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भारतीय कौवे की प्रजाति को समाप्त करने की घोषणा

  • केन्या सरकार ने आक्रामक प्रकृति एवं स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र पर हानिकारक प्रभाव के कारण वर्ष 2024 के अंत तक दस लाख भारतीय घरेलू कौवे (Corvus splendens) को समाप्त करने की योजना शुरू की है।
  • केन्या में भारतीय घरेलू कौवे को आक्रामक विदेशी पक्षी माना जाता है। ये मूल रूप से भारत एवं एशिया के अन्य हिस्सों पाए जाते हैं और शिपिंग गतिविधियों के माध्यम से विश्व में फैल गए हैं। 
  • ये वर्ष 1940 के आसपास पूर्वी अफ्रीका में पहुंचे हैं।

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कौवे की संख्या में वृद्धि का प्रभाव 

स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव

  • इन कौवों द्वारा छोटे स्थानीय पक्षियों के घोंसलों को नष्ट करने तथा उनके अंडों व चूज़ों का शिकार करने से उनकी संख्या में उल्लेखनीय कमी आ गयी है।
    • प्रभावित स्थानीय पक्षी प्रजातियों में स्केली बैबलर, पाइड कौवे, माउस-कलर्ड सनबर्ड, वीवर बर्ड, कॉमन वैक्सबिल एवं विभिन्न जलीय पक्षी शामिल हैं।
  • ये विशेष आवासों एवं संरक्षित अभयारण्यों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं, जिससे सोकोके स्कॉप्स उल्लू जैसी प्रजातियां खतरे में पड़ रही हैं।

आर्थिक एवं सामाजिक चिंताएँ

  • केन्या में विदेशी मुद्रा अर्जन का तीसरा सबसे बड़े साधन के रूप में पर्यटन व्यवसाय कौवों के कारण बाधित हो रहा है क्योंकि वे पर्यटकों व होटल व्यवसायियों को असुविधा पहुंचा रहे हैं।
  • इनके द्वारा अंकुरित फसलों को नुकसान पहुंचाने एवं चूज़ों का शिकार करने के कारण किसानों व मुर्गीपालकों को नुकसान उठाना पड़ता है।

भारतीय घरेलू कौवे से संबंधित प्रमुख तथ्य

  • प्रजाति : कॉर्विडे परिवार के अंतर्गत कॉर्वस स्प्लेंडेंस (Corvus splendens)
  • चर्चित नाम : भारतीय घरेलू कौवा, घरेलू कौवा, भारतीय कौवा, ग्रे-नेक्ड कौवा, सीलोन कौवा, कोलंबो कौवा
  • प्राप्ति स्थान : कॉर्वस स्प्लेंडेंस प्रजाति के कौवे सामान्यतः भारत, नेपाल एवं बांग्लादेश में पाए जाते हैं।
  • संरक्षण स्थिति : 
    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम : अनुसूची-II में शामिल 
    • IUCN स्थिति : संकट मुक्त (Least Concerned)

केन्या : महत्वपूर्ण तथ्य 

  • पूर्वी अफ्रीका के भ्रंश घाटी में स्थित इस देश की राजधानी नैरोबी है।
  • भूमध्य रेखा पर स्थित यह देश हिंद महासागर के पश्चिमी तट से सटा हुआ है।
  • इसकी सीमा उत्तर में इथियोपिया, उत्तर-पूर्व में सोमालिया, दक्षिण में तंजानिया, पश्चिम में युगांडा एवं उत्तर-पश्चिम में सूडान से मिलती है।
  • विक्टोरिया झील केन्या, युगांडा एवं तंजानिया देशों के मध्य स्थित है। इसके अतिरिक्त इस देश में तुरकाना झील भी पायी जाती है।
  • इस देश का नाम माउंट केन्या पर रखा गया है। यह अफ्रीका महाद्वीप की दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। 
  • माउंट किलिमंजारो (तंजानिया) अफ़्रीका का सबसे ऊँचा  पर्वत है। 
  • समुद्र तटीय क्षेत्र हिंद महासागर के किनारे पर स्थित होने के कारण यह देश जैव-विविधता से संपन्न देश है। 
  • इसके उत्तरी हिस्से में लामू द्वीप (Lamu Archipelago) चापाकार रूप में स्थित है, जिस पर समुद्र जल स्तर में वृद्धि के परिणामस्वरूप डूबने का खतरा बना हुआ है।
  • केन्या की प्रमुख नदी ‘ताना’ है जो केन्या पर्वत से निकलकर ताना मैदान में प्रवाहित होते हुए हिंद महासागर में विलीन हो जाती है।
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