(प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, विश्व का प्राकृतिक, सामाजिक, आर्थिक भूगोल) (मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1 व 2: विश्व भर के मुख्य प्राकृतिक संसाधनों का वितरण, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव) |
संदर्भ
डेनमार्क एवं ग्रीनलैंड के शीर्ष नेतृत्व ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को स्पष्ट शब्दों में खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की ज़रूरत ‘अपनी सुरक्षा’ के लिए है। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब बीते एक वर्ष से अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर अपना प्रभाव बढ़ाने के संकेत दिया जा रहा है।
हालिया घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
- डोनाल्ड ट्रम्प न केवल इस आर्कटिक द्वीप को ‘खरीदने’ का विचार कई बार सार्वजनिक रूप से रख चुके हैं बल्कि उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया है। इस बयानबाज़ी ने डेनमार्क, ग्रीनलैंड एवं अमेरिका के संबंधों में असहजता और तनाव को अधिक बढ़ा दिया है।
- वस्तुतः स्थिति तब और संवेदनशील हो गई, जब ट्रम्प के सहयोगियों द्वारा ऐसे नक्शे साझा किए गए जिनमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी ध्वज से ढका हुआ दिखाया गया। डेनमार्क ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह ग्रीनलैंड के भीतर अलगाववादी भावनाओं को हवा देने की कोशिश कर रहा है। परिणामस्वरुप, यह मुद्दा अब केवल द्विपक्षीय विवाद नहीं रह गया है बल्कि आर्कटिक सुरक्षा, संप्रभुता एवं अंतर्राष्ट्रीय कानून से जुड़ा एक बड़ा कूटनीतिक प्रश्न बन चुका है।
ग्रीनलैंड के बारे में
- ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और स्वशासन एवं अपनी संसद के साथ एक स्वायत्त डेनिश आश्रित क्षेत्र है।

- यह 9वीं सदी से ही राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से यूरोप - विशेष रूप से दो औपनिवेशिक शक्तियों, नॉर्वे एवं डेनमार्क - से संबद्ध रहा है।
- डेनमार्क, ग्रीनलैंड के बजट राजस्व का दो-तिहाई हिस्सा प्रदान करता है और शेष हिस्सा मुख्य रूप से मछली पकड़ने से प्राप्त होता है। तेल, गैस एवं दुर्लभ खनिज भंडार की संभावनाओं ने खोज करने वाली कंपनियों को आकर्षित किया है।
- ग्रीनलैंड में वर्ष में दो महीने तक लगातार दिन का उजाला रहता है। द्वीप का 80% से अधिक भाग स्थायी बर्फ की चादर से ढका हुआ है जो कुछ स्थानों पर 4 किलोमीटर मोटी है। वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण यह बर्फ पिघल रही है किंतु इससे ग्रीनलैंड के खनिज संसाधनों तक पहुंच भी बढ़ गई है।
- अमेरिका लंबे समय से ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता रहा है और शीत युद्ध के दौरान उसने थुले में एक रडार बेस स्थापित किया था। ग्रीनलैंड के आसपास की बर्फ पिघलने से नए व्यापार मार्गों के खुलने की संभावना बढ़ गई है जिससे आर्कटिक का महत्व भी बढ़ गया है।
ग्रीनलैंड: तथ्य
- राजधानी: नुउक
- क्षेत्रफल: 2,166,086 वर्ग किमी
- जनसंख्या: 57,000
- भाषाएँ: ग्रीनलैंडिक के साथ ही डेनिश एवं अंग्रेजी
- जीवन प्रत्याशा: 71 वर्ष (पुरुष) व 76 वर्ष (महिला)
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अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर प्रभुत्व का कारण
भू-रणनीतिक महत्व
- ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि की जड़ें गहराई से भू-रणनीति में हैं। शीत युद्ध के दौरान यह द्वीप अमेरिका के लिए एक अहम अग्रिम सैन्य चौकी था और आज भी उसकी रणनीतिक उपयोगिता बनी हुई है।
- अमेरिका यहाँ पिटुफिक स्पेस बेस (पूर्व में थुले एयर बेस) का संचालन करता है जो मिसाइल चेतावनी प्रणाली और रक्षा निगरानी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- इस ठिकाने से रूस, चीन एवं उत्तर कोरिया जैसे देशों से उत्पन्न संभावित खतरों पर नज़र रखी जा सकती है।
- इसके अलावा, ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति यूरोप एवं एशिया के बीच अमेरिका को रणनीतिक पहुँच प्रदान करती है।
आर्कटिक में शक्ति संतुलन की नई होड़
- जैसे-जैसे आर्कटिक क्षेत्र की बर्फ पिघल रही है, नए समुद्री मार्ग और सामरिक क्षेत्र खुल रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य में रूस और चीन अपनी सैन्य एवं आर्थिक उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।
- ऐसे में ग्रीनलैंड पर नियंत्रण या प्रभाव बनाए रखना अमेरिका के लिए आर्कटिक शक्ति संतुलन में अपनी स्थिति मज़बूत करने का एक अहम साधन बन जाता है। यही कारण है कि यह द्वीप अब वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में आ गया है।
दुर्लभ खनिज एवं आपूर्ति श्रृंखला की राजनीति
- ग्रीनलैंड में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं जिनका प्रयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा प्रणालियों में किया जाता है। चूँकि इन खनिजों की वैश्विक आपूर्ति पर चीन का दबदबा है, इसलिए अमेरिका के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश रणनीतिक रूप से बेहद अहम हो जाती है।
- हालाँकि, ग्रीनलैंड ने वर्ष 2021 में यूरेनियम खनन पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पारित किया था, जिससे बड़े पैमाने पर खनन की योजनाएँ जटिल हो गई हैं। इसके बावजूद संसाधनों की संभावनाओं से अमेरिका की रुचि में कमी नहीं आई है।
ग्रीनलैंड में अमेरिका की पुरानी दिलचस्पी
- अमेरिका और ग्रीनलैंड का संबंध कोई नया विषय नहीं है। 1867 में ही अमेरिकी विदेश विभाग ने ग्रीनलैंड के रणनीतिक स्थान और प्राकृतिक संसाधनों का उल्लेख किया था।
- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जब नाज़ी जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्ज़ा कर लिया था, तब अमेरिका ने ग्रीनलैंड में हस्तक्षेप किया। इसके बाद 1946 में राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने ग्रीनलैंड को खरीदने के लिए डेनमार्क को 100 मिलियन डॉलर की पेशकश की थी और यहाँ तक कि अलास्का के कुछ हिस्सों के बदले क्षेत्रीय अदला-बदली पर भी विचार किया गया।
- वर्ष 1951 में अमेरिका और डेनमार्क के बीच हुए रक्षा समझौते ने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को स्थायी रूप दे दिया।
ट्रम्प युग में विवाद की वापसी
- डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल (2017–21) के दौरान यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आया। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को खुले तौर पर एक ‘बड़ा रियल एस्टेट सौदा’ बताते हुए खरीदने की इच्छा जताई।
- जब डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इस विचार को ‘बेतुका’ कहकर खारिज कर दिया, तो ट्रम्प ने अपनी डेनमार्क यात्रा रद्द कर दी। इस घटनाक्रम ने दिखा दिया कि ग्रीनलैंड का सवाल कितना संवेदनशील और राजनीतिक रूप से विस्फोटक है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की चिंताएँ
- डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सतर्कता का एक कारण ट्रम्प प्रशासन की हालिया अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाइयाँ भी हैं जिसमें विशेषकर वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ उठाए गए कदम शामिल हैं। इससे संप्रभुता एवं बाह्य हस्तक्षेप को लेकर आशंकाएँ अधिक गहरी हुई हैं।
- इसी पृष्ठभूमि में ट्रम्प की ग्रीनलैंड संबंधी टिप्पणियाँ दोनों के लिए और अधिक चिंता का विषय बन गई हैं।
कथित ‘तीन-चरणीय रणनीति’
- डेनमार्क के सार्वजनिक प्रसारक डीआर की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीनलैंड को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर त्रि-स्तरीय एक रणनीति अपनाई है:
- सौहार्द बढ़ाने के प्रयास— जैसे डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर की यात्रा
- डेनमार्क पर प्रत्यक्ष दबाव— जेडी वैंस की ग्रीनलैंड यात्रा और डेनमार्क की सार्वजनिक आलोचना
- प्रभाव अभियान— कथित रूप से अलगाववादी आंदोलनों को प्रोत्साहित करने के प्रयास
अमेरिक द्वारा पूर्व में ज़मीन खरीद के उदाहरण
अमेरिकी इतिहास में क्षेत्रीय खरीद के कई उदाहरण मिलते हैं:
- लुइसियाना खरीद (1803): फ्रांस से 15 मिलियन डॉलर में 20 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि
- अलास्का खरीद (1867): रूस से 7.2 मिलियन डॉलर में, जो 1959 में अमेरिकी राज्य बना
- डेनिश वेस्ट इंडीज (1917): डेनमार्क से खरीदे गए द्वीप, जो आज यूएस वर्जिन आइलैंड्स हैं
इन ऐतिहासिक मिसालों के कारण ही ग्रीनलैंड पर ट्रम्प के बयानों को हल्के में नहीं लिया जा रहा है।
निष्कर्ष
ग्रीनलैंड पर विवाद केवल भूमि अधिग्रहण की कहानी नहीं है। यह 21वीं सदी की आर्कटिक राजनीति, संसाधन प्रतिस्पर्धा और वैश्विक शक्ति संतुलन का प्रतीक बन चुका है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लिए यह संप्रभुता का प्रश्न है जबकि अमेरिका के लिए यह सुरक्षा एवं रणनीति का। आने वाले वर्षों में यह टकराव यह तय करेगा कि बदलती दुनिया में ताक़त का संतुलन किस दिशा में झुकता है।