Indian Economy 27-Aug-2026
भारत में वाणिज्यिक बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक बागवानी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाले राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) ने अपनी योजना के दिशा-निर्देशों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। संशोधित व्यवस्था में पात्रता के नियमों को अधिक कड़ा किया गया है, परिवार की परिभाषा का विस्तार किया गया है तथा सब्सिडी की दरों में कमी की गई है। इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी सहायता का अधिक न्यायसंगत वितरण, दोहरे लाभ की रोकथाम और सब्सिडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है।
Indian Economy 27-Aug-2026
भारत में अगस्त 2026 के दौरान चीनी की खुदरा कीमतों में तेज वृद्धि देखने को मिली है। 20 जुलाई को जहां खुदरा चीनी की कीमत लगभग ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, वहीं 20 अगस्त तक यह बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई। अगस्त के अंत तक कुछ बाजारों में अखिल भारतीय मोडल कीमत लगभग ₹65 प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की खबर है। यह वृद्धि केवल उपभोक्ताओं के घरेलू बजट को प्रभावित नहीं करती, बल्कि खाद्य मुद्रास्फीति, गन्ना किसानों, चीनी मिलों और भारत की एथेनॉल नीति के बीच संतुलन की चुनौती को भी सामने लाती है।
Indian Economy 25-Aug-2026
भारतीय श्रम कानून के इतिहास में 20 अगस्त 2026 का दिन महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया। सर्वोच्च न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने करीब 48 वर्ष पुराने ‘बैंगलोर वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम आर. राजप्पा’ फैसले में तय ‘उद्योग’ की व्यापक अवधारणा पर पुनर्विचार करते हुए पुराने और नए श्रम कानूनों के बीच स्पष्ट अंतर कर दिया। अदालत ने कहा कि औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत लंबित मामलों में 1978 का सिद्धांत लागू रहेगा, लेकिन औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत नए मामलों में यह फैसला स्वतः आधार नहीं बनेगा।
Indian Economy 25-Aug-2026
हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने एमईआईटीवाई स्टार्टअप हब (एमएसएच) के माध्यम से जेनेसिस एंटरप्रेन्योर-इन-रेजिडेंस (ईआईआर) कोहोर्ट 3 का शुभारंभ किया है।
Indian Economy 22-Aug-2026
हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) के लिए एक विज्ञापन संहिता का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य इन प्लेटफॉर्म्स की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ निवेशकों के बीच बॉन्ड जैसे निवेश साधनों के प्रति जागरूकता को मजबूत करना है।
Indian Economy 21-Aug-2026
समुद्र केवल जल का विशाल विस्तार नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, रोजगार, जैव-विविधता और जलवायु संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है। वैश्विक स्तर पर समुद्री संसाधनों और ‘ब्लू इकोनॉमी’ की बढ़ती भूमिका के बीच भारत ने अपनी समुद्री संपदा को वैज्ञानिक रूप से समझने और उसके सतत उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सेंटर फॉर मरीन लिविंग रिसोर्सेज एंड इकोलॉजी (सीएमएलआरई) की रजत जयंती के अवसर पर ‘भारतीय ईईजेड के गहरे समुद्र और दूर-समुद्र के मछली संसाधनों पर राष्ट्रीय रिपोर्ट’ जारी की है।
Indian Economy 21-Aug-2026
भारत के जंगलों में रहने वाले लाखों आदिवासी परिवारों के लिए लघु वन उत्पाद (एमएफपी) केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। शहद, तेंदू पत्ते, महुआ के फूल, इमली, लाख, बांस और जंगली जड़ी-बूटियां जैसे उत्पाद आदिवासी समुदायों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। अनुमानतः कई परिवारों की वार्षिक आय में एमएफपी की हिस्सेदारी करीब 20 से 40 प्रतिशत तक होती है। इसके बावजूद लंबे समय तक बिचौलियों की भूमिका के कारण उत्पाद संग्राहकों को उनके उत्पाद का वास्तविक बाजार मूल्य नहीं मिल पाता था।
Indian Economy 19-Aug-2026
हाल ही में रक्षा उत्पादन विभाग ने छठी पीआईएल जारी की, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 405 रक्षा वस्तुओं को शामिल किया गया है। इनसे लगभग 3,070 करोड़ रुपये की अनुमानित व्यावसायिक संभावनाएँ जुड़ी हैं।
Indian Economy 19-Aug-2026
कॉरपोरेट निवेश आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। कारखानों, मशीनरी, तकनीक और अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों में निवेश से उत्पादन क्षमता, रोजगार और उत्पादकता में वृद्धि होती है। भारत में 2000 के दशक के मध्य में कॉरपोरेट निवेश में उल्लेखनीय तेजी आई, किंतु पिछले एक दशक में इसमें अपेक्षित गति नहीं रही। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कमजोरी केवल वैश्विक वित्तीय संकट या COVID-19 महामारी के कारण नहीं है, बल्कि घरेलू मांग, लाभप्रदता, वित्तीय बाधाओं तथा भविष्य के प्रति कारोबारी विश्वास जैसे कारकों से भी जुड़ी है।
Indian Economy 17-Aug-2026
वैश्विक आर्थिक एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार ने उल्लेखनीय लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित की है। 14 अगस्त 2026 तक छह महीनों में भारत की 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड में केवल 8 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हुई, जबकि अमेरिका में 60, जापान में 66, यूनाइटेड किंगडम में 56, दक्षिण कोरिया में 72, इंडोनेशिया में 78 तथा फिलीपींस में 61 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हुई। यह अंतर बताता है कि वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार पर दबाव अपेक्षाकृत सीमित रहा।
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