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100 GW न्यूक्लियर लक्ष्य के लिए ₹25 लाख करोड़ निवेश जरूरी : TERI Report

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में The Energy and Resources Institute (TERI) की रिपोर्ट India’s Nuclear Energy Vision: Strategic Pathways for SMR Deployment में कहा गया है कि भारत को 2047 तक 100 गीगावॉट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए ₹23-25 लाख करोड़ निवेश, व्यापक नियामकीय सुधार और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक को तेजी से अपनाने की आवश्यकता होगी।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • भारत को 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी।
  • वर्तमान परमाणु ढांचा मुख्यतः बड़े रिएक्टरों के लिए बनाया गया है, जिसे SMR और निजी क्षेत्र की भागीदारी के अनुरूप बदलना होगा।
  • रिपोर्ट में वित्तीय जोखिम, ईंधन सुरक्षा, कुशल मानव संसाधन की कमी और जनस्वीकृति को प्रमुख चुनौतियाँ बताया गया है।
  • बड़े पारंपरिक रिएक्टरों और SMR का मिश्रित मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है।

भारत में परमाणु ऊर्जा की वर्तमान स्थिति

  • भारत में वर्तमान में 25 परमाणु रिएक्टर संचालित हैं।
  • कुल स्थापित क्षमता लगभग 8.8 GW है।
  • 2032 तक यह क्षमता बढ़कर लगभग 22 GW होने का अनुमान है।
  • भारत का लक्ष्य 2047 तक इसे 100 GW तक पहुँचाना है।

स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) क्या हैं ?

  • SMR छोटे आकार के आधुनिक परमाणु रिएक्टर हैं, जिन्हें फैक्ट्री आधारित मॉड्यूलर तकनीक से तैयार किया जाता है।

SMR की विशेषताएँ

  • स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) पारंपरिक परमाणु रिएक्टरों की तुलना में कम लागत और तेज निर्माण क्षमता वाले आधुनिक रिएक्टर हैं। इन्हें छोटे ग्रिड तथा दूरस्थ क्षेत्रों में आसानी से स्थापित किया जा सकता है। 
  • SMR ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और औद्योगिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी उपयोगी माने जाते हैं। साथ ही, इनमें चरणबद्ध निवेश की सुविधा होने के कारण परियोजनाओं का वित्तीय जोखिम अपेक्षाकृत कम रहता है।

भारत की पहल

  • भारत तीन स्वदेशी SMR डिज़ाइन विकसित कर रहा है।
  • केंद्रीय बजट 2025-26 में SMR अनुसंधान और विकास के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए।
  • 2033 तक पाँच स्वदेशी SMR चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  • भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार के सामने कई प्रमुख चुनौतियाँ मौजूद हैं। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के लिए अलग लाइसेंसिंग व्यवस्था और आधुनिक सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होगी, जिसके लिए नियामकीय सुधार जरूरी हैं। 
  • इसके साथ ही भारत का घरेलू यूरेनियम उत्पादन सीमित होने के कारण ईंधन सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। परमाणु परियोजनाओं के लिए भारी निवेश तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना भी आसान नहीं होगा। 
  • इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर आम जनता के बीच विश्वास और स्वीकार्यता बढ़ाना भी आवश्यक है।

निष्कर्ष

  • परमाणु ऊर्जा भारत की स्वच्छ, स्थिर और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। बढ़ती ऊर्जा मांग, कार्बन उत्सर्जन में कमी और 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में इसकी बड़ी भूमिका होगी।
  • 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लिए भारत को बड़े निवेश, उन्नत तकनीकी नवाचार, मजबूत नियामकीय सुधार, ईंधन सुरक्षा और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही, स्मॉल
  • मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) आधारित नई रणनीति ऊर्जा क्षेत्र में लचीलापन और दक्षता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकती है। यदि सरकार, उद्योग और वैज्ञानिक संस्थान समन्वित रूप से कार्य करें, तो परमाणु ऊर्जा भारत के ‘विकसित भारत 2047’ विजन को मजबूती प्रदान कर सकती है।
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