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चीन का नया सीमा कानून और भारतीय सरोकार

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों व राजनीति का प्रभाव)

संदर्भ 

हाल ही में, चीन की ‘नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस’ की ‘स्थायी समिति’ ने ‘देश के स्थलीय सीमा क्षेत्रों के संरक्षण एवं दोहन’ के लिये एक नया भूमि कानून पारित किया है।

पृष्ठभूमि 

  • चीन का यह कानून अगले वर्ष 1 जनवरी से लागू होगा। विदित है कि नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस चीन का औपचारिक किंतु शीर्ष विधायी निकाय है।
  • यद्यपि यह कानून विशेष रूप से भारत के साथ लगने वाली सीमा से संबंधित नहीं है किंतु भारत और चीन के मध्य सीमा-विवाद एक प्रमुख मुद्दा है।
  • यह कानून सैन्य गतिरोध के समाधान में नई बाधाएँ भी उत्पन्न कर सकता है। हाल ही में, चीन ने रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिये भूटान के साथ सीमा विवाद पर एक समझौता किया है और नेपाल व बांग्लादेश में भी उसकी सक्रियता बढ़ रही है।
  • साथ ही, चीन को आशंका है कि तालिबान-अफगानिस्तान से शरणार्थी और इस्लामी कट्टरपंथी चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर विद्रोहियों के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं।

चीन का नया कानून

  • नए कानून के अनुसार, चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पवित्र एवं अक्षुण्ण है। इस कानून में सरकार से प्रादेशिक अखंडता व स्थलीय सीमाओं की सुरक्षा करने तथा इनको कमज़ोर करने वाले किसी भी कृत्य से निपटने के लिये कहा गया है।
  • इसके तहत चीन सीमा सुरक्षा को मज़बूत करने, आर्थिक व सामाजिक विकास के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों को खोलने और ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं एवं बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करेगा।
  • साथ ही, यह कानून सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के जीवन को प्रोत्साहित व समर्थित करने तथा सीमा सुरक्षा के बीच समन्वय बढ़ाने का भी प्रयास कर सकता है।
  • अप्रत्यक्षतः यह कानून सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों को बसाने (‘बॉर्डर डिफेंस विलेज’ बनाने) पर अधिक ज़ोर देता है। हालाँकि, यह कानून चीन को समानता, विश्वास व मैत्रीपूर्ण परामर्श के सिद्धांतों का पालन करते हुए पड़ोसी देशों के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा मुद्दों को बातचीत से हल करने का भी सुझाव देता है।

        बॉर्डर डिफेंस विलेज

        • चीन ने ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ के पास गाँव बसाने शुरू कर दिये हैं। इन संरचनाओं को ‘बॉर्डर डिफेंस विलेज’ कहा जा रहा है। ईस्टर्न सेक्टर (पूर्वी क्षेत्रों) में ये गाँव अधिक संख्या में बसाए गए हैं।
        • इनके आस-पास होटल भी बनाए जा रहे हैं। पी.एल.ए. इनका उपयोग नागरिक आबादी के बीच अपने सैनिकों को रखने के लिये भी कर सकता है। इस प्रकार यह एक ‘इंटीग्रेटेड मॉडल’ हो सकता है। हालाँकि, इन संरचनाओं के ‘विज़ुअल रेंज’ में होने के कारण इसके सैन्य प्रयोग को लेकर अभी दुविधा है।
        • चीन इन डिफेंस विलेज के लिये बेहतर संपर्क सुविधाएँ भी विकसित कर रहा है। ये विलेज चीन की सेना पी.एल.ए. की निगरानी में हैं। ये विलेज बड़े कॉम्प्लेक्स की तरह हैं, जिनमें सभी सुविधाएँ हैं।
        • विदित हो कि चीन के ‘डिफेंस विलेज’ के जबाव में भारत पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अरुणाचल प्रदेश में ‘मॉडल विलेज’ बनाने पर कार्य कर रहा है। अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारतीय सेना मिलकर ये मॉडल विलेज विकसित कर रहे हैं। इसके लिये एल.ए.सी. के पास तीन गाँवों की पहचान की गई है।

        चीन की स्थलीय सीमा

        • चीन 14 देशों के साथ 22000 किमी. से अधिक की स्थलीय सीमा साझा करता है। मंगोलिया और रूस के बाद भारत की सीमा चीन के साथ तीसरी सबसे लंबी है।
        • इसमें से 12 देशों के साथ चीन स्थलीय सीमा विवाद का निपटारा कर चुका है। भूटान के साथ चीन ने सीमा विवाद निपटारे के लिये ‘थ्री-स्टेप रोडमैप समझौता’ किया है।
        • भारत की स्थलीय सीमा का सर्वाधिक विस्तार बांग्लादेश के बाद चीन के साथ ही है। भारत और चीन (तिब्बत) के मध्य की सीमा को मैकमोहन रेखा कहते हैं, जो सिक्किम से म्याँमार सीमा तक विस्तृत है। इसका निर्धारण सर हेनरी मैकमोहन ने वर्ष 1914 में किया था।

        नया कानून और भारतीय सरोकार 

        • पूर्वी लद्दाख में गतिरोध को हल करने के बीच यह कानून इस बात का संकेत है कि चीन सीमा विवाद का हल अपनी शर्तों और तरीकों (बातचीत, सहमति या बल प्रयोग) के अनुसार करना चहता है। यह बातचीत को थोड़ा कठिन बना सकता है और शेष क्षेत्रों से पी.एल.ए. के हटने की संभावना पर भी असर डाल सकता है।
        • नया कानून सीमा प्रबंधन की ज़िम्मेदारी स्पष्ट रूप से पी.एल.ए. को देता है। हालाँकि, भारत में सीमा प्रबंधन के लिये गृह और रक्षा मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी को लेकर अभी भी अस्पष्टता है।
        • इस कानून पर रूस की प्रतिक्रिया भी भारत के लिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि रूस और चीन के बीच एक बड़ा क्षेत्र ‘नो मेंस लैंड जोन’ है। इससे भारत के प्रति चीन के संदर्भ में रूस के दृष्टिकोण का भी पता चलेगा।
        • भारत भी अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने हेतु प्रयासरत है। साथ ही, सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना के जवानों की संख्या बढ़ाने के अतिरिक्त बोफोर्स जैसी आधुनिक तोपें भी तैनात की गई हैं।
        • इसके अलावा, 700 करोड़ रुपए की अतिमहत्त्वपूर्ण ‘सेला सुरंग परियोजना’ को प्रस्तावित समय-सीमा से पहले ही पूरा करने की योजना है। इससे तवांग और उससे सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्ष भर यातायात सुनिश्चित हो सकेगा।

        चीन और सिलीगुड़ी कॉरिडोर

        • चीन ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ को अपने लिये बड़ा खतरा मानता है। इसे भारत के ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2017 के डोकलाम विवाद के समय ये कॉरिडोर एक महत्त्वपूर्ण मार्ग बनकर उभरा था। सिलीगुड़ी कॉरिडोर से तिब्बत की चुंबी घाटी मात्र 130 किमी. दूर है और भारत यहाँ से चीन पर भी नजर रखता है।
        • चुंबी घाटी सिक्किम की सीमा पर तिब्बत में भारत, भूटान और चीन के त्रिकोण पर स्थित है। भारत और चीन के मध्य 2 प्रमुख दर्रे ‘नाथूला’ और ‘जेलप्ला’ यहाँ खुलते हैं। सिलीगुड़ी गलियारे से यह स्थान लगभग 50 किमी. दूर है।
        • वस्तुतः पश्चिम बंगाल में स्थित 60 किमी. लंबा और 20 किमी. चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर-पूर्व को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में करीब 5 करोड़ लोग निवास करते हैं। आर्थिक दृष्टि से भी ये कॉरिडोर उत्तर-पूर्वी राज्यों और शेष भारत के व्यापार के लिये अहम है।
        • भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच एकमात्र रेलवे फ्रेट लाइन भी यहीं है। वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सड़क मार्ग और रेलवे लाइन सिलीगुड़ी कॉरिडोर से जुड़े हुए हैं। यह कॉरिडोर भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में आसियान देशों के लिये भी एक महत्त्वपूर्ण प्रवेश द्वार है जो भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के लिये महत्त्वपूर्ण है।
        • साथ ही, यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ, सीमा पार आतंकवाद और इस्लामी कट्टरपंथ का मुकाबला करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है। म्याँमार, थाईलैंड व लाओस में संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी भारतीय राज्यों, जैसे- त्रिपुरा, मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड व अरुणाचल प्रदेश के लिये बड़ा सुरक्षा खतरा रहा है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर इस सुरक्षा खतरे से निपटने में काफी अहम भूमिका निभा रहा है।
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