(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू, 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास) |
संदर्भ
हाल ही में, तमिलनाडु के तिरुवन्नामलई जिले में स्थित एक छोटे शहर ‘चेंगम’ में वेणुगोपाल पार्थसारथी मंदिर में 17वीं सदी की रामायण चित्रकलाओं की खोज की गई है।
चेंगम मंदिर के बारे में
- वेणुगोपाल पार्थसारथी मंदिर चेंगम में एक ऐतिहासिक स्थल है जिसका निर्माण 1600 ईस्वी में गिंगी के नायक प्रमुख (Nayak Chief of Gingee) द्वारा करवाया गया था।
- मंदिर के गर्भगृह, मंडपम और महामंडपम इसकी वास्तुकला की विशेषता दर्शाते हैं।
- एक शिलालेख के अनुसार, मंदिर के मुख्य देवता का नाम अर्जुन सारथी और गोपालकृष्णस्वामी है।
- मूर्ति की सुंदरता इसकी अनूठी विशेषता है, जिसमें भगवान कृष्ण को अर्जुन के सारथी के रूप में दर्शाया गया है, जो कुरुक्षेत्र युद्ध में उनके मार्गदर्शक थे।
हाल की चित्रकला खोज
- तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने मंदिर के महामंडपम की छत पर 17वीं सदी की चित्रकलाओं की खोज की है, जो सम्पूर्ण रामायण महाकाव्य को चित्रित करती हैं।
- इन चित्रों में रामायण के प्रमुख दृश्य, जैसे- लक्ष्मण एवं इंद्रजीत का युद्ध, हनुमान द्वारा संजीवनी पर्वत लाना, राम-रावण युद्ध, रावण की मृत्यु, सीता का अग्निप्रवेश, पुष्पक विमान से अयोध्या की वापसी और राम का राज्याभिषेक शामिल हैं।
- बाहरी वर्गों की दीवारों पर बने चित्र समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गए हैं किंतु आंतरिक दीवारों पर चित्र अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में हैं।
- यह खोज भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम है।
खोज का महत्व
- ये चित्रकलाएँ न केवल कलात्मक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं बल्कि ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत मूल्यवान हैं।
- ये नायक काल की कला व रामायण की कहानी को निरंतर कथन के साथ प्रस्तुत करने की कुशलता को दर्शाती हैं।
- विशेष रूप से राम के राज्याभिषेक का दृश्य कला का उत्कृष्ट नमूना है।
- इन चित्रों की खोज से चेंगम मंदिर का महत्व अधिक बढ़ गया है, जो दक्षिण भारतीय मंदिर कला और धार्मिक कथाओं के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है।
- यह खोज भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करती है और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल देती है।