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उद्योगों की ब्लू श्रेणी

(प्रारंभिक परीक्षा : समसामयिक आर्थिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय)

संदर्भ

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने आवश्यक पर्यावरण सेवाओं (EES) के तहत ‘ब्लू श्रेणी’ (Blue Category) के उद्योगों का एक नया वर्गीकरण प्रस्तुत किया है।

उद्योगों की ब्लू श्रेणी के बारे में

  • ‘ब्लू श्रेणी’ उद्योगों का उद्देश्य उन उद्योगों के लिए एक नई श्रेणी बनाना है जो पर्यावरणीय सेवाओं के प्रदाता के रूप में कार्य करते हैं, जैसे कचरा प्रबंधन, बायोगैस उत्पादन, सीवेज उपचार आदि।
  • यह नया वर्गीकरण अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक (Waste to Energy Incinerators) उद्योगों को ब्लू श्रेणी में शामिल करने के कारण विवादास्पद रहा है जिन्हें पहले ‘लाल श्रेणी’ (उच्च प्रदूषण करने वाला उद्योग) के तहत रखा गया था।
  • अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक उद्योगों को इस श्रेणी में डालना प्रदूषण के दृष्टिकोण से एक गलत कदम साबित हो सकता है, क्योंकि ये उद्योग अत्यधिक CO2 उत्सर्जन करते हैं और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हानिकारक होते हैं।

ब्लू श्रेणी के उद्योगों की मुख्य विशेषताएँ

  • आवश्यक सेवा : इन उद्योगों को आवश्यक पर्यावरण सेवाओं (ई.ई.एस.) के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • कम प्रदूषण : ब्लू श्रेणी के उद्योगों को उन उद्योगों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है जो प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।
  • संवेदनशीलता : हालाँकि, ये उद्योग प्रदूषण कम करने के दावे करते हैं, इनमें से कुछ उद्योग प्रदूषण के मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव : ब्लू श्रेणी के उद्योगों में अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक उद्योगों का समावेश किया गया है जो वस्तुतः प्रदूषण फैलाने वाले होते हैं।

शामिल उद्योग

ब्लू श्रेणी में शामिल होने वाले उद्योगों में अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक, बायोगैस संयंत्र, सीवेज उपचार संयंत्र, और अन्य कचरा प्रबंधन सेवाएं शामिल हैं।

रंग-आधारित औद्योगिक वर्गीकरण पद्धति

  • वर्ष 2016 में सी.पी.सी.बी. द्वारा 'उद्योगों के पुनर्वर्गीकरण' ढांचे के तहत उद्योगों का रंगों के आधार पर वर्गीकरण शुरू किया गया।
    • इसे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 द्वारा सशक्त किया गया है।
  • सी.पी.सी.बी. ने औद्योगिक वर्गीकरण को एक रंग-आधारित प्रणाली में विभाजित है जिसमें ‘सफेद’, ‘हरा’, ‘नारंगी’ एवं ‘लाल’ श्रेणियां शामिल हैं।
  • इसमें सफेद श्रेणी सबसे कम प्रदूषण करने वाले उद्योगों को दर्शाती है, जबकि लाल श्रेणी सबसे अधिक प्रदूषण करने वाले उद्योगों को दर्शाती है।

वर्गीकरण आधार

  • प्रदूषण सूचकांक : 0 से 100 तक
    • 0-20: सफेद (सबसे कम प्रदूषणकारी)
    • 21-40: हरा
    • 41-59: नारंगी
    • 60-100: लाल (सबसे अधिक प्रदूषणकारी)

मुख्य चुनौतियां

  • उत्सर्जन का उच्च स्तर : अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक उद्योगों से CO2 का अत्यधिक उत्सर्जन होता है, जो जलवायु परिवर्तन के लिए हानिकारक है।
  • स्वास्थ्य प्रभाव : इन उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक रसायन और प्रदूषक वायुमंडल में फैलते हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
  • सर्कुलर इकॉनमी का उल्लंघन : अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक उद्योग सर्कुलर इकॉनमी के सिद्धांतों के खिलाफ काम करते हैं, जो कचरे के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग को बढ़ावा देते हैं।

समाधान

  • स्मार्ट और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का उपयोग : अपशिष्ट-से-ऊर्जा भस्मक के बजाय अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।
  • कचरा पुनर्चक्रण : कचरे को पुनः उपयोग में लाने के बजाय जलाना प्रदूषण को बढ़ाता है, इसलिए कचरा पुनर्चक्रण और संसाधन पुनः उपयोग पर जोर देना चाहिए।
  • सार्वजनिक जागरूकता : लोगों को प्रदूषण और इसके स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जागरूक करना चाहिए ताकि वे ऐसे प्रदूषणकारी उद्योगों का विरोध करें और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से बेहतर विकल्प चुनें।
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