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जनगणना 2027 : भारत की पहली डिजिटल गणना

संदर्भ

  • जनगणना किसी देश या क्षेत्र की पूरी आबादी से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जानकारी के व्यवस्थित संग्रह, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है। यह डेटा नीति-निर्माताओं, प्रशासकों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है, जिससे साक्ष्य-आधारित, समावेशी और लक्षित निर्णय लिए जा सकते हैं। 
  • भारत में जनगणना का इतिहास प्राचीन है, जिसका उल्लेख अर्थशास्त्र और आइन-ए-अकबरी में मिलता है। आधुनिक जनगणना की शुरुआत 1865–1872 के बीच हुई, जबकि पहली समकालिक जनगणना 1881 में आयोजित की गई। तब से यह प्रत्येक 10 वर्ष में नियमित रूप से आयोजित की जाती है। 
  • आगामी जनगणना 2027 भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। यह विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभियान होगा, जिसमें डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इसकी प्रमुख विशेषताओं में मोबाइल-आधारित डेटा संग्रह, जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) के माध्यम से वास्तविक समय निगरानी, स्व-गणना की सुविधा, सटीक भौगोलिक मानचित्रण और जनसंख्या गणना के दौरान व्यापक जातिगत गणना शामिल हैं। 

जनगणना 2027 के बारे में  

  • जनगणना 2027 एक मजबूत कानूनी और प्रशासनिक ढांचे पर आधारित है, जो पूरे देश में डेटा संग्रह की एकरूपता, विश्वसनीयता और निरंतरता सुनिश्चित करता है। 
  • इसका संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत किया जाता है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में जनगणना को संघ सूची का विषय (क्रम संख्या 69) रखा गया है, इसलिए इसका समन्वय केंद्र सरकार करती है, जबकि कार्यान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से होता है। 
  • यह ढांचा व्यक्तिगत जानकारी की सख्त गोपनीयता भी सुनिश्चित करता है। अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहती है। इसे न तो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत साझा किया जा सकता है, न ही न्यायालय में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकता है। 
  • सरकार ने 16 जून 2025 को भारत के राजपत्र में जनगणना 2027 आयोजित करने की अधिसूचना जारी की, और इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11,718.24 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है।   
  • यह जनगणना तेज, सटीक और सुरक्षित डेटा उपलब्ध कराने के साथ-साथ जन-भागीदारी को बढ़ावा देगी, जिससे भविष्य की नीतियों और योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। 

जनगणना 2027: दो-चरणीय योजना और समय-सारणी 

जनगणना 2027 को पूरे देश में व्यवस्थित और व्यापक डेटा संग्रह के लिए दो चरणों में आयोजित किया जाएगा:

चरण I : हाउसलिस्टिंग और आवास गणना (HLO) 

  • अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 30 दिनों की अवधि में आयोजित होगा। इससे पहले 15 दिनों की स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस चरण में मकानों की स्थिति, सुविधाएं और परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। 

चरण II : जनसंख्या गणना (PE) 

  • यह फरवरी 2027 में आयोजित होगी, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक, प्रवासन और प्रजनन संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी। 
  • इसी चरण में जातिगत गणना भी की जाएगी। विशेष रूप से लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले क्षेत्रों में यह चरण सितंबर 2026 में आयोजित होगा। 

संदर्भ तिथि (Census Moment): 

  • अधिकांश भारत के लिए 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित है, जबकि उपरोक्त बर्फबारी वाले क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि तय की गई है। 

जनगणना 2027 की मुख्य विशेषताएं 

जाति गणना

  • भारतीय जनगणना 2027 की एक प्रमुख विशेषता के रूप में जातिगत गणना उभर कर सामने आई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 की जनगणना तक, इस प्रक्रिया में केवल अनुसूचित जातियों (एसी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) की ही व्यवस्थित गणना की जाती थी। हालांकि, 30 अप्रैल 2025 को राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीपीए) द्वारा लिए गए निर्णय के बाद, अब जनगणना 2027 के तहत जातिगत गणना भी की जाएगी। 

डिजिटल माध्यम से पहली जनगणना 

  • जनगणना 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसके सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार ने अभी से व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल

  • इन प्रयासों के हिस्से के रूप में, संपूर्ण जनगणना प्रक्रिया के वास्तविक समय में प्रबंधन और निगरानी के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) नामक एक समर्पित पोर्टल विकसित किया गया है। 
  • एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से उप-मंडल, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी गणना की प्रगति, क्षेत्रीय कार्य-प्रदर्शन और परिचालन संबंधी तैयारियों की निगरानी कर सकेंगे।  

हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना (एचएलओ) मोबाइल एप्लिकेशन

  • यह गणना करने वालों के लिए हाउसलिस्टिंग डेटा एकत्र करने और अपलोड करने हेतु एक सुरक्षित ऑफलाइन ऐप है, जिसका उपयोग केवल सीएमएमएस पोर्टल पर पंजीकृत व्यक्ति ही कर सकेंगे। 
  • यह ऐप सीधे फील्ड-से-सर्वर तक डेटा भेजने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे कागजी कार्रवाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यह एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। 

हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (एचएलबीसी) वेब मैपिंग एप्लिकेशन 

  • जनगणना 2027 का एक अन्य नवाचार एचएलबी क्रिएटर वेब मैपिंग एप्लिकेशन है, जिसका उपयोग चार्ज अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। 
  • यह सैटेलाइट इमेजरी (उपग्रह चित्रों) की मदद से हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) के डिजिटल निर्माण की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे बिना किसी दोहराव या छूट के पूरे देश का सटीक भौगोलिक कवरेज सुनिश्चित हो सकेगा। 

स्व-गणना पोर्टल 

  • घर-घर जाकर की जाने वाली गणना (फील्ड विजिट) से पहले 15 दिनों की एक वैकल्पिक स्व-गणना अवधि दी जाएगी। 
  • स्व-गणना पोर्टल एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा है, जो किसी परिवार के पात्र उत्तरदाताओं को क्षेत्रीय कार्य (फील्ड ऑपरेशंस) शुरू होने से पहले अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन जमा करने की सुविधा देता है। 
  • सफलतापूर्वक डेटा जमा करने पर, एक विशिष्ट स्व-गणना पहचान संख्या (एसई आईडी) जनरेट होगी। इस एसई आडी को एन्यूमेरेटर के साथ साझा करना होगा, जिसके आधार पर एन्यूमेरेटर जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। 

न्यूनतम संभव समय में संपन्न करना  

  • डेटा संग्रहण से लेकर उसकी प्रोसेसिंग तक के प्रत्येक चरण में अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर, यह प्रयास किया जाएगा कि जनगणना के आंकड़े पूरे देश में न्यूनतम संभव समय में उपलब्ध कराए जा सकें। 
  • इसके अतिरिक्त, जनगणना के परिणामों को अधिक अनुकूलित विज़ुअलाइज़ेशन टूल्स के माध्यम से प्रसारित करने के प्रयास भी किए जाएंगे।  

सुचारू क्रियान्वयन के लिए तैयारी  

  • 1 जनवरी 2026 तक प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज कर दी गईं। नवंबर 2025 में लगभग 5,000 जनगणना ब्लॉकों में प्री-टेस्ट किया गया। जनवरी 2026 में उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित कर समन्वय मजबूत किया गया और जनगणना कर्मियों की नियुक्ति पूरी की गई। 19 भाषाओं में निर्देश पुस्तिकाएं तैयार की गईं तथा समयबद्ध गतिविधि कैलेंडर लागू किया गया।

मजबूत डेटा सुरक्षा ढांचा  

  • डेटा की सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, सुरक्षित ट्रांसमिशन और प्रमाणित डेटा केंद्रों का उपयोग किया गया है, जिन्हें महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचा (CII) के रूप में नामित किया गया है। यह प्रणाली ISO/IEC 27001:2022 के अनुरूप है और नियमित सुरक्षा ऑडिट के अधीन रहती है। 

क्षमता निर्माण और मानव संसाधन 

  • लगभग 31 लाख गणनाकार/पर्यवेक्षक और 1 लाख से अधिक अधिकारी तैनात किए जाएंगे। उनके प्रशिक्षण के लिए 80,000 से अधिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, 18,600 तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति से लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस के रोजगार सृजित होंगे। 

निष्कर्ष: भविष्य के सुशासन की आधारशिला के रूप में जनगणना

  • जनगणना सुशासन की आधारशिला बनी हुई है, जो तथ्य-आधारित नीति-निर्धारण और समावेशी विकास के लिए विश्वसनीय एवं व्यापक डेटा प्रदान करती है। 
  • यह जनसांख्यिकीय रुझानों के सटीक मूल्यांकन को सक्षम बनाती है तथा खाद्य, जल, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी योजना सुनिश्चित करती है। स्थानीय स्तर पर बारीक जानकारियां प्रदान कर, यह सरकारी योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन और संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग में सहायता करती है। 
  • वस्तुतः आगामी जनगणना 2027 से यह अपेक्षा है कि वह अद्यतन एवं विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराकर इस प्रणाली को और अधिक मजबूत करेगी। यह पहल अधिक सटीक व तथ्य-परक नियोजन का आधार बनेगी और तीव्र गति से बदलते सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य की उभरती चुनौतियों से निपटने में सहायक सिद्ध होगी।  

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