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अम्बाजी संगमरमर को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग

हाल ही में, गुजरात के प्रसिद्ध तीर्थस्थल एवं शक्तिपीठ अम्बाजी का सफेद संगमरमर को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। 

हालिया निर्णय 

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री ने बनासकांठा जिले की अम्बाजी मार्बल खदान एवं कारखाना संघ के नाम पर यह टैग प्रदान किया है।
  • यह टैग इस उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति से जुड़ी विशिष्ट गुणवत्ता को मान्यता देता है जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था एवं सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करता है।

GI टैग का महत्व

  • GI टैग उत्पाद को वैश्विक पहचान प्रदान करता है तथा नकली उत्पादों से सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह स्थानीय कारीगरों एवं खननकर्ताओं की आय बढ़ाने में सहायक होता है।
  • भारत में अब तक 600+ उत्पादों को GI टैग प्राप्त हो चुका है जिसमें गुजरात के लगभग 25 उत्पाद शामिल हैं (जैसे- घरचोला, कच्छ की कढ़ाई, नवसारी के अमलसाड चीकू आदि)।
    • उत्तर प्रदेश GI-टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या में अग्रणी राज्य है।

अम्बाजी संगमरमर की विशेषताएँ

  • इसमें उच्च चमक, सफेदी एवं टिकाऊपन होता है। इसमें उच्च कैल्शियम सामग्री होती है। इसे माउंट आबू के दिलवाड़ा जैन मंदिर (1200-1500 वर्ष पुराना) में प्रयुक्त किया गया है। 
  • यह संगमरमर ताजमहल की तुलना में अधिक टिकाऊ लगता है क्योंकि ताजमहल के पत्थरों (संगमरमर) में पुराने होने के लक्षण दिखते हैं जबकि दिलवाड़ा जैन मंदिर में लगी अम्बाजी संगमरमर की शुद्धता बरकरार है।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, न्यूजीलैंड एवं इंग्लैंड के मंदिरों में भी प्रयुक्त किया गया है। इसका आध्यात्मिक महत्व भी है और अम्बाजी शक्तिपीठ से जुड़ा होने के कारण इसे धार्मिक निर्माणों में प्राथमिकता दी जाती है।
  • हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि इस पत्थर में सिलिकॉन ऑक्साइड और कैल्शियम ऑक्साइड मौजूद हैं।

आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव

  • स्थानीय उद्योग को बढ़ावा: बनासकांठा में हजारों खननकर्ता एवं कारीगर को लाभ
  • निर्यात संभावना: अमेरिका, यूरोप एवं मध्य पूर्व में मांग वृद्धि की संभावना 
  • पर्यटन संवर्धन: अम्बाजी तीर्थयात्रा के साथ औद्योगिक पर्यटन को प्रोत्साहन
  • अर्थव्यवस्था: GI टैग → MSME संवर्धन, आत्मनिर्भर भारत
  • संस्कृति: धार्मिक स्थलों में उपयोग → सांस्कृतिक विरासत संरक्षण 

चुनौतियाँ

  • अवैध खनन पर नियंत्रण की समस्या 
  • पर्यावरण संरक्षण एवं खनन से जैव-विविधता पर प्रभाव
  • ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग की आवश्यकता 
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