1 अक्टूबर से यूपीआई में बड़ा बदलाव: ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ सेवा बंद

चर्चा में क्यों ?

  • नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का यह कदम यूपीआई नेटवर्क को धोखाधड़ी से बचाने के लिए अहम माना जा रहा है। 
  • ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट सुविधा' का दुरुपयोग कर कई उपयोगकर्ताओं को अनजाने में भुगतान करने के लिए फंसाया जाता रहा है। 
  • इस फैसले से उपयोगकर्ता स्वयं लेनदेन शुरू करेंगे, जिससे उनका नियंत्रण बढ़ेगा और फ्रॉड की संभावना कम होगी। 
  • डिजिटल भुगतान सुरक्षा, भरोसे और पारदर्शिता के दृष्टिकोण से यह परिवर्तन चर्चा में है।

मुख्य हेडलाइंस और विवरण:

  1. ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट क्या है ?
    1. यह यूपीआई का वह फीचर है जिसमें कोई उपयोगकर्ता दूसरे को भुगतान अनुरोध भेज सकता है।
    2. पुल ट्रांजैक्शन कहलाने वाला यह तरीका कई बार धोखाधड़ी का कारण बन चुका है।
    3. वर्तमान में प्रति लेनदेन सीमा ₹2,000 और अधिकतम 50 लेनदेन प्रतिदिन की अनुमति थी।
  2. 1 अक्टूबर 2025 से क्या बदलेगा ?
    1. सभी बैंक और यूपीआई ऐप्स (फोनपे, गूगल पे, पेटीएम) में पी2पी ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट' पूरी तरह बंद।
    2. अब केवल भुगतानकर्ता-प्रारंभ (Push) लेनदेन ही मान्य होंगे।
    3. उपयोगकर्ताओं को लेनदेन करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन या प्राप्तकर्ता का विवरण दर्ज करना होगा।
  3. एनपीसीआई ने यह कदम क्यों उठाया ?
    1. बढ़ते यूपीआई फ्रॉड और कलेक्ट रिक्वेस्ट के दुरुपयोग को रोकने के लिए।
    2. पुराने कैप (2019) के बावजूद फ्रॉड जारी रहने के कारण इसे पूर्ण रूप से हटाना जरूरी।
    3. उद्योग जगत ने इसे सुरक्षित और भरोसेमंद कदम के रूप में स्वीकार किया।
  4. विशेषज्ञों की राय:
    1. राहुल जैन (सीएफओ, NTT डेटा पेमेंट्स इंडिया): “यह फीचर हटाने से यूपीआई और सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगा।”
    2. रीजू दत्ता (सह-संस्थापक, कैशफ्री पेमेंट्स): “यह बदलाव लंबे समय से दुरुपयोग किए जा रहे loophole को बंद करता है और उपयोगकर्ताओं का भरोसा मजबूत करता है।”
  5. डिजिटल भुगतान प्रणाली पर व्यापक प्रभाव:
    1. उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और भरोसे को बढ़ावा मिलेगा।
    2. यूपीआई और सीबीडीसी के एकीकरण में सहायक कदम।
    3. भारत के वैश्विक स्तर पर सुरक्षित, समावेशी और स्केलेबल फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के लक्ष्य से मेल।

प्रश्न :-NPCI ने ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ सुविधा बंद करने का मुख्य कारण क्या बताया है ?

(a) लेनदेन की गति बढ़ाना

(b) यूपीआई नेटवर्क पर धोखाधड़ी रोकना

(c) मोबाइल ऐप्स की संख्या बढ़ाना

(d) बैंक शुल्क कम करना

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