प्रारंभिक परीक्षाGS Paper-I : अंतरराष्ट्रीय संगठन, विश्व व्यापार संगठन (WTO), भारत एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा समसामयिक घटनाएँ GS Paper-II : अंतरराष्ट्रीय संबंध, विश्व व्यापार संगठन (WTO), अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय समझौते तथा वैश्विक शासन (महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संरचना, अधिदेश एवं कार्यप्रणाली) । UPSC GS Paper-III : भारतीय अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, WTO एवं व्यापार समझौते, ई-कॉमर्स एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा वैश्वीकरण (उदारीकरण, वैश्वीकरण, निवेश मॉडल एवं आर्थिक विकास से संबंधित विषय) । |
WTO के ई-कॉमर्स समझौते को लेकर भारत की आपत्ति केवल एक व्यापारिक मुद्दा नहीं, बल्कि WTO की निर्णय प्रक्रिया और बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था (Multilateral Trading System) से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। भारत का मानना है कि वैश्विक व्यापार नियम सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति (Consensus) से बनने चाहिए, ताकि प्रत्येक देश के हितों की समान रूप से रक्षा हो सके। वहीं, विकसित देश छोटे समूहों (Plurilateral Agreements) के माध्यम से डिजिटल व्यापार के नियमों को शीघ्र लागू करना चाहते हैं। यह विवाद भविष्य में WTO के कामकाज और वैश्विक डिजिटल व्यापार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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प्रश्न. WTO के प्रस्तावित Electronic Commerce Agreement (ECA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3 मुख्य परीक्षा प्रश्न"विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सर्वसम्मति (Consensus) आधारित निर्णय प्रक्रिया का महत्व स्पष्ट कीजिए। हाल ही में प्रस्तावित ई-कॉमर्स समझौते (Electronic Commerce Agreement-ECA) पर भारत की आपत्तियों के संदर्भ में बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए। |
FAQ: WTO ई-कॉमर्स समझौता (Electronic Commerce Agreement - ECA)प्रश्न 1. WTO का ई-कॉमर्स समझौता (Electronic Commerce Agreement-ECA) क्या है ? उत्तर : यह WTO के कुछ सदस्य देशों द्वारा प्रस्तावित एक समझौता है, जिसका उद्देश्य वैश्विक डिजिटल व्यापार (Digital Trade) के लिए साझा नियम बनाना और ई-कॉमर्स को सुगम बनाना है। प्रश्न 2. भारत ने WTO के ई-कॉमर्स समझौते पर आपत्ति क्यों जताई है ? उत्तर : भारत का कहना है कि किसी भी नए WTO समझौते को संगठन के आधिकारिक नियमों का हिस्सा बनाने के लिए सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति (Consensus) आवश्यक है। 66 देशों के इस समझौते को बिना सर्वसम्मति के लागू करने का प्रयास WTO की प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। प्रश्न 3. WTO में 'Consensus' (सर्वसम्मति) का क्या अर्थ है ? उत्तर : सर्वसम्मति का अर्थ है कि किसी निर्णय का कोई भी सदस्य देश औपचारिक रूप से विरोध न करे। WTO में अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय इसी आधार पर लिए जाते हैं। प्रश्न 4. Annex-4 क्या है ? उत्तर : Annex-4, WTO समझौतों का वह भाग है जिसमें Plurilateral Agreements (बहुपक्षीय-सीमित समझौते) शामिल होते हैं। ये केवल हस्ताक्षरकर्ता देशों पर लागू होते हैं, लेकिन इन्हें WTO ढांचे का हिस्सा बनाने के लिए सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक होती है। प्रश्न 5. Plurilateral Agreement क्या होता है ? उत्तर : Plurilateral Agreement ऐसा समझौता है, जिसमें WTO के सभी सदस्य नहीं, बल्कि इच्छुक कुछ सदस्य देश ही भाग लेते हैं और वही इसके प्रावधानों का पालन करते हैं। |
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