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पोषण ट्रैकर (Poshan Tracker)

संदर्भ 

  • पोषण अभियान भारत का प्रमुख राष्ट्रीय पोषण मिशन है जो संयोजन, प्रौद्योगिकी और सामुदायिक लामबंदी के माध्यम से पोषण परिणामों में सुधार करने पर केंद्रित है। इसे 8 मार्च, 2018 को शुरू किया गया था। यह भारत सरकार का प्रमुख बहु-मंत्रालयी मिशन है जो समयबद्ध लक्ष्यों, डिजिटल निगरानी और जन आंदोलन के विज़न के साथ एक एकीकृत ढांचे के तहत काम करता है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पोषण ट्रैकर को मार्च 2021 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) के माध्यम से सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत डिजिटल पहुँच सुनिश्चित करने के लिए लॉन्च किया गया। 

पोषण ट्रैकर के बारे में

  • पोषण ट्रैकर एक मोबाइल-आधारित गवर्नेंस एप्लिकेशन है जो पोषण अभियान की डिजिटल रीढ़ है। 
  • यह अभियान के तहत डिजिटल निगरानी को मजबूत करने के लिए प्राथमिक शासन उपकरण के रूप में कार्य करता है।  
  • यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आंगनवाड़ी सेवाओं के तहत पोषण और सेवा वितरण की तत्‍क्षण निगरानी को सक्षम बनाता है। 
  • पोषण ट्रैकर आंगनवाड़ी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, सेवा वितरण, लाभार्थी कवरेज और विकास निगरानी पर डेटा कैप्चर करता है। पोषण ट्रैकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक सहायता के रूप में काम कर रहा है और बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और कम वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान और पोषण सेवा वितरण की अंतिम मील ट्रैकिंग के लिए इसका लाभ उठाया जा रहा है। 

पोषण ट्रैकर की आवश्यकता:

  • पोषण ट्रैकर से पहले, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 11 मैनुअल रजिस्टर बनाए रखने पड़ते थे। इससे निर्णय लेने में देरी हुई और सेवा अंतराल पैदा हुआ। 
  • घर का दौरा काफी हद तक व्यक्तिगत ज्ञान और अनुभव पर निर्भर करता था, जिससे असंगत आकलन होता था। 
  • कोई लाभार्थी प्रमाणीकरण प्रणाली या राज्य और केंद्रीय योजनाओं के साथ एकीकरण भी नहीं था, जिससे कुपोषण को दूर करने में दक्षता कम हो गई।

पोषण ट्रैकर से प्राप्त सुविधाएं:

पोषण ट्रैकर ने कई प्रौद्योगिकी-सक्षम सुविधाओं के माध्यम से इन कमियों को दूर किया :

  • आधार-आधारित सत्यापन : आधार सत्यापन के माध्यम से लीकेज और फर्जी प्रविष्टियों पर नियंत्रण लगता है और केवल पंजीकृत लाभार्थियों को लाभ वितरण सुनिश्चित करता है। 
  • चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) : अंतिम व्यक्ति तक ट्रैकिंग संभव बनाता और सेवा वितरण प्रामाणिकता के लिए एकीकृत आधार मिलता है। 
  • आईटी-सक्षम होम विज़िट शेड्यूलर : ऑटो-शेड्यूलिंग और आयु-उपयुक्त परामर्श संकेतों के साथ 23 संरचित घर के दौरे का समर्थन करता है। इनमें गर्भावस्था के दौरान 4 विजिट, पहले प्रसवोत्तर महीने में 4, 2 महीने से 1 वर्ष तक 7, 1-2 वर्ष से 5 और 2-3 वर्ष से 3 दौरे शामिल हैं। 
  • ईसीसीई सामग्री वितरण : 3-6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आधारशिला पर आधारित 249 वीडियो, 190 वॉयस नोट्स और 159 ईसीसीई गतिविधि पीडीएफ प्रदान करता है। 

क्या आप जानते हैं ?

  • मार्च 2024 में शुरू किया गया आधारशिला, 3-6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम है। 
  • आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से कार्यान्वित, आधारशिला खिलौनों, कला, संगीत और कहानी कहने का उपयोग करके खेल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देता है। 
  • आधारशिला बच्चों के संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास का समर्थन करती है और उन्हें ग्रेड 1 के लिए तैयार करती है। 
  • पोषण कैलकुलेटर : ऊंचाई, वजन, आयु और जेंडर का आकलन करने के लिए डब्ल्यूएचओ बाल विकास मानकों का उपयोग करता है, साथ ही मानकीकृत, सटीक विकास निगरानी के लिए बच्चों को स्टंटिंग, कम वजन, वेस्टिंग, एसएएम/एमएएम और अधिक वजन/मोटापे में वर्गीकृत करता है। 
  • पोषण हेल्पलाइन : शिकायत पंजीकरण के लिए टोल-फ्री नंबर 1515 का प्रबंध किया गया है। 
  • स्मार्टफोन और कनेक्टिविटी : सभी आंगनवाड़ी महिला स्मार्टफोन से लैस हैं; इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रति आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रति वर्ष 2,000 रुपये प्रति वर्ष है। इसके अलावा प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र में विकास निगरानी उपकरण (जीएमडी) उपलब्ध कराए जाते हैं। 

पोषण ट्रैकर की पहुँच एवं विस्तार: 

पोषण ट्रैकर को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया था, जिसकी शुरुआत देश भर में विस्तार करने से पहले पायलट परियोजनाओं से हुई थी

  • मई 2026 तक, भारत सरकार ने सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में पोषण ट्रैकर का राष्ट्रव्यापी कवरेज हासिल कर लिया है।
  • मई 2026 तक, पोषण ट्रैकर ने 8.93 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को पंजीकृत किया। यह मंच बचपन और किशोरावस्था से लेकर गर्भावस्था और मातृत्व तक जीवन चक्र में छह लाभार्थी श्रेणियों को कवर करता है, जो पोषण अभियान के व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है। 
  • पोषण ट्रैकर आंगनवाड़ी सेवाओं के तहत पूरक पोषण कार्यक्रम (एसएनपी) की सशक्‍त निगरानी को सक्षम बनाता है। मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 5.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कम से कम 15 दिनों के लिए एसएनपी प्राप्त हुआ, जबकि 5.17 करोड़ लाभार्थियों को कम से कम 21 दिनों के लिए एसएनपी प्राप्त हुआ। 
  • मई 2026 तक, पोषण ट्रैकर ने सत्यापित आधार-प्रमाणित डेटा का उपयोग करके 7.7 करोड़ से अधिक बच्चों के लिए एक लाइव मासिक डेटाबेस ट्रैकिंग पोषण संकेतक बनाए रखा। यह प्लेटफ़ॉर्म शीघ्र डैशबोर्ड, हीट मैप और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सक्षम बनाता है।
  • ट्रैकर ने मई 2026 तक 0-5 वर्ष की आयु के 6.3 करोड़ से अधिक बच्चों के लिए विकास निगरानी को भी सक्षम किया, जिसमें लगभग 94 प्रतिशत पंजीकृत लाभार्थियों को शामिल किया गया। यह एप्लिकेशन स्टंटिंग, कम वजन, वेस्टिंग (एसएएम/एमएएम), और अधिक वजन/मोटापे के संकेतकों को ट्रैक करता है। 

पोषण ट्रैकर: डिजिटल इंडिया की सफलता की कहानी 

  • पोषण ट्रैकर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए सरकार द्वारा प्रौद्योगिकी के सफल उपयोग को प्रदर्शित करता है। इसने पेपर-आधारित रिपोर्टिंग को तत्‍क्षण, साक्ष्य-संचालित पोषण शासन में बदल दिया। 
  • 2023 में, पोषण ट्रैकर को महिला सशक्तिकरण पर जी20 मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में प्रदर्शित किया गया था। अध्यक्ष के वक्तव्य में पोषण निगरानी और ईसीसीई वितरण में इसकी भूमिका को मान्यता दी गई। 
  • अप्रैल 2025 में, पोषण ट्रैकर को पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में बेहतरीन काम के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार मिला। साथ ही, सितंबर 2024 में ई-गवर्नेंस पर हुई 27वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में पोषण ट्रैकर ने ई-गवर्नेंस (गोल्ड) के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता। 
  • यद्यपि पोषण ट्रैकर डिजिटल इंडिया विज़न के तहत भारत की बढ़ती डिजिटल क्षमता को दिखाता है और एक अच्छी तरह से पोषित विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभाता रहेगा।
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