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ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच 4.0

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास)

संदर्भ 

हाल ही में, गुजरात के पहले बाजवा (वडोदरा)-अहमदाबाद सेक्शन (96 किमी.) में कवच 4.0 को सफलतापूर्वक शुरू किया गया है। 

कवच 4.0 के बारे में 

  • इस परियोजना के दायरे में 17 स्टेशन आते हैं और इसमें सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा तैयार किया गया है जिसमें 23 टावर, 20 कवच भवन/हट, 192 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल और 2,872 आर.एफ.आई.डी. (RFID) टैग्स शामिल है।
  • इस मार्ग पर कवच प्रणाली से लैस पहली ट्रेन संकल्प फास्ट पैसेंजर (59549/59550) थी।
  • इसका संचालन डब्ल्यूएपी-7 लोकोमोटिव (इंजन) और 11 एल.एच.बी. कोचों के साथ किया गया।  

प्रमुख विशेषताएँ

  • इसे सुरक्षा जोखिमों को स्वतः कम करने के लिए डिजाइन किया गया है जो सिग्नल पास्ड एट डेंजर (SPAD) जैसी स्थितियों के परिणामों को रोकता है। 
  • यह सिस्टम सेक्शनल स्पीड, लूप लाइन एवं स्थायी गति प्रतिबंधों (PSRs) की निगरानी करते हुए स्वचालित गति नियंत्रण सुनिश्चित करता है। 
  • यह ट्रेनों की आमने-सामने और पीछे से होने वाली टक्करों से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • इसकी अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाओं में आपातकालीन एसओएस सुविधा और लेवल क्रॉसिंग गेटों पर स्वचालित व्हिसलिंग शामिल है। 
  • अब तक 2,200 मार्ग किलोमीटर से अधिक के रेल नेटवर्क पर कवच प्रणाली को लागू किया जा चुका है।

कवच 4.0 के तहत किये गए सुधार 

  • बेहतर लोकेशन सटीकता से ट्रेन की सटीक स्थिति का पता लगाना संभव हो पाता है।
  • बड़े व जटिल स्टेशन यार्डों में सिग्नल की स्थिति की अधिक स्पष्ट एवं सटीक जानकारी प्रदान करता है। 
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से स्टेशन-टू-स्टेशन कवच इंटरफेस अधिक तेज और विश्वसनीय संचार सुनिश्चित करता है।
  • मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटीग्रेशन से वर्तमान सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे के साथ निर्बाध समन्वय सुनिश्चित होता है। 

कवच के बारे में 

  • भारतीय रेलवे द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन) प्रणाली है जिसे ऑपरेशनल सेफ्टी का उच्चतम स्तर प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। 
  • यह एक अत्यधिक टेक्नोलॉजी-इंटेंसिव सिस्टम है जिसे सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (SIL-4) प्रमाणित किया गया है। 
  • यह सिग्नलिंग प्रणालियों में उच्चतम सुरक्षा मानकों में से एक है जो विश्व स्तरीय सुरक्षा एवं विश्वसनीयता के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • ‘कवच’ निर्धारित गति सीमा से अधिक होने या सुरक्षा खतरा होने की स्थिति में स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर लोको पायलटों की सहायता करता है। इस प्रकार यह दुर्घटनाओं को रोकने और खराब मौसम की स्थिति में भी सुरक्षित ट्रेन परिचालन को बढ़ावा देने में मदद करता है। 
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