संदर्भ
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अटल पेंशन योजना (APY) को वित्त वर्ष 2030–31 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही योजना के आउटरीच विस्तार, प्रशासनिक विकास तथा अंतर निधि (gap funding) के लिए अतिरिक्त संसाधनों को भी स्वीकृति दी गई है।
अटल पेंशन योजना (APY) के बारे में
- अटल पेंशन योजना एक सरकार समर्थित, स्वैच्छिक और अंशदान आधारित पेंशन योजना है, जिसका उद्देश्य नागरिकों—विशेषकर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों—को 60 वर्ष की आयु के बाद सुनिश्चित मासिक पेंशन प्रदान करना है।
- इस योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को की गई थी।
कार्यान्वयन एवं संस्थागत ढांचा
- योजना का प्रशासन पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा किया जाता है।
- इसका क्रियान्वयन देशभर में बैंकों और डाकघरों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है, जिससे इसकी पहुंच ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक हो सके।
उद्देश्य
- गरीब, वंचित तथा असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करना।
- नागरिकों को दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति बचत के लिए प्रोत्साहित कर वित्तीय समावेशन को मजबूत करना।
प्रमुख विशेषताएं
- गारंटीकृत मासिक पेंशन: 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 प्रति माह।
- पात्रता: 18 से 40 वर्ष आयु के भारतीय नागरिक, जिनके पास बचत बैंक या डाकघर खाता हो।
- अंशदान आधारित संरचना: निर्धारित राशि का मासिक/त्रैमासिक/अर्धवार्षिक स्वतः डेबिट, जो 60 वर्ष की आयु तक जारी रहता है।
- परिवारिक सुरक्षा: सदस्य की मृत्यु के पश्चात पति/पत्नी को समान पेंशन तथा बाद में संचित राशि नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) को वापस की जाती है।
- करदाता प्रतिबंध: 1 अक्टूबर 2022 के बाद आयकरदाता नए नामांकन के लिए पात्र नहीं हैं।
- निवेश प्रबंधन: अंशदान राशि PFRDA द्वारा अनुमोदित पेंशन फंडों के माध्यम से निवेश की जाती है।
महत्व
- यह योजना करोड़ों असंगठित श्रमिकों को वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सम्मानजनक जीवन प्रदान करती है।
- अटल पेंशन योजना भारत में पेंशन आधारित सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है और वित्तीय समावेशन को व्यापक आधार प्रदान करती है।
- दीर्घकाल में यह योजना कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को सुदृढ़ करने और वृद्धावस्था गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।