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बैटरी पैक आधार नंबर (BPAN)

(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास)

संदर्भ 

  • भारत में तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक पारदर्शी, टिकाऊ व नियामक रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक महत्वपूर्ण पहल का प्रस्ताव रखा है। 
  • इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयोग होने वाली बैटरियों के लिए आधार-जैसी विशिष्ट पहचान प्रणाली लागू करने की योजना बनाई गई है जिसे बैटरी पैक आधार नंबर (BPAN) कहा जा रहा है। 
  • यह प्रस्तावित व्यवस्था बैटरियों के पूरे जीवनचक्र की निगरानी को संभव बनाएगी जिसमें उत्पादन से लेकर उपयोग, पुनर्चक्रण एवं अंतिम निपटान तक शामिल हैं। 

क्या है बी.पी.ए.एन. 

  • बैटरी पैक आधार नंबर (BPAN) 21-अंकों/अक्षरों की एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी जिसे भारतीय बाजार में प्रस्तुत किए जाने वाले प्रत्येक बैटरी पैक को दिया जाएगा, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों को।
  • यह संख्या बैटरी की डिजिटल पहचान के रूप में कार्य करेगी, जिससे उसके निर्माण, उपयोग एवं अंततः पुनर्चक्रण या निपटान तक की पूरी यात्रा को ट्रैक किया जा सकेगा। 
  • इस प्रणाली को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड कमेटी (AISC) के तहत ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (AIS) मार्ग के माध्यम से औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा। 

उद्देश्य 

  • बैटरियों के पूरे जीवनचक्र में पूर्ण ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना
  • पुनर्चक्रण, द्वितीयक उपयोग (सेकेंड-लाइफ एप्लिकेशन) और सुरक्षित निपटान को प्रोत्साहन देना
  • बैटरी पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना

बी.पी.ए.एन. की प्रमुख विशेषताएँ 

  • अनिवार्य विशिष्ट पहचान: प्रत्येक बैटरी निर्माता या आयातक को बेची या उपयोग में लाई जाने वाली हर बैटरी के लिए एक अलग बी.पी.ए.एन. जारी करना होगा।
  • जीवनचक्र आधारित डेटा ट्रैकिंग: कच्चे माल की सोर्सिंग, निर्माण प्रक्रिया, उपयोग की अवधि, प्रदर्शन, पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण एवं अंतिम निपटान से जुड़ा डेटा दर्ज किया जाएगा।
  • गतिशील अद्यतन प्रणाली: बैटरी में किसी भी बड़े तकनीकी या संरचनात्मक बदलाव की स्थिति में नया बी.पी.ए.एन. जारी करना अनिवार्य होगा।
  • टिकाऊ एवं स्पष्ट चिह्नांकन: बी.पी.ए.एन. को बैटरी पर ऐसी जगह अंकित किया जाएगा जहाँ उसे आसानी से हटाया, मिटाया या क्षतिग्रस्त न किया जा सके।
  • डिजिटल पोर्टल से एकीकरण: उत्पादकों और आयातकों को बैटरी से जुड़ी सभी जानकारियाँ आधिकारिक बी.पी.ए.एन. पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।
  • ई.वी. बैटरियों को प्राथमिकता: भारत की कुल लिथियम-आयन बैटरी मांग का लगभग 80–90% हिस्सा ई.वी. बैटरियों का है, इसलिए इन्हें पहले चरण में शामिल किया जाएगा। साथ ही, 2 किलोवाट-घंटे से अधिक क्षमता वाली औद्योगिक बैटरियों को भी इस दायरे में लाने की सिफारिश की गई है। 

महत्व 

  • यह पहल बैटरियों के संगठित पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को संभव बनाएगी।
  • लिथियम-आयन बैटरियों के अनुचित निपटान से होने वाले पर्यावरणीय और सुरक्षा जोखिमों को कम करेगी।
  • विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) के प्रभावी क्रियान्वयन को मज़बूती प्रदान करेगी।
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