह

14-May-2026

आमतौर पर आदिवासी शेष समाज से पर्यथक रहने वाला तथा जंगलों में निवास करने वाला समूह है ,ब्रिटिश ब्रिटिश सरकार ने अपनी औपनिवेशिक नीति में शामिल करते हुए उनकी विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया । 

बिहार में अफगान शासन

14-May-2026

बिहार में नूहानियों की शक्ति के पतन के पश्चात् शेरशाह सूरी का उदय हुआ। शेरशाह सूरी सूर वंश का संस्थापक तथा लोदी वंश के बाद भारत का द्वितीय अफगान शासक बना। उसका वास्तविक नाम फरीद खान था। उसका जन्म 1472 ई. में एक अफगान परिवार में हुआ था। उसके पिता हसन खाँ जौनपुर के जागीरदार थे। 

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