संदर्भ
हाल ही में, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) में विश्व की दूसरी राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला (NESL) और सौर सेल अंशांकन के लिए विश्व की पाँचवीं राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सुविधा का उद्घाटन किया गया।
राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला के बारे में
- राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला भारत की एक सर्वोच्च राष्ट्रीय सुविधा है, जो भारतीय जलवायु और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों के परीक्षण, अंशांकन और प्रमाणीकरण में विशेषज्ञता रखती है।
- स्थान: नई दिल्ली, सीएसआईआर-एनपीएल
- संबंधित संगठन: वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)
उद्देश्य
- विशिष्ट मानकों के माध्यम से वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों की सटीकता सुनिश्चित करना
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जैसे प्रदूषण नियंत्रण नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन में सहयोग करना
प्रमुख विशेषताएँ
- भारतीय जलवायु परिस्थितियों—तापमान, आर्द्रता, धूल का भार—के तहत उपकरणों का अंशांकन और परीक्षण
- पर्यावरणीय डेटा की सटीकता और मानकीकरण सुनिश्चित करना
- घरेलू विनिर्माण, स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) तथा नियामकों का समर्थन
- वर्तमान में केवल ब्रिटेन और भारत में ही इस तरह की राष्ट्रीय स्तर की सुविधा मौजूद है।
सौर सेल अंशांकन के लिए राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सुविधा केंद्र के बारे में
- नेशनल प्राइमरी स्टैंडर्ड फैसिलिटी सोलर सेल कैलिब्रेशन के लिए एक अत्याधुनिक मेट्रोलॉजी (मापन विज्ञान) सुविधा है।
- इसका उद्देश्य वैश्विक फोटोवोल्टाइक (PV) मानकों के अनुसार सटीक माप सुनिश्चित करना है ताकि भारत एवं विश्व में सौर ऊर्जा उपकरणों की गुणवत्ता व प्रदर्शन विश्वसनीय हो।
- स्थान: नई दिल्ली, सी.एस.आई.आर.-एन.पी.एल.
प्रमुख विशेषताएँ
- लेजर-आधारित डिफरेंशियल स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्सिविटी (L-DSR) प्रणाली का उपयोग, जो अत्यंत सटीक मापन सुनिश्चित करती है।
- जर्मनी के फिज़िकलिश-टेक्निश बुंडेसनस्टाल्ट (PTB) के सहयोग से विकसित
- विश्व में ऐसी सुविधा केवल पाँचवीं बार स्थापित की गई है।
सी.एस.आई.आर. के बारे में
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) एक समकालीन अनुसंधान व विकास संगठन है जो विविध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अपने अत्याधुनिक अनुसंधान तथा विकास ज्ञान आधार के लिए जाना जाता है।
- सी.एस.आई.आर. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यापक क्षेत्र को कवर करता है- समुद्र विज्ञान, भू-भौतिकी, रसायन, औषधि, जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी व नैनो प्रौद्योगिकी से लेकर खनन, वैमानिकी, उपकरण, पर्यावरण इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी तक।
- यह सामाजिक प्रयासों से संबंधित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण तकनीकी हस्तक्षेप प्रदान करता है जिसमें पर्यावरण, स्वास्थ्य, पेयजल, भोजन, आवास, ऊर्जा, कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र शामिल हैं।