New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 AM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

भारत में एआई-संचालित वित्तीय समावेशन

संदर्भ 

  • भारत में वित्तीय समावेशन अब केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में देश ने डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से वित्तीय सेवाओं को अधिक तेज, सुरक्षित और आसान बनाया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) और एआई के मेल ने भारत के वित्तीय तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है। 
  • आज वित्तीय सेवाएं केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यापारियों, महिलाओं, अनौपचारिक श्रमिकों और पहली बार ऋण लेने वाले लोगों तक भी पहुँच रही हैं। एआई आधारित तकनीकें लोगों के डिजिटल व्यवहार और लेनदेन के आधार पर उनकी वित्तीय जरूरतों को समझने और उन्हें उपयुक्त सेवाएं देने में मदद कर रही हैं। इससे औपचारिक ऋण तक पहुँच आसान हुई है और वित्तीय सुरक्षा भी मजबूत हुई है।  

डिजिटल समाधान से बढ़ी वित्तीय पहुँच 

  • भारत में वित्तीय समावेशन का उद्देश्य हर नागरिक को सस्ती, सुरक्षित और समय पर वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। पिछले एक दशक में डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाया है। 
  • डिजिटल पहचान, ऑनलाइन भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी प्रणालियों ने वित्तीय सेवाओं को सरल और पारदर्शी बनाया है। इन प्रणालियों ने देशभर में लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जेएएम ट्रिनिटी: वित्तीय समावेशन की मजबूत नींव 

  • जन धन, आधार और मोबाइल यानी जेएएम ट्रिनिटी ने भारत में डिजिटल वित्तीय समावेशन की आधारशिला तैयार की।
  • जन धन योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुले। आधार ने लोगों को एक सुरक्षित डिजिटल पहचान दी और मोबाइल कनेक्टिविटी ने वित्तीय सेवाओं को सीधे लोगों तक पहुँचाया है।
  • मार्च 2026 तक देश में 144 करोड़ से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं। वहीं, जन धन खातों की संख्या बढ़कर 58.16 करोड़ हो गई है, जिनमें लगभग 3.02 लाख करोड़ रुपये जमा हैं।
  • मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार ने भी इस व्यवस्था को मजबूत किया है। देश के लगभग 85 प्रतिशत लोगों तक 5जी सेवाओं सहित मोबाइल नेटवर्क पहुँच चुका है। 

यूपीआई ने बदल दी डिजिटल भुगतान की तस्वीर 

  • यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत में डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बना दिया है। अब मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में पैसे भेजना और प्राप्त करना संभव हो गया है।
  • मार्च 2026 में यूपीआई के माध्यम से 2,264 करोड़ से अधिक लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 29.53 लाख करोड़ रुपये रही। 
  • आज यूपीआई भारत के खुदरा डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है और छोटे व्यापारियों से लेकर आम नागरिकों तक सभी इसका उपयोग कर रहे हैं।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से बढ़ी पारदर्शिता 

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे लोगों के बैंक खातों में पहुँचाने का रास्ता तैयार किया है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और भ्रष्टाचार तथा फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगी है।  
  • जनवरी 2026 तक सरकार लगभग 49.09 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेज चुकी है। इस प्रणाली से सरकार को 4.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत भी हुई है।  

वित्तीय सेवाओं में एआई की बढ़ती भूमिका 

  • अब एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एआई की मदद से ग्राहक सेवाएं बेहतर हो रही हैं, जोखिम का आकलन आसान हो रहा है और धोखाधड़ी रोकने में सहायता मिल रही है।
  • सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक भी एआई आधारित वित्तीय सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रहे हैं।

भाषिनी: भारतीय भाषाओं में बैंकिंग सेवाएं 

  • फरवरी 2026 में डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन और भारतीय रिजर्व बैंक ने मिलकर बैंकिंग सेवाओं को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के लिए सहयोग शुरू किया।  
  • इस पहल का उद्देश्य देश की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि भाषा और साक्षरता की बाधाएं कम हो सकें। 
  • बैंकिंग भाषिणी नामक मॉडल बैंकिंग शब्दावली और वित्तीय जानकारी को आसान भाषा में लोगों तक पहुँचाने में मदद करेगा। 

आरबीआई का नियामकीय सैंडबॉक्स 

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने फिनटेक और नई तकनीकों को सुरक्षित वातावरण में परखने के लिए नियामकीय सैंडबॉक्स की व्यवस्था शुरू की है।
  • इसके माध्यम से बैंक और स्टार्टअप डिजिटल केवाईसी, साइबर सुरक्षा और नई वित्तीय सेवाओं का परीक्षण कर सकते हैं। इससे नई तकनीकों को सुरक्षित तरीके से लागू करने में मदद मिलती है। 

MuleHunter.AI: साइबर अपराध पर निगरानी 

  • रिजर्व बैंक इनोवेशन हब द्वारा विकसित MuleHunter.AI एक एआई आधारित प्रणाली है, जो संदिग्ध बैंक खातों की पहचान करने में मदद करती है।
  • यह तकनीक रियल टाइम में लेनदेन का विश्लेषण कर मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध जैसी गतिविधियों का पता लगाती है। 

डिजिटल श्रम सेतु: अनौपचारिक श्रमिकों के लिए नई पहल 

  • डिजिटल श्रमसेतु का उद्देश्य देश के करोड़ों अनौपचारिक श्रमिकों को डिजिटल और वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है।
  • यह पहल एआई, ब्लॉकचेन और डिजिटल लर्निंग की मदद से श्रमिकों को कौशल विकास, वित्तीय सुरक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करती है। 

एआई आधारित क्रेडिट स्कोरिंग से आसान हुआ ऋण 

  • पहले ऋण लेने के लिए पारंपरिक क्रेडिट इतिहास जरूरी माना जाता था। इससे छोटे व्यापारियों, ग्रामीण लोगों और पहली बार ऋण लेने वालों को कठिनाई होती थी।
  • अब एआई आधारित प्रणालियां डिजिटल भुगतान, जीएसटी रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल डेटा के आधार पर लोगों की ऋण क्षमता का आकलन कर रही हैं। इससे लाखों लोगों के लिए औपचारिक ऋण तक पहुँच आसान हुई है।  

यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) 

  • यूएलआई एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो विभिन्न वित्तीय और गैर-वित्तीय डेटा स्रोतों को जोड़कर ऋण प्रक्रिया को आसान बनाता है।
  • दिसंबर 2025 तक 64 वित्तीय संस्थान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके थे। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी ऋण सेवाओं का विस्तार हो रहा है। 

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क

  • अकाउंट एग्रीगेटर प्रणाली लोगों को अपने वित्तीय डेटा को सुरक्षित तरीके से साझा करने की सुविधा देती है।
  • इससे ऋण लेने की प्रक्रिया तेज हुई है और दस्तावेजों की जरूरत कम हुई है। दिसंबर 2025 तक 25 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता इस प्रणाली से जुड़ चुके थे। 

निष्कर्ष 

  • भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा अब डिजिटल और एआई आधारित मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई और डेटा आधारित प्रणालियाँ वित्तीय सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समावेशी बना रही हैं। 
  • सरकार, नियामकों, बैंकों और फिनटेक कंपनियों के संयुक्त प्रयासों से ऐसा वित्तीय इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। 
  • विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एआई आधारित वित्तीय समावेशन भारत की आर्थिक प्रगति और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR