New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026

कैंडिडा ऑरिस

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी आनुवंशिक प्रक्रिया की पहचान की है जो रहस्यमय एवं अत्यंत घातक कैंडिडा ऑरिस फंगस के उपचार के लिए नए विकल्प विकसित करने में सहायक हो सकती है।

क्या है कैंडिडा ऑरिस 

  • कैंडिडा ऑरिस एक फंगल रोगजनक है जो कई सामान्य एंटीफंगल दवाओं के प्रति प्रतिरोध दिखाता है। यह कवक मानव त्वचा, शरीर के आंतरिक हिस्सों (जैसे- आंत) तथा बाहरी पर्यावरण में भी जीवित रहने की क्षमता रखता है।
  • यह मानव शरीर में प्रवेश कर गंभीर और आक्रामक संक्रमण उत्पन्न कर सकता है।
  • सी. ऑरिस (Candida auris) से होने वाले प्रमुख संक्रमणों में रक्तप्रवाह संक्रमण, मेनिन्जाइटिस, हड्डियों के संक्रमण, जलन या घाव के संक्रमण तथा मूत्र मार्ग संक्रमण शामिल हैं। इस फंगस की पहचान पहली बार 2009 में जापान में की गई थी।

संक्रमण का प्रसार

  • कैंडिडा ऑरिस के अधिकांश मामले अस्पतालों एवं नर्सिंग होम जैसे स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों में सामने आए हैं।
  • यह प्राय: दूषित सतहों के संपर्क में आने या संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।
  • जिन लोगों को पहले से अन्य गंभीर बीमारियाँ हैं जो हाल ही में अस्पताल में भर्ती हुए हैं या जिनके शरीर में कैथेटर जैसे आक्रामक चिकित्सीय उपकरण लगे हैं, उनमें संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

मानव शरीर पर प्रभाव

सी. ऑरिस शरीर पर मुख्य रूप से दो तरीकों से प्रभाव डाल सकता है:

लक्षणहीन 

इसमें फंगस त्वचा, मुंह या मलाशय जैसे किसी विशेष भाग में मौजूद रहता है किंतु रोगी में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। हालाँकि, व्यक्ति से अन्य लोगों में संक्रमण फैल सकता है।

आक्रामक संक्रमण

जब यह रक्तप्रवाह या घावों में प्रवेश करता है तो यह गंभीर एवं जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकता है।

लक्षण

  • इसके लक्षण प्राय: अन्य सामान्य संक्रमणों से मिलते-जुलते होते हैं जिससे इसका निदान कठिन हो जाता है। सबसे सामान्य लक्षणों में बुखार एवं ठंड लगना शामिल हैं जो एंटीबायोटिक उपचार के बावजूद ठीक नहीं होते हैं।
  • कैंडिडा ऑरिस से संक्रमित रोगियों में मृत्यु दर लगभग 30 से 60% के बीच आंकी गई है।

उपचार

  • अधिकांश मामलों में सी. ऑरिस संक्रमण का उपचार इचिनोकैंडिन वर्ग की एंटीफंगल दवाओं से किया जाता है।
  • हालाँकि, कुछ प्रकार इस वर्ग सहित प्रमुख एंटीफंगल दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधी होते हैं जिससे उपचार जटिल हो जाता है।
  • ऐसे मामलों में संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उच्च मात्रा में एक से अधिक एंटीफंगल दवाओं का उपयोग करना पड़ सकता है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR