New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

ताइवान के समीप चीन के सैन्य अभ्यास 

संदर्भ 

29 और 30 दिसंबर, 2025 को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ताइवान के आसपास व्यापक सैन्य अभ्यास किया। चीन के रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) के अनुसार, यह इस वर्ष का दूसरा प्रमुख अभ्यास था, जिसका उद्देश्य चीन की राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता की रक्षा करना व ताइवानी अलगाववादी ताकतों तथा विदेशी हस्तक्षेप को चेतावनी देना था।

प्रमुख बिंदु 

जस्टिस मिशन-2025  

  • इस अभ्यास का नाम 'जस्टिस मिशन-2025' रखा गया। इसमें सैनिकों ने समुद्री, थल और वायु सेनाओं का संयुक्त उपयोग करते हुए प्रमुख बंदरगाहों और क्षेत्रों की नाकाबंदी, युद्धक तैयारी और त्रिआयामी बाहरी रेखा प्रतिरोध पर ध्यान केंद्रित किया।
  • पहले दिन 130 हवाई उड़ानों का संचालन किया गया, जिनमें से 90 उड़ानें ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा को पार कर गईं। 
  • दूसरे दिन लंबी दूरी की रॉकेट फायरिंग का अभ्यास किया गया, जिसमें 10 रॉकेट ताइवान के निकटवर्ती क्षेत्र में गिरे।
  • वस्तुतः चीन ताइवान को अपना अलग हुआ प्रांत मानता है और अपने इस मिशन को “अलगाववादी ताकतों के खिलाफ प्रतिरोध” के रूप में प्रस्तुत करता है। 

ताइवान के पास चीन के सैन्य अभ्यास की निरंतरता 

'जस्टिस मिशन-2025' कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह 2022 से जारी चीनी आक्रामकता की एक अगली कड़ी है:

  1. 2022: नैन्सी पेलोसी की यात्रा के बाद 11 मिसाइलें दागकर चीन ने अपनी नाराजगी दिखाई थी।
  2. 2023: तत्कालीन राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन की अमेरिका यात्रा के दौरान अभ्यास तेज हुए।
  3. 2025 (अप्रैल): विलियम लाई चिंग-ते की जीत के बाद 'स्ट्रेट थंडर-2025A' के माध्यम से घेराबंदी का अभ्यास किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान अभ्यास का मुख्य कारण ट्रंप प्रशासन द्वारा ताइवान को प्रस्तावित 11 अरब डॉलर का हथियार सौदा है। चीन इन हथियारों (हॉवित्जर और उन्नत रॉकेट लॉन्चर) के ताइवान पहुँचने से पहले अपनी सैन्य श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहता है।

ताइवान की प्रतिक्रिया

  • चीन के 'जस्टिस मिशन-2025' सैन्य अभ्यास के बाद ताइवान ने इसे “उत्तेजक और दबावकारी सैन्य कार्रवाई” करार दिया। 
  • ताइवान की मुख्यभूमि मामलों की परिषद ने स्पष्ट किया कि देश अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ाने के लिए 'टी-डोम' नामक बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव रखता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया 

  • अमेरिका ने इन सैन्य अभ्यासों को तुलनात्मक रूप से कम महत्व दिया। वहीं, यूरोपीय संघ आयोग ने चिंता जताते हुए कहा कि ये अभ्यास दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाते हैं और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए जोखिम पैदा करते हैं। 

जापान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव

  • पूर्वी एशियाई सुरक्षा पर चीन के बढ़ते दबाव के बीच, जापान की नव निर्वाचित प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भी टिप्पणी की कि ताइवान पर चीनी सैन्य कार्रवाई जापान के अस्तित्व के लिए खतरा है। चीन ने उनकी टिप्पणियों को घोर आपत्तिजनक बताया और उनसे बयान वापस लेने की मांग की।
  • इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि चीन-ताइवान तनाव केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा नीति पर गहरी चुनौती बनी रहेगी। 

भारत के रणनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक निहितार्थ 

  • हाल ही में ताइवान के पास चीन के 'जस्टिस मिशन-2025' सैन्य अभ्यास ने सीधे भारत पर सीमित सैन्य प्रभाव डाला है, लेकिन इसके रणनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक निहितार्थ गहरे हैं। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनाव को बढ़ाता है और भारत की सुरक्षा, व्यापार और अन्तर्राष्ट्रीय भागीदारी पर कई तरह से असर डालता है।

रणनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव

  1. क्षेत्रीय अस्थिरता: चीन की आक्रामक गतिविधियाँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तनाव पैदा करती हैं, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएँ बढ़ जाती हैं।
  2. भारत-ताइवान संबंध: चीन के दबाव के बावजूद, ताइवान भारत को एक समान विचारधारा वाला भागीदार मान रहा है। व्यापार, प्रौद्योगिकी और कूटनीतिक सहयोग बढ़ने से चीन नाराज है।
  3. चीन का संदेश: इन सैन्य अभ्यासों के माध्यम से चीन अलगाववाद और बाहरी हस्तक्षेप (जैसे भारत का समर्थन) रोकने का स्पष्ट संदेश दे रहा है।

आर्थिक प्रभाव

  1. समुद्री व्यापार मार्ग: दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य गतिविधियाँ भारत के लगभग 55% समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक लागत बढ़ने का खतरा है।
  2. व्यापार पर असर: ताइवान, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते भी इस अस्थिरता से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे निर्यात-आयात और आर्थिक सहयोग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

"जस्टिस मिशन-2025" ने स्पष्ट कर दिया है कि ताइवान जलडमरूमध्य अब दुनिया के सबसे खतरनाक 'फ्लैशपॉइंट्स' में से एक बन चुका है। भारत के लिए यह समय अपनी समुद्री सुरक्षा नीतियों को और सुदृढ़ करने और ताइवान के साथ आर्थिक साझेदारी को संतुलित रखते हुए अपनी कूटनीतिक बिसात बिछाने का है। भविष्य की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय चीन की इस 'घेराबंदी की राजनीति' का मुकाबला कैसे करता है। 

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR