Indian Economy 14-Sep-2026
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की वित्तीय रीढ़ हैं। वे न केवल बचत और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराते हैं, बल्कि वित्तीय समावेशन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल केवल श्रम संबंधी विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था की कार्यक्षमता और आम नागरिकों तक वित्तीय सेवाओं की निरंतरता से जुड़ा विषय भी है।
Indian Economy 14-Sep-2026
गुरुग्राम के सरस आजीविका मेले में सजे बांस के उत्पादों के बीच रखा एक साधारण-सा थैला शायद किसी बड़े बदलाव का प्रतीक दिखाई न दे। मगर इस थैले की कहानी असम के एक छोटे से उद्यम से शुरू होकर देश के बदलते बांस परिदृश्य तक पहुंचती है।
Indian Economy 14-Sep-2026
भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता के बीच स्वच्छ, सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय घरेलू ईंधन की उपलब्धता सतत विकास की महत्वपूर्ण शर्त है। इस संदर्भ में पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस का विस्तार केवल ऊर्जा क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण, शहरी अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक दक्षता से जुड़ा व्यापक विकासात्मक मुद्दा है। 18 अगस्त 2026 तक देश में लगभग 1.74 करोड़ घरेलू पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध होना इस दिशा में हुई प्रगति को दर्शाता है।
Indian Economy 12-Sep-2026
भारत की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में छोटे व्यापार, घरेलू उत्पादन, विनिर्माण और सेवाओं की बड़ी भूमिका है। लंबे समय तक इसे मुख्यतः राज्य या राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों से समझा जाता रहा। अब सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने पहली बार अनिगमित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE), 2025 के आधार पर पहली बार जिला-स्तरीय अनुमान जारी किए हैं। गैर-कृषि अनिगमित क्षेत्र से जुड़े ये आंकड़े महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी, आय, उद्यम स्वामित्व और आर्थिक गतिविधियों के भौगोलिक वितरण की स्पष्ट तस्वीर देते हैं। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी और साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।
Indian Economy 11-Sep-2026
भारत में समुद्र केवल प्राकृतिक संपदा का स्रोत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और देश की खाद्य एवं आर्थिक सुरक्षा का आधार भी है। लगभग तीन करोड़ लोगों, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले और तटीय समुदायों की आजीविका मत्स्य क्षेत्र पर निर्भर है। पिछले कुछ वर्षों में यह क्षेत्र पारंपरिक मछली पकड़ने की गतिविधि से आगे बढ़कर आधुनिक जलीय कृषि, निर्यात, तकनीक और नीली अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। इसी परिवर्तन को गति देने के लिए वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) शुरू की गई थी। 10 सितंबर 2026 को योजना के छह वर्ष पूरे होना भारत के मत्स्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
Indian Economy 07-Sep-2026
वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर आपूर्ति श्रृंखलाओं, लॉजिस्टिक्स लागत और कारोबार की तरलता पर पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन, रोजगार और कारोबारी गतिविधियों को गति देने के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दी है। सरकार ने 5 मई 2026 को इस योजना को मंजूरी देते हुए व्यवसायों के लिए अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
Indian Economy 05-Sep-2026
भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के आंतरिक भाग की तीव्र गर्मी से प्राप्त होने वाला एक निरंतर, कम कार्बन वाला और मौसम-स्वतंत्र ऊर्जा स्रोत है। सौर और पवन ऊर्जा के विपरीत, यह नवीकरणीय ऊर्जा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति दे रहा है और 2070 तक 'नेट जीरो' (Net Zero) के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, भूतापीय ऊर्जा ऊर्जा सुरक्षा का एक भरोसेमंद और स्वदेशी विकल्प बनकर उभर रही है।
Indian Economy 05-Sep-2026
हाल ही में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) के मार्गदर्शन में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई), भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) और भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीओएआई) ने कॉरपोरेट मित्र पाठ्यक्रम शुरू किया है, जिसके पहले बैच में 2879 शिक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया है। कॉरपोरेट मित्र लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) का शुभारंभ कार्यक्रम के संरचित शिक्षण और क्षमता-विकास चरण की शुरुआत का प्रतीक है।
Indian Economy 04-Sep-2026
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग वर्तमान में अभूतपूर्व विस्तार और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ कारखानों के भीतर काम करने का तरीका और तकनीकी जरूरतें भी तेजी से बदल रही हैं। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) और ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) के अनुमानों के अनुसार, देश का वार्षिक वाहन उत्पादन वित्त वर्ष 2025 के लगभग 30-35 मिलियन (3-3.5 करोड़) यूनिट से बढ़कर 2030 तक 50-55 मिलियन (5-5.5 करोड़) यूनिट तक पहुंच सकता है।
Indian Economy 03-Sep-2026
“राज्यों का विकास होने पर भारत का विकास होता है” के आदर्श वाक्य को प्रतिबिंबित करते हुए, संघवाद स्थानीय आवश्यकताओं को 2047 के विकसित भारत और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अनुरूप ढालता है। केंद्र, राज्य, जिले और स्थानीय संस्थाएं संयुक्त रूप से समावेशी सार्वजनिक सेवाओं और अवसरों को बढ़ावा देते हैं।
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