कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति हाशिम थाची को युद्ध अपराधों के मामले में 25 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई है। हेग स्थित यूरोपीय संघ समर्थित विशेष अदालत ने उन्हें 1990 के दशक के अंत में हुए कोसोवो युद्ध के दौरान हत्या, मनमाने तरीके से हिरासत में रखने, अवैध गिरफ्तारी और यातना सहित कई अपराधों का दोषी पाया।
थाची उस समय कोसोवो लिबरेशन आर्मी यानी केएलए के वरिष्ठ कमांडरों में शामिल थे। अदालत ने केएलए के तीन अन्य पूर्व कमांडरों को भी अलग-अलग आरोपों में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
मामला क्या है?
हाशिम थाची कोसोवो लिबरेशन आर्मी के पूर्व कमांडर थे। केएलए एक जातीय अल्बानियाई सशस्त्र संगठन था, जिसका गठन 1990 के दशक की शुरुआत में हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य यूगोस्लाविया और सर्बिया से कोसोवो की स्वतंत्रता हासिल करना था।
उस समय कोसोवो सर्बिया के भीतर एक स्वायत्त प्रांत था। इसके अधिकांश निवासी जातीय अल्बानियाई थे।
कोसोवो का इतिहास पूर्व यूगोस्लाविया के विघटन से गहराई से जुड़ा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूगोस्लाविया को समाजवादी संघीय गणराज्य के रूप में पुनर्गठित किया गया। इसमें क्रोएशिया, मोंटेनेग्रो, सर्बिया, स्लोवेनिया, बोस्निया और हर्जेगोविना तथा मैसेडोनिया जैसे गणराज्य और कोसोवो तथा वॉयवोडिना जैसे स्वायत्त प्रांत शामिल थे।
यूगोस्लाव नेता जोसिप ब्रोज़ टीटो के नेतृत्व में यह संघ लंबे समय तक एकजुट रहा। लेकिन 1980 में उनकी मृत्यु के बाद राजनीतिक, आर्थिक और राष्ट्रवादी तनाव बढ़ने लगे।
1980 के दशक के अंत में सर्बियाई राष्ट्रवादी राजनीति के प्रमुख नेता स्लोबोदान मिलोशेविच ने ऐसी नीतियां अपनाईं जिनसे कोसोवो सहित अन्य गणराज्यों और प्रांतों की स्वायत्तता प्रभावित हुई। अल्बानियाई आबादी के खिलाफ भेदभाव के आरोप भी सामने आए।
कोसोवो युद्ध कैसे शुरू हुआ?
इसी पृष्ठभूमि में केएलए ने कोसोवो की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष शुरू किया। संगठन ने सर्बियाई सरकारी प्रतिष्ठानों और पुलिस ठिकानों को निशाना बनाया।
1998-99 में यह संघर्ष व्यापक युद्ध में बदल गया। सर्बिया के नियंत्रण वाली संघीय सेनाओं ने केएलए के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की। युद्ध के दौरान हजारों लोग विस्थापित हुए और करीब 13,000 लोगों की मौत हुई, जिनमें अधिकांश जातीय अल्बानियाई थे।
बाद में नाटो यानी उत्तर अटलांटिक संधि संगठन ने हस्तक्षेप किया। नाटो ने सर्बियाई ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद सर्बियाई सेनाओं को कोसोवो से हटना पड़ा और क्षेत्र में नाटो के नेतृत्व वाली शांति सेना तैनात की गई।
यूगोस्लाविया के विघटन के बाद क्या हुआ?
यूगोस्लाविया के युद्धों के दौरान स्लोबोदान मिलोशेविच पर मानवता के खिलाफ अपराध, नरसंहार और युद्ध अपराधों के आरोपों में हेग में मुकदमा चला। 2002 में सुनवाई शुरू हुई, लेकिन फैसला आने से पहले 2006 में जेल में उनकी मृत्यु हो गई।
2008 में कोसोवो ने सर्बिया से स्वतंत्रता की घोषणा की। अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने कोसोवो को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी।
हालांकि, सर्बिया आज भी कोसोवो को स्वतंत्र देश नहीं मानता और उसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, भले ही वर्तमान में सर्बिया का वहां प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। कोसोवो संयुक्त राष्ट्र का सदस्य भी नहीं है। भारत भी कोसोवो को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता।
थाची के खिलाफ मुकदमा क्यों चला?
हाशिम थाची के खिलाफ मुकदमा कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स में चला। यह यूरोपीय संघ समर्थित विशेष न्यायिक संस्था है, जिसकी स्थापना 2016 में हेग में की गई थी। इसका उद्देश्य 1990 के दशक में कोसोवो संघर्ष के दौरान केएलए से जुड़े कथित अपराधों की सुनवाई करना था।
इस अदालत की स्थापना की पृष्ठभूमि में 2010 की एक रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण थी। इसे स्विस राजनेता डिक मार्टी ने यूरोप की परिषद के लिए तैयार किया था। इसे आम तौर पर मार्टी रिपोर्ट कहा जाता है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि केएलए ने कई सर्बियाई लोगों को गुप्त हिरासत केंद्रों में रखा, जहां उनके साथ अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किया गया। रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया था कि कुछ बंदियों के अंग निकालकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की कोशिश की गई।
इन आरोपों ने केएलए और कोसोवो के स्वतंत्रता आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित किया। संगठन को केवल स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले आंदोलन के रूप में देखने के बजाय उसके खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों के गंभीर आरोपों पर भी ध्यान केंद्रित हुआ।
अदालत ने थाची को दोषी क्यों माना?
कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स में कम से कम 15 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। हाशिम थाची उनमें सबसे वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेताओं में से एक थे।
उनके खिलाफ आरोप 2020 में लगाए गए थे, जब वे कोसोवो के राष्ट्रपति थे। आरोप लगने के बाद उन्हें राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना पड़ा और उन्होंने आम नागरिक के रूप में मुकदमे का सामना किया।
मुकदमे में मुख्य सवाल यह था कि केएलए के कमांडरों का संगठन पर कितना नियंत्रण था और क्या उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराध किसी व्यवस्थित तरीके से किए गए थे।
अदालत के अध्यक्ष न्यायाधीश चार्ल्स स्मिथ ने कहा कि थाची ने अपराधों में सक्रिय रूप से भाग लिया और उन्हें प्रोत्साहित किया। अदालत ने अपराधों की गंभीरता और उनके पैमाने को भी महत्वपूर्ण माना।
हालांकि, न्यायाधीश ने यह स्पष्ट किया कि मुकदमा कोसोवो लिबरेशन आर्मी की वैधता या कोसोवो की स्वतंत्रता हासिल करने के उसके अंतिम राजनीतिक उद्देश्य पर नहीं था। मुकदमे का केंद्र कथित अपराध और उनमें आरोपियों की भूमिका थी।
फैसले पर क्या प्रतिक्रिया आई?
फैसला हाशिम थाची के लिए बड़ा राजनीतिक और व्यक्तिगत झटका है। युद्ध के बाद के दौर में पश्चिमी देशों के बीच उन्हें कोसोवो के राजनीतिक भविष्य के प्रमुख नेताओं में माना जाता रहा था।
कोसोवो में थाची को आज भी कई लोग स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता और क्रांतिकारी व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं। फैसले के बाद राजधानी प्रिस्टिना में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हुए। कई लोगों ने थाची और केएलए के समर्थन में नारे लगाए और फैसले पर नाराजगी जताई। कोसोवो के प्रधानमंत्री अल्बिन कुर्ती ने फैसले को “न्याय का उपहास” बताया।
इसके विपरीत, सर्बिया की ओर से फैसले का स्वागत किया गया। सर्बिया के उपप्रधानमंत्री इवित्सा डाचिच ने फैसले को प्रिस्टिना के लिए एक “चेतावनी” बताया और कहा कि सर्बों की सामूहिक कब्रों पर एक “झूठा राज्य” नहीं बनाया जा सकता। यद्यपि हाशिम थाची और अन्य तीन पूर्व केएलए कमांडरों को अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।
निष्कर्ष
हाशिम थाची के खिलाफ फैसला कोसोवो युद्ध की विरासत और वहां के राजनीतिक इतिहास से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक मामलों में से एक है। यह मामला एक तरफ युद्ध के दौरान कथित अपराधों के लिए जवाबदेही का सवाल उठाता है, तो दूसरी तरफ कोसोवो की स्वतंत्रता के संघर्ष और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों की जटिलता को भी सामने लाता है।
फैसले का अंतिम प्रभाव अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, यह मामला दिखाता है कि कोसोवो युद्ध के दौरान हुए कथित अपराधों की कानूनी और राजनीतिक विरासत आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।