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CURRENT AFFAIRS

भारत में खाद्य हानि और खाद्य अपशिष्ट

Indian Economy 29-Sep-2026

भारत में खाद्य उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन खेत से लेकर उपभोक्ता की थाली तक पहुंचने के दौरान बड़ी मात्रा में भोजन बर्बाद भी हो जाता है। 29 सितंबर को मनाए जाने वाले खाद्य हानि और अपशिष्ट के प्रति जागरूकता के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर खाद्य और कृषि संगठन यानी एफएओ के आकलन ने भारत के सामने मौजूद इसी चुनौती को रेखांकित किया है। देश के लिए अब केवल अधिक खाद्य उत्पादन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जो भोजन पहले से उत्पादित हो रहा है, उसे सुरक्षित तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।   

बीमा वितरण पर आईआरडीएआई का नया प्रस्ताव

Indian Economy 29-Sep-2026

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई ने बीमा वितरण व्यवस्था में बदलाव के लिए ‘रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन’ नाम से परामर्श पत्र जारी किया है। इसमें बीमा कंपनियों के वितरण ढांचे, खर्च, कमीशन और ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रस्ताव रखे गए हैं। नियामक का उद्देश्य गलत तरीके से पॉलिसी बेचने यानी मिस-सेलिंग को कम करना और ग्राहकों को प्रभावित करने वाले डार्क पैटर्न पर रोक लगाना है। प्रस्ताव पर 25 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए हैं।  

एस्सार समूह (Essar Group) का अमेरिका में 18 अरब डॉलर का निवेश: स्टील क्षेत्र में भारत की बड़ी वैश्विक पहल

Indian Economy 29-Sep-2026

भारत के एस्सार समूह (Essar Group) ने अमेरिका में लगभग 18 अरब डॉलर के निवेश की योजना की घोषणा की है। 

भारत समुद्री बीमा पूल: समुद्री व्यापार की सुरक्षा में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

Indian Economy 28-Sep-2026

भारत का विदेशी व्यापार बड़े पैमाने पर समुद्री मार्गों पर निर्भर है। कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों के आयात से लेकर औद्योगिक उत्पादों के निर्यात तक, समुद्री कनेक्टिविटी देश की अर्थव्यवस्था की आधारभूत जीवनरेखा है। तटीय नौवहन और अंतर्देशीय जलमार्ग इस व्यवस्था को और मजबूत करते हैं। ऐसे में जहाजों, कार्गो और समुद्री देनदारियों के लिए मजबूत बीमा व्यवस्था भी बंदरगाहों और जहाजरानी अवसंरचना जितनी ही महत्वपूर्ण है। 

स्विफ्ट के विकल्पों की तलाश: ब्रिक्स से सीबीडीसी तक बदल रही वैश्विक भुगतान व्यवस्था

Indian Economy 25-Sep-2026

वैश्विक व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में सीमा-पार भुगतान को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग लेन-देन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली स्विफ्ट व्यवस्था के विकल्प के रूप में कई देश वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों, राष्ट्रीय मुद्राओं और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं यानी सीबीडीसी पर काम कर रहे हैं। 

भारत का पहला ब्लू बॉन्ड: समुद्री अर्थव्यवस्था को पूंजी बाजार से जोड़ने की तैयारी

Indian Economy 25-Sep-2026

भारत अपनी विशाल समुद्री अर्थव्यवस्था के लिए पूंजी जुटाने के एक नए रास्ते की ओर बढ़ रहा है। सागरमाला कार्यक्रम के तहत सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एसएमएफसीएल करीब 1,000 करोड़ रुपये का ब्लू बॉन्ड जारी करने की तैयारी में है। इसे भारत में समुद्र और जल आधारित परियोजनाओं के लिए पूंजी बाजार से धन जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। 

नहरों के ऊपर सौर पैनल

Indian Economy 23-Sep-2026

भारत तेजी से अपनी स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है और इसमें सौर ऊर्जा की अहम भूमिका है। लेकिन बड़े सौर संयंत्रों के लिए जमीन की उपलब्धता और भूमि अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। इससे कृषि, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों से जुड़े सवाल भी उठते हैं। ऐसे में कम भूमि की जरूरत वाली तकनीकों पर जोर बढ़ रहा है। फ्लोटिंग सोलर के साथ कैनाल-टॉप फोटोवोल्टिक, यानी नहरों के ऊपर लगाए जाने वाले सौर पैनल, भारत के लिए एक उपयोगी विकल्प हो सकते हैं।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: कॉपीराइट प्रावधानों पर क्यों उठ रहे सवाल

Indian Economy 21-Sep-2026

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े प्रावधान चर्चा में हैं। हाल ही में यूरोपीय आयोग ने ईयू के सदस्य देशों से भारत-ईयू एफटीए पर हस्ताक्षर और इसे अंतिम रूप देने की मंजूरी देने का औपचारिक अनुरोध किया है। समझौते के विभिन्न हिस्सों में दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं का विवरण सामने आने के बाद कॉपीराइट से जुड़े प्रावधानों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

नए यूपीआई फ्रेमवर्क में आम लोगों को बड़ी राहत

Indian Economy 16-Sep-2026

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में यूपीआई का इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए राहत की खबर है। नए यूपीआई फ्रेमवर्क के तहत पर्सन-टू-पर्सन यानी पी2पी लेन-देन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। यानी किसी व्यक्ति को यूपीआई के जरिए पैसा भेजने या प्राप्त करने पर लेन-देन की राशि कितनी भी हो, ग्राहक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था भी जारी रहेगी।

भारत के कॉयर उद्योग की नई उड़ान

Indian Economy 16-Sep-2026

जो चीज कभी नारियल की सामान्य भूसी मानकर छोड़ दी जाती थी, वह आज भारत के तटीय और ग्रामीण अंचलों में उद्यम, नवाचार और आजीविका का एक मजबूत जरिया बन चुकी है। नारियल का रेशा (कॉयर) एक प्राकृतिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम पीढ़ियों से भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार रहा है। आज देश के उद्यमी और कारीगर इसे पारंपरिक रस्सियों और चटाइयों से निकालकर हस्तशिल्प, जैव-उर्वरक, और पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग समाधानों जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों में बदल रहे हैं।   

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