New
Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 4th May 2026, 5:30PM Civil Services Day Offer - Valid Till : 23rd April GS Foundation (P+M) - Delhi : 4th May 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 4th May 2026, 5:30PM

बंजारा समुदाय

महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठों को दस्तावेज़ी प्रमाणों के साथ कुनबी प्रमाण पत्र प्राप्त जारी करने के निर्णय के बाद बंजारा समुदाय ने अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribes: ST) के दर्जे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रमुख मुद्दा 

  • महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों, जैसे- बुलढाणा, यवतमाल एवं अमरावती में इस समुदाय की अच्छी आबादी है।
  • बंजारों को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं ओडिशा में एस.टी. का दर्जा प्रदान किया गया है जबकि कर्नाटक में उन्हें अनुसूचित जाति (Schedule Caste: SC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 
    • महाराष्ट्र में यह समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूची में शामिल है।
  • 1930 के दशक में बंजारा को पंजाब, मध्य प्रांत, बरार एवं मैसूर प्रांत की जनजातियों की सूची में शामिल किया गया था।
    • 1920 के हैदराबाद गजट में इन्हें जनजाति के रूप में संदर्भित किया गया है। 
  • इस समुदाय का मानना है कि मंडल आयोग के बाद के दौर में गलत व्याख्या एवं प्रतिनिधित्व की कमी के कारण बंजारा समुदाय को महाराष्ट्र में ओ.बी.सी. सूची में शामिल कर दिया गया।

बंजारा समुदाय के बारे में 

  • यह एक स्वदेशी एवं लोकप्रिय जनजाति है जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों ‘गोर, गौर बंजारा, लामन, लंबानी, लंबाडी, गौर राजपूत, नायक, बलदिया एवं गौरिया’ से भी जाना जाता है। 
  • वितरण : ये मुख्यत: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल राज्यों में वितरित हैं। 
    • ये उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में निवास करते हैं।
  • भाषा : बंजारे गौर बोली बोलते हैं; जिसे लंबाड़ी, बंजारी भी कहा जाता है। यह इंडो-आर्यन भाषा समूह से संबंधित है।
    • उनके पास मौखिक साहित्य और परंपराएं हैं किंतु उनकी भाषा के लिए लिपि नहीं होने के कारण उनके पास कोई लिखित साहित्य नहीं है।
  • आर्थिक गतिविधियाँ : पशुपालक एवं व्यापारी 
  • धर्म : हिंदू धर्म 
  • कला : संदूर लम्बानी कढ़ाई एक प्रकार की वस्त्र कढ़ाई है जो कर्नाटक के बेल्लारी जिले के संदूर में रहने वाली इस जनजाति के लिए विशिष्ट है। इसे जीआई टैग प्राप्त है।
  • नृत्य : अग्नि नृत्य, घूमर नृत्य और चरी नृत्य बंजारों के पारंपरिक नृत्य हैं।
  • ब्रिटिश काल में इसे एक निर्दिष्ट आपराधिक जनजाति का दर्जा प्रदान किया गया था तथा आज़ादी के बाद विमुक्त जनजातियों में से एक के रूप में वर्गीकृत किया गया।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR