(प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 व 3: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास व प्रबंधन से संबंधित विषय; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी) |
संदर्भ
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में देश की पहली राज्य-वित्तपोषित बायो-सेफ्टी लेवल–4 (BSL-4) कंटेनमेंट प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। उन्होंने इसे राष्ट्र के लिए एक ‘स्वास्थ्य कवच’ बताते हुए कहा कि यह पहल भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा और जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी।
BSL-4 सुविधा का परिचय
- बायो-सेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला जैविक सुरक्षा का सर्वोच्च स्तर होती है जिसे अत्यंत खतरनाक एवं तीव्र संक्रामक रोगजनकों के सुरक्षित अध्ययन के लिए विकसित किया जाता है।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित कड़े सुरक्षा मानकों के अंतर्गत संचालित ये प्रयोगशालाएँ घातक बीमारियों पर उच्चस्तरीय अनुसंधान, जैसे- परीक्षण विधियाँ, टीकों व उपचारों का विकास के साथ-साथ त्वरित रोग प्रकोप जांच व प्रतिक्रिया को संभव बनाती हैं।
- गांधीनगर में प्रस्तावित भारत की यह नई BSL-4 प्रयोगशाला, एनिमल बायो-सेफ्टी लेवल (ABSL) सुविधा के साथ मिलकर, अत्यंत घातक रोगजनकों पर अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिसंपत्ति सिद्ध होगी। यह पहल देश की जैव-सुरक्षा और महामारी से निपटने की तैयारियों को अधिक मजबूत बनाएगी।
गुजरात की राज्य-वित्तपोषित BSL-4 प्रयोगशाला
- गुजरात के गांधीनगर में विकसित की जा रही यह BSL-4 प्रयोगशाला भारत की पहली पूर्णतः राज्य-वित्तपोषित एवं राज्य-नियंत्रित BSL-4 सुविधा होगी। साथ ही, यह देश की दूसरी नागरिक BSL-4 अनुसंधान प्रयोगशाला भी होगी।
- लगभग 11,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹362 करोड़ है जिसे गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है।
संस्थागत व्यवस्था और समय-सीमा
- यह उच्च-सुरक्षा सुविधा गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर के अधीन संचालित की जाएगी, जहाँ पहले से BSL-2+ प्रयोगशाला मौजूद है। कोविड-19 महामारी के दौरान इसी संस्थान ने SARS-CoV-2 वायरस के जीनोम अनुक्रमण में अहम भूमिका निभाई थी।
- BSL-4 प्रयोगशाला की योजना वर्ष 2022 के मध्य में बनाई गई थी जबकि इसकी आधारशिला 13 जनवरी 2026 को रखी गई।
अवसंरचना एवं सुरक्षा मानक
- इस परिसर में BSL-4, BSL-3, BSL-2, ABSL-4 तथा ABSL-3 श्रेणी की प्रयोगशालाओं के साथ अत्याधुनिक सहायक प्रणालियाँ व उपयोगिताएँ विकसित की जाएँगी।
- सम्पूर्ण परियोजना को CDC, NIH, जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
रोग नियंत्रण और वैक्सीन अनुसंधान में योगदान
- यह प्रयोगशाला गुजरात सहित पूरे देश को घातक मानव रोगों और ज़ूनोटिक संक्रमणों के प्रकोपों पर त्वरित व प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाएगी।
- यह उन्नत निदान तकनीकों, टीकों एवं उपचारों के अनुसंधान को भी प्रोत्साहन देगी।
- ABSL-4 इकाई के माध्यम से पशु रोगों पर शोध और पशुओं से प्राप्त एंटीबॉडी के उपयोग से वैक्सीन निर्माण संभव होगा। यह कार्य पहले ICAR–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिज़ीज़ेज़ को भेजे गए नमूनों पर निर्भर था।
- जैव-प्रौद्योगिकी विभाग ने इस प्रयोगशाला को राष्ट्रीय सुविधा का दर्जा देने हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं जिससे देशभर के अग्रणी विशेषज्ञ संस्थानों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। यह सुविधा भारत में BSL-4 अवसंरचना की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
भारत में वर्तमान BSL-4 एवं ABSL-4 सुविधाएँ
- नागरिक BSL-4 प्रयोगशालाएँ : वर्तमान में भारत में केवल एक कार्यशील नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला है जो महाराष्ट्र के पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) में कार्यरत है और अत्यंत खतरनाक मानव रोगजनकों पर अनुसंधान करती है।
- रक्षा क्षेत्र की BSL-4 सुविधा : वर्ष 2024 के अंत में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक BSL-4 प्रयोगशाला स्थापित की, जिससे देश की उच्च-कंटेनमेंट अनुसंधान क्षमता में वृद्धि हुई।
उच्च-सुरक्षा पशु रोग अनुसंधान प्रयोगशालाएँ
- भारत में उच्च-जोखिम ज़ूनोटिक रोगों के अध्ययन हेतु दो प्रमुख संस्थान कार्यरत हैं:
- भोपाल स्थित ICAR–नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिज़ीज़ेज़, जो वर्तमान में ABSL-3+ श्रेणी में है और जिसे जून 2025 में ABSL-4 स्तर तक उन्नत करने की योजना घोषित की गई।
- भुवनेश्वर (ओडिशा) स्थित ICAR–इंटरनेशनल सेंटर फॉर फुट एंड माउथ डिज़ीज़, जो ABSL-3Ag मानक के अनुसार संचालित होता है।
वैश्विक परिदृश्य
अधिकारियों के अनुसार, विश्व भर में लगभग 69 BSL-4 प्रयोगशालाएँ या तो कार्यरत हैं या निर्माणाधीन हैं जो उच्च-सुरक्षा जैविक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की सीमित किंतु क्रमशः बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
भारत का विस्तारित जैव-सुरक्षा प्रयोगशाला ढाँचा
- मार्च 2025 तक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने VRDL योजना के तहत कुल 165 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाओं को स्वीकृति प्रदान की है।
- इनमें 154 BSL-2 व 11 BSL-3 प्रयोगशालाएँ शामिल हैं जिनका उद्देश्य महामारी से निपटने और आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।
- ICMR द्वारा स्थापित सुविधाएँ : VRDL नेटवर्क के अतिरिक्त ICMR ने अपने विभिन्न संस्थानों में 21 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाएँ विकसित की हैं जिनमें 1 BSL-4, 8 BSL-3 एवं 12 BSL-2 शामिल हैं।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समर्थित प्रयोगशालाएँ : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन ने IRHPA कार्यक्रम के माध्यम से 5 BSL/ABSL-3 प्रयोगशालाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की है।
जैव-प्रौद्योगिकी, कृषि एवं औद्योगिक अनुसंधान
- जैव-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 26 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 9 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाओं की स्थापना की है।
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने अपने संस्थानों में 11 जैव-सुरक्षा प्रयोगशालाएँ विकसित की हैं।
समग्र दृष्टिकोण
ये सभी प्रयास मिलकर भारत में जैव-सुरक्षा अवसंरचना के व्यापक विस्तार को प्रदर्शित करते हैं जहाँ BSL-2 एवं BSL-3 क्षमताएँ आधार के रूप में कार्य कर रही हैं और उच्च-कंटेनमेंट प्रयोगशालाओं में लक्षित निवेश के माध्यम से संक्रामक रोगों से निपटने की राष्ट्रीय तैयारियों को सुदृढ़ किया जा रहा है।