Indian Economy 05-Sep-2026
भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के आंतरिक भाग की तीव्र गर्मी से प्राप्त होने वाला एक निरंतर, कम कार्बन वाला और मौसम-स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत है। सौर और पवन ऊर्जा के विपरीत, यह नवीकरणीय ऊर्जा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति दे रहा है और 2070 तक 'नेट जीरो' (Net Zero) के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, भूतापीय ऊर्जा ऊर्जा सुरक्षा का एक भरोसेमंद और स्वदेशी विकल्प बनकर उभर रही है।
Indian Economy 05-Sep-2026
हाल ही में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) के मार्गदर्शन में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई), भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) और भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीओएआई) ने कॉरपोरेट मित्र पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसके पहले बैच में 2879 शिक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कॉरपोरेट मित्र लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) का शुभारंभ कार्यक्रम के संरचित शिक्षण और क्षमता-विकास चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
Indian Economy 04-Sep-2026
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग वर्तमान में अभूतपूर्व विस्तार और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ कारखानों के भीतर काम करने का तरीका और तकनीकी जरूरतें भी तेजी से बदल रही हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के अनुमानों के अनुसार, देश का वार्षिक वाहन उत्पादन वित्त वर्ष 2025 के लगभग 30-35 मिलियन (3-3.5 करोड़) यूनिट से बढ़कर 2030 तक 50-55 मिलियन (5-5.5 करोड़) यूनिट तक पहुंच सकता है।
Indian Economy 03-Sep-2026
“राज्यों का विकास होने पर भारत का विकास होता है” के आदर्श वाक्य को प्रतिबिंबित करते हुए, संघवाद स्थानीय आवश्यकताओं को 2047 के विकसित भारत और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अनुरूप ढालता है। केंद्र, राज्य, जिले और स्थानीय संस्थाएं संयुक्त रूप से समावेशी सार्वजनिक सेवाओं और अवसरों को बढ़ावा देते हैं।
Indian Economy 03-Sep-2026
भारत का दक्षता अभियान बाजारों, मानकों और जनभागीदारी को एकीकृत करता है, जिससे बढ़ती ऊर्जा मांग और आर्थिक व जलवायु प्राथमिकताओं के बीच सामंजस्य बनता है।
Indian Economy 02-Sep-2026
भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के साथ की है। घरेलू मांग की मजबूती, निवेश में तेजी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के विस्तार तथा निर्यात में वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को व्यापक आधार प्रदान किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2023-24 से 2026-27 के बीच पहली तिमाही में दर्ज सबसे अधिक वृद्धि है। यह प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती और बाहरी चुनौतियों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है।
Indian Economy 02-Sep-2026
भारत में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने की दिशा में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) ने अपने 9वें स्थापना दिवस पर न केवल अपनी उपलब्धियों को रेखांकित किया, बल्कि आने वाले वर्षों की प्राथमिकताओं का भी संकेत दिया। देश के हर नागरिक तक सुलभ, समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम वित्तीय सेवाएँ पहुँचाने के उद्देश्य से स्थापित आईपीपीबी आज बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी लाभों और अन्य वित्तीय सेवाओं को आम नागरिक तक पहुँचाने वाले एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।
Indian Economy 31-Aug-2026
भारत ‘विकसित भारत’ (2047) की अपनी यात्रा को समर्थन देने हेतु एक सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्पित है। देश में स्वच्छ, विश्वसनीय और स्थिर बेसलोड बिजली की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए, भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा को अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के केंद्र में रखा है। परमाणु ऊर्जा न केवल ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करती है और नवीकरणीय ऊर्जा के एक आदर्श पूरक के रूप में चौबीसों घंटे कम कार्बन वाली बिजली प्रदान करती है, बल्कि यह आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम कर भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को भी बल देती है।
Indian Economy 31-Aug-2026
हाल ही में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भारत में परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी (Nuclear Energy Technology in India) पर एक विस्तृत जानकारी जारी की है। इसमें भारत की परमाणु तकनीक, तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के बारे में बताया गया है।
Indian Economy 27-Aug-2026
भारत में वाणिज्यिक बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक बागवानी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) ने अपनी योजना के दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। संशोधित व्यवस्था में पात्रता के नियमों को अधिक कड़ा किया गया है, परिवार की परिभाषा का विस्तार किया गया है तथा सब्सिडी की दरों में कमी की गई है। इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी सहायता का अधिक न्यायसंगत वितरण, दोहरे लाभ की रोकथाम और सब्सिडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है।
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