अफ़ग़ानिस्तान भूकंप 2025

(प्रारंभिक परीक्षा: महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान)

संदर्भ

31 अगस्त, 2025 को अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी भाग में आए भीषण भूकंप के बाद कई बार अफ़ग़ानिस्तान में ‘आफ्टरशॉक’ महसूस किए गए। इससे देश गहरे मानवीय संकट में पहुँच गया है।  

अफ़ग़ानिस्तान में भूकंप आपदा 

  • स्थान : पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान, कुनार प्रांत एवं आसपास का क्षेत्र 
  • तीव्रता : 6.0 (मुख्य भूकंप) और 5.2 (आफ़्टरशॉक 2 दिन बाद तक) 
  • प्रभावित क्षेत्र : कुनार, नंगरहार एवं आसपास के पर्वतीय गांव 
  • उपरिकेंद्र (Epicentre) : मुख्य भूकंप का केंद्र कुनार प्रांत में था।

Epicentre

  • मृतक : 1,400 से अधिक
  • क्षति : हज़ारों घर नष्ट, खासकर मिट्टी व लकड़ी से बने कच्चे घर
  • चेतावनी : विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र पहले से ही भूकंप-प्रवण है तथा आने वाले दिनों में भूकंप के और झटके संभव हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि राहत कार्य कठिन इलाकों में देर से पहुँच रहा है।

अफ़ग़ानिस्तान की भूकंप संवेदनशीलता

  • अफ़ग़ानिस्तान ऐतिहासिक रूप से भूकंप प्रभावित देश है।
  • कच्चे और अस्थायी घर (मिट्टी/लकड़ी) आसानी से गिर जाते हैं।
  • वर्ष 1998, 2002 और 2022 में भी भूकंपों से हज़ारों लोगों की मौत हुई थी।
  • पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्र में सड़क व संचार व्यवस्था कमजोर है जिससे राहत व बचाव कार्य में देरी होती है।

आपदा प्रवणता का कारण  

  • अफ़ग़ानिस्तान का भूभाग यूरोशियन एवं इंडियन टेक्टोनिक प्लेट्स के जंक्शन पर स्थित है।
  • इन प्लेट्स की निरंतर गतिविधियों के कारण यहाँ प्राय: उथले (Shallow) भूकंप आते हैं।
  • उथले भूकंप में ऊर्जा सतह तक जल्दी पहुँचती है जिससे भारी क्षति होती है।

चुनौतियाँ

  • मानवीय संकट : लाखों लोग पहले से ही गरीबी, भूख एवं विस्थापन से जूझ रहे थे।
  • कमज़ोर स्वास्थ्य प्रणाली : दवाओं एवं डॉक्टरों की भारी कमी है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहायता की कमी : तालिबान सरकार की नीतियों के कारण कई देशों ने मदद सीमित कर दी है।
  • भूगोल और मौसम : पहाड़ी रास्ते और टूटी सड़कें बचाव कार्य में बाधा डाल रही हैं।
  • राजनीतिक स्थिति : वैश्विक समुदाय तालिबान सरकार के साथ सीधे काम करने से हिचक रहा है।
  • धार्मिक कारण : घायल महिलाओं व बालिकाओं को परिवार के अतिरिक्त अन्य पुरुषों (राहतकर्मी) के द्वारा स्पर्श करने पर प्रतिबंध से भी बचाव कार्यों में समस्या आ रही है।   

आगे की राह

  • आपातकालीन राहत: अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर मानवीय आधार पर मदद करनी चाहिए।
  • भूकंप-रोधी निर्माण: ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों की जगह मजबूत, किफ़ायती एवं भूकंप-रोधी ढाँचे विकसित करना चाहिए।
  • स्थायी स्वास्थ्य केंद्र: आपदा-प्रवण क्षेत्रों में मोबाइल अस्पताल और त्वरित चिकित्सा इकाइयाँ की पहुँच होनी चाहिए।
  • क्षेत्रीय सहयोग: दक्षिण एवं मध्य एशियाई देशों को आपदा प्रबंधन में साझेदारी की आवश्यकता है।
  • समुदायिक जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों में भूकंप के दौरान सुरक्षित व्यवहार (जैसे Drop-Cover-Hold) संबंधी प्रशिक्षण आवश्यक है।
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