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क्रिप्टो KYC

संदर्भ

भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी उपयोगकर्ताओं के लिए केवाईसी (KYC) और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) मानकों को अधिक कठोर कर दिया है। इसके तहत अब लाइव सेल्फ़ी सत्यापन, जियो-टैगिंग तथा बैंक खाते के सत्यापन को अनिवार्य किया गया है।

क्रिप्टो KYC के बारे में

  • यह क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के उपयोगकर्ताओं के लिए लागू किया गया एक बाध्यकारी डिजिटल पहचान सत्यापन ढांचा है।
  • इसके अंतर्गत वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) में किसी भी प्रकार के लेन–देन से पहले उपयोगकर्ता को अपनी वास्तविक पहचान, भौतिक मौजूदगी और वित्तीय संबंधों को प्रमाणित करना आवश्यक होगा। 
  • यह व्यवस्था वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-India) द्वारा, केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के अनुरूप जारी की गई है और उसी के तहत लागू की जा रही है। 

उद्देश्य

  • क्रिप्टो परिसंपत्तियों के ज़रिये मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी वित्तपोषण और प्रसार वित्तपोषण को रोकना।
  • यह सुनिश्चित करना कि क्रिप्टो लेन–देन पारदर्शी हों, उनकी जवाबदेही तय हो और वे वास्तविक व्यक्तियों से जुड़े हों।

प्रमुख विशेषताएँ

  • लाइव सेल्फ़ी (लाइवनेस डिटेक्शन सहित): वास्तविक समय की गतिविधियों के माध्यम से उपयोगकर्ता की मौजूदगी और पहचान की पुष्टि करता है जिससे डीपफेक या नकली तस्वीरों के उपयोग को रोका जा सके।
  • जियो-टैगिंग और IP पता: ऑनबोर्डिंग के समय स्थान और नेटवर्क विवरण दर्ज किए जाते हैं जिससे संदिग्ध या सीमा-पार गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
  • PAN और अतिरिक्त पहचान दस्तावेज़: क्रिप्टो खातों को प्रमाणित कानूनी पहचान से जोड़ता है जिससे कर निगरानी और कानून प्रवर्तन में सुविधा मिलती है।
  • पेनी-ड्रॉप बैंक सत्यापन: 1 के लेन–देन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बैंक खाता सक्रिय है और उसी व्यक्ति का है, जिससे फर्जी खातों पर रोक लगती है।
  • OTP सत्यापन: पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर उपयोगकर्ता के नियंत्रण की पुष्टि करता है जिससे सुरक्षा का एक अतिरिक्त स्तर जुड़ता है।
  • मिक्सर, टम्बलर एवं प्राइवेसी टोकन पर रोक: ऐसे साधनों पर प्रतिबंध लगाता है जो लेन–देन के निशान छिपाते हैं जिससे अवैध क्रिप्टो गतिविधियों की ट्रैकिंग आसान हो सके।  

महत्त्व

  • क्रिप्टो एक्सचेंजों को औपचारिक वित्तीय निगरानी व्यवस्था के अंतर्गत लाता है।
  • निवेशकों की सुरक्षा और प्लेटफ़ॉर्म की जवाबदेही को मज़बूत करता है।
  • क्रिप्टो विनियमन के क्षेत्र में भारत को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित करता है। 

भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के बारे में

  • धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के लागू होने के बाद भारत सरकार द्वारा वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग में 18 नवंबर, 2004 के कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) की स्थापना की गई। 
  • एफ.आई.यू.-आई.एन.डी. संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, संसाधित करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने के लिए केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है। 

उद्देश्य एवं कार्य

  • एफ.आई.यू.-आई.एन.डी. धन शोधन एवं संबंधित अपराधों के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को आगे बढ़ाने में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खुफिया, जांच तथा प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयासों के समन्वय और सुदृढ़ीकरण के लिए भी जिम्मेदार है। 
  • यह संदिग्ध या असामान्य वित्तीय लेनदेन और अंतर्निहित आपराधिक गतिविधियों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए एक बहु-अनुशासनात्मक इकाई है ताकि धन शोधन व संबंधित अपराधों को रोका जा सके तथा उनसे निपटा जा सके।
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