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ब्लैक बॉक्स: विशेषताएँ एवं महत्त्व

(प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स)

संदर्भ 

12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना में ब्लैक बॉक्स की जानकारी से जांचकर्ताओं को दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में काफी मदद मिलेगी।

ब्लैक बॉक्स के बारे में

  • क्या है : यह बॉक्स हवाई जहाज में दो बड़े धातु के डिब्बों में रखे गए रिकॉर्डर होते हैं, जो उड़ान की जानकारी संग्रहित करते हैं।
  • एक बॉक्स केबिन के आगे एवं दूसरा पीछे स्थित होता है।
  • ये बॉक्स उड़ान के दौरान होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं को रिकॉर्ड करते हैं जिससे दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाने में मदद मिलती है।
  • पृष्ठभूमि : इस बॉक्स का अविष्कार एक ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक डेविड वॉरेन ने 1950 के दशक में किया था। उस समय विमान दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाने में काफी कठिनाई होती थी।
  • पहले ब्लैक बॉक्स में डाटा वायर या फॉयल पर रिकॉर्ड होता था किंतु अब मैग्नेटिक टेप एवं सॉलिड-स्टेट मेमोरी चिप्स का उपयोग होता है।
  • प्रमुख रिकॉर्डर्स
    • कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) : यह कॉकपिट में होने वाले संवाद, रेडियो ट्रांसमिशन एवं इंजन की आवाज़ों को रिकॉर्ड करता है।
    • फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (FDR) : यह 80 से अधिक प्रकार की जानकारी रिकॉर्ड करता है, जैसे- उड़ान की ऊंचाई, गति, दिशा, आटो पायलट की स्थिति आदि।

FDR

प्रमुख विशेषताएँ

  • ब्लैक बॉक्स का रंग चमकीला नारंगी (Orange) होता है ताकि दुर्घटनास्थल पर इसे आसानी से खोजा जा सके।
  • यह बेहद मजबूत सामग्री, जैसे- स्टील या टाइटेनियम से बना होता है, ताकि दुर्घटना के दौरान उच्च तापमान, ठंड या नमी से सुरक्षित रहे।
  • प्रत्येक ब्लैक बॉक्स का वजन लगभग 4.5 किग्रा. होता है।
  • ब्लैक बॉक्स में एक बीकन होता है जो पानी में डूबने पर 30 दिनों तक अल्ट्रासोनिक संकेत भेजता है।
  • आधुनिक ब्लैक बॉक्स में सॉलिड-स्टेट मेमोरी चिप्स का उपयोग होता है जो पुराने वायर या टेप की तुलना में अधिक डाटा संग्रहित करते हैं।

डाटा रिकवरी एवं विश्लेषण

  • ब्लैक बॉक्स से डाटा रिकवर करने में 10-15 दिन का समय लगता है।
  • जांचकर्ता अन्य सबूतों को भी देखते हैं (जैसे- एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलटों के बीच बातचीत) जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि पायलट आपातकालीन स्थिति को महसूस कर रहे थे या नहीं।

महत्त्व

  • इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी जिम्मेदारी तय करना नहीं बल्कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों को समझना है।
  • यह विमान सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान करता है और भविष्य की दुर्घटनाओं से बचने में मदद करता है।
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